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विचार पर निबंध Essay on thoughts in hindi

विचार पर निबंध Essay on thoughts in hindi: आपका स्वागत है मित्रों विचार अर्थात थोट्स क्या है और हमारे जीवन तथा सुख दुःख में इनका क्या प्रभाव पड़ता हैं. आज के निबंध, स्पीच भाषण अनुच्छेद में हम विचार के बारें में ही जानकारी प्राप्त करेंगे चलिए आगे बढ़ते है और पढ़ते है इस निबंध को.

विचार पर निबंध Essay on thoughts in hindi

विचार क्या है यह किस तरह व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन लाते हैं यह किस तरह से व्यक्तित्व में  बदलाव लाते और यह व्यक्ति के जीवन को असली आजादी दे पाते हैं. आईने में व्यक्ति स्वयं के शरीर को तो देख पाता है परंतु अगर उसके स्वभाव को जानना हो या उसे अपने स्वभाव के दर्शन करने हो तो किस आईने में देखें

ऐसा कौन सा आईना है जो इंसान को अपने अंदर चलने वाले विचारों का दर्शन करवाता है वह आइना है यह संसार यानी आसपास रहने वाले लोग तथा रोजाना घटित होने वाली घटनाएं जी हां इन्हें देखकर आपके अंदर उठने वाले भाव आपके वैचारिक ढांचे का आईना है और मजेदार बात यह है कि इंसान जानता ही नहीं कि संसार उसका आईना है  वह उसमें अपनी   छवि देखना तो दूर वह आईने अर्थात लोगों और घटनाओं में उलझ कर रह जाता है

आज तक आपने आत्मज्ञान आत्म परीक्षण के बारे में सुना होगा या कहीं पढ़ा होगा परंतु  इस आर्टिकल से आप आत्मज्ञान के बारे में अच्छी तरह से जान पाएंगे.

इंसान की छोटी सोच की वजह से वह अपने शब्दों की परिभाषा से दो का निर्माण करता है इस बात को समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं "तहगानुढटम" के बारे में विचार करें उपरोक्त शब्द के बारे में सोचें और उसके बारे में जानकारी था करने का प्रयास करें कुछ समय के लिए आप आंखें बंद करके भी यह कर सकते हैं.

और गौर करें कि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न नहीं होगा क्या कारण है क्यों नहीं हुआ जाहिर सी बात है आपके अंदर इस शब्द के बारे में कोई विचार नहीं आया होगा ऐसा किस लिए होता है आपके मन में इस शब्द की कोई परिभाषा क्यों नहीं बनी क्योंकि आपको पता ही नहीं है कि वह क्या है इसलिए कोई असर नहीं आया इससे यह सिद्ध हो जाता है कि आपको उन्हीं शब्दों को सुनकर विचार आते हैं जिनका अर्थ जिन की परिभाषा आप अपने मन में पहले से बना लेते हैं

 अतः जब आप शब्दों को जिस परिभाषा के साथ जोड़ते हैं अगर वह नकारात्मक है तो दुख होता है और सकारात्मक है तो खुशी होती है सुख का अनुभव होता है वास्तविक रुप से आपको किसी भी चीज के साथ कोई परिभाषा जोड़ने की जरूरत ही नहीं है इसके लिए आप यह समझे कि दुनिया में दुख है ही नहीं बल्कि दुख तो हमारे मन में जो विचार उठते हैं उनकी वजह से दुनिया में है जीवन में घटने वाली प्रत्येक घटना पर जब आप अपने विचार जोड़ देते हैं उसे परिभाषित करने का प्रयास करते हैं उन्हें सच मानने लगते हैं तब  आपके विचार कई गुना बढ़ जाते हैं

जीवन की जो भी घटनाएं आपको दुखद लगती है उनको आप परंपरागत नजरियों से ही देखते रहेंगे तो वह आपको वैसा ही नकारात्मक फल देगी जैसे सदियों से देती आ रही है मतलब जाहिर है की उन घटनाओं की पुनरावृति होने पर आप दुख का ही सामना करेंगे.

आप अपने जीवन में घटने वाली बहुत सी घटनाओं से दुखी होते हैं परंतु क्या कभी आपने विचारों और दुख के कारणों को जानने का प्रयास किया क्या कभी आपने अपने दो की जड़ तक जाने का प्रयास किया नहीं ना परंतु अगर आप सही अर्थों में दुखों से मुक्ति चाहते हैं तो आपको इन दोनों की तह तक जाना होगा दुखों के कारणों को जानना होगा और यही एकमात्र उपाय है इन से छुटकारा पाने का.

इस तरह से आप अगर दुखों का कारण जानने की कोशिश करेंगे तथा इसका विचारों के साथ संबंध जानेंगे तो उसके बाद आप उन घटनाओं से दुख की जगह या जो घटना आपके दिल को ठेस पहुंचा रही है उन घटनाओं से अब आनंद की प्राप्ति होगी पहले जो लोग आपको दुख देते हुए प्रतीत होते थे.

वह आपको मित्र लगने लगेंगे परंतु यह तभी संभव है जब आप प्रत्येक विचार के साथ सकारात्मकता को जोड़ कर देखेंगे और यही असली स्वभाव का पता लगाने में सहायक होगा जैसे कोई व्यक्ति आपके साथ दुर्व्यवहार करता है या जिसकी आप प्रतीक्षा कर रहे थे वह समय पर नहीं पहुंचे या आप बार-बार कॉल करते हैं कॉल अटेंड ना करें या रास्ते में चलते वक्त किसी ने आपके पैर को चोट पहुंचाई या आपकी कोई उपेक्षा कर रहा है आदि आदि.

इन सभी छोटी-छोटी घटनाओं के लिए जो जिम्मेदार कारण होते हैं वह ज्यादा संवेदनशील नहीं होते और जब आप इसकी तह तक जाएंगे तब आप जान पाएंगे कि वास्तव में उन घटनाओं का कारण कुछ और है और आपके विचार उनके कारण कुछ और मांग रहा था हो सकता है आपको स्वयं को इन घटनाओं का कारण माना जाने लगे तो आप फिर दोबारा उन घटनाओं के घटित होते समय यह जान पाएंगे कि वास्तव में  इन घटनाओं में गलतियां अपनी भी होती है.

इस प्रकार आप खोज करते करते अपनी गलतियां ढूंढते ढूंढते उस स्तर पर पहुंच जाएंगे कि फिर आपको जीवन में घटित होने वाली हर घटना आनंद देगी सुख की अनुभूति होगी तथा जीवन  के सभी  दुख गायब से हो जाएंगे और आप सही अर्थों में जीवन जिएंगे परिभाषा समझ पाएंगे जीवन के उद्देश्य और लक्ष्यों को जान पाएंगे साथ ही साथ आप जीवन का आनंद उठाने में इतने व्यस्त हो जाएंगे कि आपको पता ही नहीं लगेगा कि क्या चल रहा है और यही मानव जीवन की असली आजादी है.

आशा करता हूँ दोस्तों विचार पर निबंध Essay on thoughts in hindi का यह निबंध आपकों पसंद आया होगा. यह लेख कैसा था अपने विचार कमेंट कर जरुर बताएं.

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