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Essay On Kutki In Hindi कुटकी पर निबंध

Essay On Kutki In Hindi कुटकी पर निबंध 

Essay On Kutki In Hindi कुटकी पर निबंध : इसका वैज्ञानिक नाम पनिकम अन्तीदोटेल (Panicum antidotale) हैं भारत में इसकी कृषि पंजाब व गंगा यमुना बेसिन के अतिरिक्त हिमालय में भी की जाती हैं यह पनिकम घास के परिवार का पौधा हैं. पंजाब में स्थानीय भाषा में इसे घिरी अथवा घमूर के नाम से भी जाना जाता हैं.

कुटकी के पौधे में बहुत से आयुर्वैदिक एवं जडीबुटी के गुण विद्यमान होते हैं. कुटकी का उपयोग बुखार, चर्बी के रोगों तथा डायबीटीज के ईलाज में भी कारगर हैं. यह हिमालय में 3 से 5 हजार मीटर की ऊँचाई पर पाई जाती हैं.

कुटकी आकार में बेहद छोटा पादप हैं. जिन पर सफेद अथवा नीले फूल लगते हैं. इसकी पत्तियों का आकार 15 सेमी तक होता हैं. वही कुटकी की जड़ 25 सेमी तक लम्बी होती हैं. इनके फल डेढ़ सेमी तक लम्बे होते हैं. स्वाद में कुटकी बेहद कड़वी होती हैं यह शरीर में कफ तथा पित्त जैसी समस्याओं के निवारण में भी सहायक हैं.

अच्छी उपजाऊ मिटटी में कुटकी का उत्पादन किया जाता हैं जिसमें खाद का उपयोग भी किया जाता हैं. कीटनाशी के रूप में भी इसका उपयोग होता हैं.

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