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ऊर्जा संरक्षण पर निबंध | Essay on Energy Conservation in Hindi

ऊर्जा संरक्षण पर निबंध | Essay on Energy Conservation in Hindi-वर्तमान में समय में उर्जा संसाधनों की जरुरत लगातार बढती जा रही है. जिस कारण उर्जा संरक्षण करना जरुरी है. ऊर्जा का सिमित उपयोग करके हम हमारी वर्तमान की मांगोको पूरा करके हमारी भावी पीढ़ी के लिए ऊर्जा का संग्रहण कर सकते है. आज के आर्टिकल में हम ऊर्जा संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे.

ऊर्जा संरक्षण पर निबंध | Essay on Energy Conservation in Hindi

ऊर्जा संरक्षण पर निबंध | Essay on Energy Conservation in Hindi

प्रकृति के द्वारा हमें ऊर्जा के विभिन्न प्रकार के स्त्रोत उपलब्ध करवाए गए हैं, जिसका इस्तेमाल हमारे द्वारा दैनिक तौर पर किया जा रहा है। ऊर्जा के स्त्रोत की वजह से ही हमारे दैनिक जीवन के कई काम सरल हो गए हैं। 


हमारे पास ऊर्जा के विभिन्न प्रकार के स्त्रोत मौजूद हैं। जैसे कि लकड़ी, कोयला, पेट्रोल। इन सभी उर्जा के स्त्रोतों का हम सिर्फ एक ही बार इस्तेमाल कर सकते हैं। दोबारा से हम इनका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।


ऊर्जा संरक्षण का मतलब ऊर्जा की बचत करना ही होता है जिसके अंतर्गत हमारे द्वारा जब किसी काम को किया जाए तो उसमें कम से कम ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाए। 


जैसे कि अगर हमें अपने किसी काम को करने के लिए कहीं जाना है अथवा आना है तो हमें कार की जगह पर साइकिल या फिर स्कूटी का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसा करने से कार में जो इंधन लगता है उस की बचत होगी और इस प्रकार से हम उस ऊर्जा का इस्तेमाल ना करते हुए उसका संरक्षण करेंगे।


प्रकृति के द्वारा इंसानों को कई उपहार दिए गए हैं जिनमें से ऊर्जा भी एक महत्वपूर्ण उपहार है और उर्जा इंसानों के इतने अधिक काम आ रही है कि इसका रोजाना इस्तेमाल बढ़ता ही जा रहा है।


इंसानों के द्वारा अपने जीवन को सफल बनाने के लिए रोजाना नए नए उपकरणों का अविष्कार किया जा रहा है, जिसकी वजह से उन उपकरणों को चलाने के लिए इंधन की आवश्यकता पड़ रही है और इस प्रकार से इंधन की खपत भी अत्याधिक हो रही है।


पहले जहां गर्मी के मौसम में ही गर्मी से राहत पाने के लिए पंखा चलाए जाते थे वही जनसंख्या वृद्धि होने की वजह से जब तापमान बढ़ गया है तो गर्मी के मौसम में लोग गर्मी से निजात पाने के लिए एसी का इस्तेमाल कर रहे हैं और एसी भी ऊर्जा से ही चलती है।


ऊर्जा संरक्षण के नियम के अंतर्गत उर्जा को ना तो पैदा किया जा सकता है ना ही उसे खत्म किया जा सकता है बल्कि उसे किसी एक रूप से किसी दूसरे रूप में चेंज किया जा सकता है अर्थात किसी काम को संपन्न करने में जितनी ऊर्जा चली जाती है उतनी ही ऊर्जा दूसरे रूप से पैदा भी हो जाती है क्योंकि उर्जा को किसी भी रूप में खत्म नहीं कर सकते हैं।


दुनिया भर में हर साल 14 दिसंबर के दिन विश्व ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है। इसे इसलिए मनाया जाता है ताकि लोग ऊर्जा संरक्षण के महत्व को समझें क्योंकि जिस प्रकार से लगाकर जनसंख्या में वृद्धि हो रही है वैसे वैसे ही ऊर्जा की खपत भी काफी तेजी के साथ हो रही है। 


इसलिए हर साल ऊर्जा संरक्षण दिवस के मौके पर लोगों को ऊर्जा के महत्व के बारे में समझाया जाता है और उन्हें ऊर्जा को बचाने के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया जाता है।


इस दिन लोगों को यह समझाया जाता है कि उन्हें ऊर्जा का इस्तेमाल सोच समझ कर करना चाहिए और जब कभी ऊर्जा का इस्तेमाल करने की आवश्यकता ना हो तो ऊर्जा से चलने वाली चीजों को बंद कर देना चाहिए। जैसे कि लाइट, पंखा, कूलर, टीवी, फ्रिज इत्यादि।


हमारी धरती पर ऊर्जा के जो भी संसाधन है वह सीमित मात्रा में ही मौजूद हैं। इसलिए ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण पर विशेष तौर पर ध्यान देने की आवश्यकता है और सिर्फ ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है बल्कि ऊर्जा संरक्षण के नए-नए तरीकों पर विचार करने की भी जरूरत है। 


हमारे द्वारा ऊर्जा के उत्पादन से अधिक उसका इस्तेमाल किया जाता है जैसे कि प्राकृतिक गैस, कोयला, तेल यह सभी सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाते हैं और यह सभी परंपरागत ऊर्जा के संसाधन है जिसका इस्तेमाल एक बार करने के पश्चात हम दोबारा से इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। 


अगर ऊर्जा के इन स्त्रोतों का संरक्षण नहीं किया जाता है तो एक न एक दिन इनकी समाप्ति अवश्य ही हो जाएगी जिसे दोबारा से प्राप्त करना हमारे लिए काफी कठिन हो जाएगा और इनकी अगर कमी भी हो जाती है तो इनके द्वारा जो साधन संचालित होते हैं उन्हें चलाने में भी हमें काफी मशक्कत करनी पड़ेगी और हो सकता है कि उर्जा के इन स्त्रोतों के अभाव में इन से चलने वाले साधन अपनी जगह से भी ना हिल पाए।


हम इंसानों के जीवन में ऊर्जा संरक्षण का अत्याधिक महत्व है। यह हमारे भविष्य के लिए ऊर्जा तो बचाता ही है साथ ही पर्यावरण को भी प्रदूषण मुक्त रखने का काम करता है। 


इसके अलावा पर्यावरण को स्वच्छ बनाने का काम करता है जिसकी वजह से हमें एक स्वस्थ जिंदगी जीने में सहायता प्राप्त होती है।


अगर हमारी पीढ़ी द्वारा उर्जा को सही प्रकार से संरक्षित किया जाता है तो हमारी जो आने वाली पीढ़ी है वह भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगी, साथ ही साथ हम अगर ऊर्जा का संरक्षण करते हैं तो हम अपने देश की मुद्रा को भी घटाने से बच सकेंगे।


ऊर्जा संरक्षण करने के लिए हमें कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता होती है। जैसे कि हमें ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोत जैसे की पवन चक्की और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल अधिक से अधिक करना चाहिए, क्योंकि सूरज एक प्राकृतिक संसाधन होता है और यह हर समय उपलब्ध रहता है। 


इसीलिए हमें अपने घरों की छत पर सोलर पैनल स्थापित करना चाहिए और सौर ऊर्जा के द्वारा पैदा होने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल टीवी, फ्रिज, पंखा, कूलर इत्यादि को चलाने के लिए करना चाहिए। इससे बिजली की ऊर्जा की खपत कम होगी।


इसके अलावा हमें अपने घरों में कम ऊर्जा की खपत करने वाले बल्ब का इस्तेमाल करना चाहिए साथ ही अच्छी क्वालिटी के घरेलू उपकरण का भी इस्तेमाल करना चाहिए जो बिजली की कम खपत करते हो। 


इसके अलावा हमें दैनिक जीवन में कुछ छोटे-छोटे ऊर्जा संरक्षण के उपाय आने चाहिए जैसे कि हमें हमेशा खाना कुकर में पकाना चाहिए और आवश्यकता ना हो तब हमें कूलर, पंखा,  मोटर, एसी, फ्रिज, टीवी को बंद कर देना चाहिए ताकि यह अनावश्यक रूप से ना चले और ऊर्जा की खपत ना करें।