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कथनी और करनी पर निबंध Essay On Kathni aur Karni In Hindi

कथनी और करनी पर निबंध Essay On Kathni aur Karni In Hindi

हम अपने आस पास ऐसे बहुत से लोग देखते है जो कहते तो कुछ ही करते और कुछ ही अर्थात उनकी कथनी और करनी में बड़ा भेद होता हैं. 

दरअसल अपनी कथनी को करनी में बदलने के लिए अपार साहस और दृढ इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती हैं व्यक्ति अपने मानसिक साहस के दम पर ही इन्हें एक कर सकता हैं.

आलस्य तथा कमजोर मनोबल के कारण व्यक्ति अपनी कथनी को करनी में नहीं बदल पाता हैं ऐसा करने के लिए निरंतर संघर्ष एवं कठिन प्रयत्न की आवश्यकता होती हैं.

कई बार इस कहावते सुनने में बड़ी प्रिय होती हैं मगर उन्हें जीवन में चरितार्थ करने की बात आती है तो अमूमन लोग उतना साहस भी नहीं करते हैं. 

कमजोर मन के चलते ही व्यक्ति की कथनी और करनी में फर्क आता हैं. व्यक्ति जितना अधिक साहसी और मन से शक्तिशाली होगा उसकी कथनी और करनी में भेद बेहद कम होगा.

अंग्रेजी की मशहूर कहावत है कि करनी से अधिक कथनी बोलती हैं. लोग इसके महत्व को भूल चुके है हर कोई बिना मेहनत के फल प्राप्ति की इच्छा करते हैं. बहुत से लोग ऐसे मिलेगे जो कहेगे बहुत ठंड है मगर गर्मी पैदा करने के वो कोई हल नहीं खोजेगे.

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