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Letter To My Motherland In 1000 Words In Hindi

Letter To My Motherland In 1000 Words In Hindi
मातृभूमि के प्रति पत्र :

प्रिय मातृभूमि,

     इस पहले पत्र को लिखते समय मुझे अपार खुशी और आशीर्वाद मिलता है मेरे द्वारा लिखे आपके प्रति मेरी मन की  भावनाएं शब्दों के रूप में कागज पर उतरती हैं.

     "भारतवर्ष" ये मेरे वतन का नाम हैं आजकल इन्हें भारत के रूप में दुनियां पहचानती हैं मगर यह मुझे पीड़ा देने की बजाय अपार श्रद्धा व भक्ति का एहसास कराता हैं कि मेरी भारत माता दुनियां की सभी भाषाओं का कितना सम्मान करती हैं यह मेरी मातृभूमि की महानता को दिखाती है.

माँ भारती के पुत्र सभी मेरे भाई बहिन है उनकी लग्न एवं परिश्रम तथा आपके आशीर्वाद की बदौलत भारत भूमि स्वर्ग की तरह लगती हैं. यहाँ वह सब कुछ है जो स्वर्ग की कल्पना में सोचा जाता हैं दिनकर हमें अपने ताप व रोशनी से अँधेरे को भगाता हैं.

आपके आशीर्वाद से वर्षभर नदिया बहती हैं.ठंडी पवने, पेड़, इनके मीठे फल सब आपकी कृपा से हैं जिन्हें खाकर हम अपना पेट भरते हैं. प्रिय मातृभूमि आपने रोगग्रस्त मानव के ईलाज के लिए भी औषधि हमें जड़ी बूटियों के रूप में प्रदान की हैं. गर्मी के मौसम में ठंडी हवा के झोके त्रस्त जीवन में आनन्द की अनुभूति दिलाते हैं. ये हवा, पक्षी, गगन सब कुछ आपका हैं.

प्रिय मातृभूमि, हजारों सालों का यह भारत एक दर्दांत दौर से अभी निकला हैं. अपनी स्वतंत्रता के 70 सालों के बाद से इसने विकास की प्रतिस्पर्धा में बड़े बड़े शक्तिशाली देशों को पीछे धकेल कर एक बार फिर भारत का परचम लहराया हैं. खनिज, वन व भारत भूमि के प्राकृतिक संसाधनों ने भारत को नई ताकत दी है, देश को हर रात सोने के बाद फिर से उठ खड़ा होता है और अपने दायित्वों को पूरा करने में लग जाता हैं.

माता आपने हमें सच्चाई, इमानदारी का पाठ पढाया हैं. वंदेमातरम् और भारत माता के जयकारे हर भारत प्रेमी के दिल को छू जाते हैं.

प्रिय मातृभूमि आपने हमें सब कुछ दिया, आपने ही सभी को साथ लेकर चलने की गति प्रदान की, आपके ही वर से बुद्धिमता व कौशल से सही राह चुनने की क्षमता मिली है, जो मानव कल्याण में सार्थक सिद्ध हुई हैं. आपने किसी मजहब पंथ का होने की बजाय एक इन्सान बनने की परवरिश दी.

मानव की उन्नति और प्रगति के लिए आपने आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, सत्येंद्रनाथ बोस, जगदीश चंद्र बसु, सी आर राव, पी सी महलानोबिस, श्रीनिवास रामानुजन, सी वी रमन, ए पी जे अब्दुल कलाम, विक्रम साराभाई जैसे गणितज्ञों तथा वैज्ञानिकों को कुछ करने की सद्बुद्धि प्रदान की.

आपने हमें मानवता को अन्धकार से उजाले की ओर ले जाने वाले श्री रामकृष्ण, स्वामी विवेकानन्द, नेताजी सुभाष बोस, गांधीजी, ए पी जे अब्दुल कलाम सरीके संत और समाज सुधारक दिए. माँ आपने अमृता देवी जैसी देवियों के साथ अपना आशीर्वाद हम तक पहुंचाया.

रवीन्द्रनाथ टैगोर, दिनकर, निराला, प्रेमचन्द, पंत जैसे महान कवियों को इस लोक में अवतरित किया, जिनकी उपलब्धियों का कोई अंत नहीं हैं. हम सभी माँ आपके बालक हैं आप ही हमारी सच्ची गुरु मार्गदर्शक व पालन हार हो.

अंत में, मैं आपसे वायदा करता हूँ मैं पावन धरा भारत भूमि की महिमा को कभी झुकने न दूंगा. मैं अपनी मातृ भूमि को कभी भी गुलामी की जंजीरों में फिर से जकड़ने दूंगा. मैं अपनी जान देकर भी भारत भूमि और इस भूमि पर सभी संतानों को अपना भाई बहिन मानते हुए उनके सम्मान की रक्षा का पूर्ण प्रयत्न करूँगा.
          - माँ का पुत्र

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