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विद्या का महत्व पर निबंध | Essay On Vidya Ka Mahatva In hindi

विद्या का महत्व पर निबंध | Essay On Vidya Ka Mahatva In hindi व्यक्ति के जीवन निर्माण में सबसे अहम भूमिका शिक्षा (Education) की होती हैं. बालक को जैसे परिवेश में शिक्षा दी जाएगी वह उसी के अनुरूप बनेगा, आज का हमारा निबंध जीवन में विद्या के महत्व उपयोगिता के विषय पर दिया गया हैं. उम्मीद करते है ये निबंध आपको पसंद आएगे.

विद्या का महत्व पर निबंध | Essay On Vidya Ka Mahatva In hindi

विद्या का महत्व पर निबंध | Essay On Vidya Ka Mahatva In hindi

विद्या का महत्व निबंध नंबर 1

भूमिका--- आज के समय में विद्या को सर्वोपरि माना जाता रहा है जोकि बहुत ही आवश्यक है। भारत की कुछ मुख्य समस्याओं में एक समस्या विद्या की भी है, जो कहीं ना कहीं दूर करने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को सही रास्ता दिखाया जा सके।


परिचय--- शिक्षा को सामान्य रूप से हम सभी स्वस्थ्य वातावरण का पर्याय मानते हैं जो कहीं ना कहीं हमें मानसिक और शारीरिक रूप से भी प्रभावित करता है। शिक्षा के माध्यम से आंतरिक गुणों को निखारने का मौका प्राप्त होता है जो बिल्कुल सही हैं।


विद्या का महत्व---  विद्या का हमारे जीवन में बहुत ज्यादा महत्व होता है ऐसा माना जाता है कि बिना विद्या के हम सही रास्ते पर नहीं जा सकते और एक अच्छी सोच को विकसित नहीं कर सकते हैं। जब भी हम अपने जीवन को ऊंचाई की ओर ले जाने की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारी विद्या ही हमारे काम आती है।


जो कहीं ना कहीं हमें सही रास्ते पर ले जाने के साथ-साथ हमें उस मुख्य रास्ते की ओर भी ले जाती है जिसके माध्यम से हम अपनी मंजिल तक पहुंच सकते है। ऐसी स्थिति में अगर हम खुद के और समाज के भलाई के बारे में सोचते हैं, तो निश्चित रूप से हमें विद्या के महत्व के बारे में विस्तार से चर्चा करने की आवश्यकता होगी।


जिस व्यक्ति ने भी विद्या के महत्व को सही तरीके से समझने में कामयाबी हासिल की है उसने कभी भी जीवन में पीछे मुड़कर नहीं देखा है। ऐसे में हमेशा विद्या के महत्व को आगे बढ़ाने के लिए पुरजोर कोशिश करना आवश्यक माना गया है।


विद्या के महत्व की मुख्य बातें


आज के समय में विद्या का महत्व समाज के हर वर्ग के लोगों को समझना आवश्यक है ताकि आने वाले समय में देश और समाज को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ जुड़कर पुरजोर कोशिश की जा सके। ऐसे में विद्या के महत्व की सबसे मुख्य बात सोच का विकसित होना है क्योंकि जब तक हमारी सोच सही तरीके से विकसित नहीं हो पाएगी तब तक हम सही तरीके से आगे बढ़ पाने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। ऐसे में उन सभी लोगों को भी विद्या हासिल करने का पूरा हक है, जो भारत देश में रहते हुए अपना जीवन यापन कर रहे हैं।


इसके अलावा विद्या के महत्व के लिए एक दूसरे का आधार होना भी आवश्यक माना गया है। जिस प्रकार समाज में हम एक दूसरे के ऊपर निर्भर हैं और अकेले कोई भी कार्य कर पाने में सक्षम नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में विद्या का प्रसार करने के लिए हमें ही लोगों का आधार बनना होगा ताकि ऐसे लोग को भी लाभ प्राप्त हो सके जो कहीं ना कहीं विद्या प्राप्त करने में खुद को कमतर समझते हैं।


विद्या के माध्यम से आज के समय में ऐसे लोगों को भी हमने अपने जीवन में बढ़ते हुए देखा है जो आर्थिक रूप से मजबूत नहीं थे। ऐसी स्थिति में यह माना जा सकता है कि विद्या के महत्व को विस्तार करने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है ना कि आर्थिक रूप से।


विद्या के माध्यम से हम दूसरे लोगों को भी जागरूक करने का कार्य कर सकते हैं जिन्होंने कभी भी विद्या के महत्व को नहीं समझा है। हमारे समाज में कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने विद्या को सही तरीके से आकलन नहीं किया है और कई प्रकार की गलतियां कर रहे हैं। ऐसे में अगर विद्या के महत्व को सही तरीके से बयां करना है,तो  उन सभी लोगों को भी जागरुक करने का कार्य करना होगा जिसके माध्यम से वे स्वतः ही आगे बढ़ कर अपना विशेष योगदान दे सकें और विद्या के महत्व को समझते हुए दुबारा किसी भी प्रकार की गलती से बच सकें। इन सब के पहले हमारी भी जवाबदारी होती है कि हम समाज के समूचे वर्ग को एक साथ लेकर आगे बढ़ने के बारे में विचार विमर्श करें ताकि इससे किसी को भी हानि ना हो सके।


निष्कर्ष---- इस प्रकार से हमने जाना कि शिक्षा बेहतर भविष्य के लिए एक आवश्यक पर्याय हैं जो कहीं ना कहीं हमारे वातावरण के लिए आवश्यक है जिससे समाज को एक नया आईना प्राप्त होता है।



निबंध नंबर 2 


भूमिका--- सामान्य रूप से देखा जाता है कि यदि समाज का व्यक्ति सही तरीके से अपना विकास करना चाहता है तो इसमें विद्या का खास योगदान होता है जो हमें ऊंचाइयों तक लेकर जाता है, ऐसे में विद्या का महत्व हर तबके के लिए आवश्यक है।


परिचय--- इस मुख्य निबंध के माध्यम से विद्या और विद्यावान चरित्र के बारे में जानकारी दी जा रही है ताकि खुद के भावों को ध्यान में रखते हुए महत्व को समझा जा सके और इसे बढ़ावा देने के बारे में सोचा जाए।


विद्यावान व्यक्ति की विशेषताएं

आज के समय में ऐसा व्यक्ति जिसने विद्या का सही तरीके से अर्जन कर लिया हो उसे विद्यावान व्यक्ति की सूची में रखा जाता है और ऐसे में हम उस विद्यावान व्यक्ति के माध्यम से कई सारी विशेषताओं को ग्रहण किया जा सकता है जो कहीं ना कहीं हमारे जीवन के लिए मददगार साबित होती हैं।


सबसे पहली बात अपने जीवन को सही रास्ते पर लाने की होती है जहां हम अपने समाज और परिवार के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में एक  विद्यावान व्यक्ति ही सही तरीके से अपने जीवन के फैसलों को लेते हुए समाज में एक मिसाल कायम कर सकता है जो कहीं ना कहीं हम सभी के लिए भी कामयाबी की दिशा खोलता है।


अगर जीवन में कोई मुश्किल घड़ी या कठिनाई आ जाती है ऐसी स्थिति में विद्या बहुत काम आती है। इसके माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को भी सही रखा जा सकता है और साथ ही साथ उस कठिनाई को दूर किया जा सकता है। 


अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने का कार्य एक विद्वान व्यक्ति बहुत अच्छे तरीके से करता है क्योंकि विद्या के माध्यम से उसके अंदर अपने मनोभावों को व्यक्त करने की अभिव्यक्ति होती है जिसके माध्यम से वह आत्मविश्वास को बढ़ाते हुए अपने ज्ञान का प्रसार कर सकते हैं साथ ही साथ आने  वाले किसी भी हालातों का भी सामना किया जाता है। ऐसे में जब भी अपने हालातों को काबू में ना किया जा सके और खुद को किसी परेशानी में महसूस किया जाए। ऐसी स्थिति में अपने आत्मविश्वास को बढ़ाया जाना बहुत ही जरूरी माना जाता है, जो कहीं ना कहीं विद्या के माध्यम से ही पूरा हो पाता है।


विद्यावान व्यक्ति हमेशा अपने निर्णय को लेने के लिए खुद ही बाध्य होते हैं और जिसके लिए किसी की भी आवश्यकता महसूस नहीं करते हैं। अपने उन निर्णयों को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने का कार्य किया जा सकता है जो सिर्फ विद्या के माध्यम से ही सीखा जा सकता है। अच्छे और गलत निर्णयों के लिए खुद ही जिम्मेदारी लेना एक बहुत बड़ी बात मानी जाती है जो विद्या के माध्यम से सार्थक होती है जिसके माध्यम से हम अच्छे और बुरे में फर्क करना सीख सकते हैं और अपने निर्णयों को स्वयं लेकर भी भविष्य को सुरक्षित रखा जा सकता है।



विद्या का समाज में महत्व


सामाजिक रुप से ही विद्या का बहुत ज्यादा महत्व समझा जाता है क्योंकि इसके माध्यम से समाज को एक नए बदलाव की ओर प्रेरित किया जा सकता है। प्राचीन सभ्यता में ऐसा देखा जाता था कि कई सारी ऐसी विचारधाराएं थी जो अंधविश्वास की ओर इशारा करती थी और समाज को एक अंधेरे की ओर डाल देती थी। ऐसी स्थिति में अगर समाज पूर्ण रूप से विद्या के सुपुर्द हो जाए तो निश्चित रूप से ही समाज में विद्या के महत्व को बढ़ाते हुए नेक कार्य किए जा सकते हैं जो कहीं ना कहीं हमारे लिए फायदेमंद होंगे और भविष्य मैं भावी पीढ़ी इससे काफी हद तक प्रेरित हो सकती है।



विद्या का महत्व उस समय भी समाज के लिए कारगर होता है जब समाज में कुछ कुरीतियां काफी हद तक आगे बढ़ती हैं और उन्हें दूर करना नामुमकिन जान पड़ता है। ऐसे में विद्या के महत्व को सामाजिक स्तर पर आगे बढ़ाते हुए नए कार्य किए जा सकते हैं जहां मुख्य रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को प्रेरित करते हुए विद्या के महत्व को बताया जाता है। ऐसे में समाज से उन बुराइयों को दूर किया जा सकता है जो हमारे लिए सही साबित नहीं होती हैं और जिनकी वजह से हमारे जीवन में कई प्रकार के बदलाव देखे जाते हैं। 


आज के समय में कई सारे युवा वर्ग के अलावा वृद्धजन भी विद्या को विशेष रूप से मान्यता देने की बात करते हैं ताकि कोई भी नागरिक देश में विद्या से वंचित ना हो सके और आने वाले समय में भी देश के लिए नए नए प्रयोग करते रहें।



पिछले कुछ वर्षों की तुलना में समाज में आज के समय में कहीं ज्यादा इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, पायलट, टीचर, राजनेता बन कर उभर रहे हैं। ऐसे में यह अनुमान लगाया जा सकता है कि शिक्षा का हमारे समाज में काफी हद तक वृहद रूप से बढ़ोतरी देखी जाती है जहां कहीं ना कहीं हम खुद को सही दिशा की ओर ले जाने के लिए तत्पर नजर आते हैं। 


अक्सर एक बात पर गौर किया जाता है कि अगर समाज में ज्यादा से ज्यादा वर्ग शिक्षित होते हैं और विद्या प्राप्त करते हैं ऐसी स्थिति में समाज के अंदर से दकियानूसी सोच को बाहर किया जा सकता है जिसकी वजह से हम कहीं ना कहीं पिछड़ते जा रहे है।


इसके अतिरिक्त यदि विद्या का सामाजिक रूप से विकास होता है तो यह वैश्वीकरण को भी बढ़ावा देता हैं जो संपूर्ण विश्व को एक नई विरासत देने के लिए भी तैयार होता हैं जिसके माध्यम से कुछ ऐसी बात को भी समझा जा सकता है जिसे आज तक विद्या के अभाव में समझना मुश्किल था। 


अतः निश्चित रूप से ही विद्या के प्रचार प्रसार में हिस्सा लेते हुए एक अहम भूमिका निभाने की आवश्यकता है ताकि किसी भी प्रकार से लोगों को नुकसान ना हो पाए और वे अपनी जिंदगी को एक सही दिशा की ओर बेहतर कदम के साथ बढ़ा सकें।


ऐसा भी देखा जाता है कि भारत के कुछ युवा वर्ग  विदेशों में जाकर शिक्षा ग्रहण करते हैं और फिर वापस अपने वतन में आकर उस शिक्षा का विशेष योगदान दूसरे लोगों को देते हैं जिसके माध्यम से सोचने और समझने की शक्ति विकसित हो सकती है और कई प्रकार के लाभ प्राप्त हो सकते हैं।


ऐसी स्थिति में अगर समझते हुए हालातों का सामना किया जाए तो निश्चित रूप से ही बाहरी मुल्कों से भी विद्या के सही तरीको को नापते हुए आगे बढ़ने में सभी लोगों की मदद की जा सकती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली विशेष सम्मेलन में आयोजित होने वाले इस प्रकार के संगोष्ठी में हिस्सा लेते हुए भी खुद के बदलाव को साबित किया जा सकता है, जो कहीं ना कहीं विद्या के महत्व को बताते हैं।


निष्कर्ष--- इन निबंधों के माध्यम से  सामाजिक रूप से जागरूक रहने की बात की जा रही है ताकि  विद्या को नए स्तर तक पहुंचाते हुए अपनी बात रखी जा सके और  किसी भी तरह से लक्ष्य से पीछे ना हटा जाए।


अंतिम शब्द


इस प्रकार से हमने जाना कि विद्या का महत्व आज के समय में बढ़ता ही जा रहा है जो कहीं ना कहीं हमारे लिए एक अच्छी खबर साबित हो सकती है क्योंकि इसके माध्यम से हम खुद को भी साबित कर सकते हैं और निरंतर रूप से आगे बढ़ने के लिए प्रयत्नशील रह सकते हैं। हमारे द्वारा किए गए अथक प्रयासों के माध्यम से हम समाज में भी एक नई शुरुआत कर सकते है।


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