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स्वतंत्रता दिवस पर कविता 15 अगस्त 2021 Independence Day Poem In Hindi

भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर कविता 15 अगस्त 2021 Independence Day Poem In Hindi:- हमारा देश लम्बे समय तक ब्रिटिश सरकार का अधीन रहने के पश्चात् 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ. इस दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते है. आज के आर्टिकल में स्वतंत्रता दिवस पर छोटी-बड़ी कविताए दी गई है.

स्वतंत्रता दिवस पर कविता 15 अगस्त 2021 Independence Day Poem In Hindi

स्वतंत्रता दिवस पर कविता 15 अगस्त 2021 Independence Day Poem In Hindi

एक बड़ी ही मधुर कहानी आज सुनाना चाहती हूँ
भारत माँ के अनुपम प्रेम की गाथा गाना सुनाना चाहती हूँ
एक बड़ी ही सुंदर देवी चिड़ियाँ सोने की कहलाती थी
समस्त जगत की सारी खुशियाँ जहाँ सहज ही मिल जाती थी
प्रेम करुणा विनय सरलता जो बच्चों को अपने सिखलाती थी
वसुधैव कुटुम्बकम् और अतिथि देवो भवः यह गीत सदा वो गाती थी
बच्चे निर्मल कोमल सच्चे मन के भोले थे
माता की वो करते सेवा मिलजुलकर रहते थे
संस्कारों से प्रेरित होकर बच्चों ने जब अतिथि का सम्मान किया
निर्दयी निर्लज्ज अतिथि फिरंगियों ने तब आतिथ्य का अपमान किया
निर्दयता से करते थे शासन बच्चों को वो मार पीट कर
तडप रही थी माँ भारती बच्चों की यह हालत देखकर
आये तब माँ के वीर सपूत सुनकर माँ की करूण पुकार
मार भगाया दुष्टों को आया माँ को तब करार
लौट आई फिर माँ की प्यारी सी कोमल मुस्कान
गूंज उठी फिर अम्बर तल पर जय भारत की मीठी गान
ख़ुशी ख़ुशी दिन बीत रहे थे चारो तरफ छाई थी खुशहाली 
चारो तरफ बिखर रही थी, भारत माँ की करुण लाली
फिर अचानक हुआ यूं खो गये कही माँ के सपूत 
आपस में ही लड़ते है वो मन में बैर रखते है वो
सरिफियत का ओढ़ के चोला अपनों को ही डसते है वो
माँ की चिंता कहा किसी को बस अपनी ही चिंता करते है वो
जाने कैसे रहती है वो घुट घुट कर ही जीती है वो
सह रही थी जुलुम फिरंगियों के क्योंकि बेटा साथ था
अब कैसे वो सहे बताओं अबकी बार तो बेटों का ही हाथ था
ना जाने कैसे अब कौन सुनेगा भारत माँ की करुण पुकार
ना जाने अब कौन आएगा बनकर माँ का सच्चा लाल
- Monika Rangire

Short Poem On 15 August In Hindi

कितने सुभाष, आजाद, पटेल कुर्बान हुए इस माटी पर
कितनों ने अपने पुण्य लहू से दीवार रंगी बन सावरकर
इस देश के जर्रे जर्रे से वो आवाज सुनाई देती है
क्या शून्य हुई वो भारत माँ जिसने उपजे वो वीर अमर

अंग्रेजों के जुल्म मिटाने को गांधी ने नमक बनाया था
बहरों को आवाज सुनाने भगत ने हथियार उठाया था
कैसे भूलू मैं दास जतिन को अन्न त्याग बलिदान दिया
साइमन की लाठी सहने को लाला ने सीना तान दिया
गुलामी नहीं खुद मौत चुनी, नाम आजाद कर दिया अमर
कितने सुभाष आजाद पटेल कुर्बान हुए इस माटी पर

दुश्मन की जब भी आँख उठी जवानों का था मुहतोड़ जवाब
हमने समझौता एक्सप्रेस भेजी पाक ने हमें दिया कसाब
भाई भाई की संज्ञा देकर वसुधैव कुटुम्बकम् किया चरितार्थ
पर देश का स्वर्ग हथियाना, चीन का सबसे उसपर स्वार्थ
कारगिल मुंबई डोकलाम कुछ घाव हमारी स्मृति पर
कितने सुभाष आजाद पटेल कुर्बान हुए इस माटी पर

जो वीर देखते है हमको बस ये आस लगाए हुए 
कि व्यर्थ न जाए कुर्बानी नवयुवक देश बचाए हुए 
क्षेत्र रंग जाति मजहब ये प्यारा भारत न तोड़े
हाफिज आँख उठा न सके कोई मुनिया स्कूल न छोड़े
विश्व गुरु बन दिखलाए स्वर्ण चिरैया फहराएं पर
कितने सुभाष आजाद पटेल कुर्बान हुए इस माटी पर
- धीरज पुरोहित

15 August Poem In Hindi

जब तक आसमां में सूर्य चाँद अवनी में गंगधर
तब तक ये शहीदी ये तिरंगा हम लहराएगे
तुझे कर के प्रेरणा का स्रोत खाते है कसम हम
देके अपनी जान इसकी आन को बचायेगे
हिन्द ही में जन्म लिया हिन्द ही में पले बढ़े
हिन्द ही का आज बहता धानियो में पानी है
हिन्द की महानता का वेदों ने बखान किया
हिन्द ही से बने हम सब हिन्दुस्तानी है
पलट के देखे यदि पन्ने इतिहास के तो
पाएगे यही हिंदी भाषा हिन्द से पुरानी है
जवानी में ही बूढी लगे ओढ़ के बंदिशी चादर
पर चादर के भीतर न तलि भर हिचकिचाहट है
चादर हटा कर देखों भाषाएँ मिला कर देखों
हिन्द में हमारी हिंदी रानियों की रानी है
बन के जवान जो काम नहीं माँ के आए
ऐसे नौजवानों की धिक्कार वो जवानी है
माँ का दर्द सुनकर न खून खौलता हो जिसका
ऐसे युवाओं में बहता रक्त नालियों का पानी है
- Pragya Dwivedi

Short Poem On Independence Day 2021 In Hindi

सूरज की किरण नया पैगाम लाती है
संध्या की ललिमा याद दिलाकर जाती है

न रूकना कभी तू आवाज आती है
होना भारत पे कुर्बान कहके कलिया मुस्काती है

होता है भौरा कुर्बान सांस थम जाती है
तितलियों की मधुर मुस्कान सफलता भर लाती है

जागता है हिंदुस्तान भारत माता हर्षाती है
यही प्रेरणा तो दुश्मनों के नाम जलाती है

सूरज की किरण नया पैगाम लाती है
- Nikita Rathore

15 August Kavita

आओ याद करे उनकी कुर्बानी
जिनकी वजह से आज हम यह त्यौहार मना रहे है
ना भूलें कभी उन्हें
जिनकी वजह से आज हम आजादी से जी रहे है

ना भूलें वह पहला जय हिंद का नारा
जो था नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा
ना ही भूलें उन लोगों को
जिनके लिए आराम हराम था

हम आजाद ही रहे है और आजाद ही रहेगे
यह कहकर दुश्मन की गोलियों का सामना किया
भगत सिंह के साथ मिलकर
भारत की आजादी का प्रण लिया

आओ करे याद उन्हें
कहानियां जिनकी सुनकर बड़े हुए है
लक्ष्मीबाई, तिलक या गोखले
या फिर मदन मोहन मालवीय
सत्यमेव जयते की नींव रखने वाले

एक दिन का उत्सव मनाकर
मात्र ना निभाए औपचारिकता
बल्कि चले उनके कदमों पर
और साकार करें भारत उनके सपनों का
- पवनी संघी

Independence Day 2021 Kavita In Hindi

यही मेरा हिंदुस्तान है
सारी दुनिया और जानती मानती है
भारतभूमि की गौरव गाथा महान है
गर्व है मैं इस देश का वासी हूँ
और मेरा यही मेरा हिंदुस्तान है

जहाँ पर जन्में अशोक सम्राट
सरदार पटेल की प्रतिमा विराट
वृन्दावन में कन्हा आगरा में ताज
कश्मीर से कन्याकुमारी तक राज
ना सिर झुकने दूंगा
ना सिर कटने दूंगा
मातृभूमि की हम ही संतान है
और यही मेरा हिंदुस्तान है

आज यह आजादी मूल्यवान है
इसकी नीव में सैकड़ों बलिदान है
वतन की राह पर चलने वाले
हर घर में जोशीले जवान है
आजाद भगत बिस्मिल
सब लड़े बढ़े साथ मिल
वही तो संघर्षों की पहचान है
और यही मेरा हिंदुस्तान है

गर्व से लहराया जो ध्वज तिरंगा
धीरन चिन्नामलई के श्रम से रंगा
सौ साल के संघर्ष की लड़ाई है
सूत्रधार मंगल पांडे लक्ष्मी बाई है
ये व्यर्थ ना जाने पाए
हम ही इसे आगे बढाएं
ये मिशाले आन बान शान है
और यही मेरा हिंदुस्तान है

भिन्न भिन्न भाषा संस्कृति के लोग
हम सब एक है यह अद्भुत संयोग
खान पान पहनावा सब अलग है
हमारी पहचान सत्य अहिंसा योग
कभी गरम कभी नरम
हर हाल में जूझते हम है
यही हमारी राष्ट्रीय पहचान है
और यही मेरा हिंदुस्तान है
- संकेतराज कनोजे

Independence Poem In Hindi

भारत मां की रक्षा के लिए अपना कर्तव्य निभाया है
मृतभूमी के गौरव पर न्योछावर उनकी काया है।
जिनको परिवार से ज़्यादा,ये देश तिरंगा प्यारा हैं
ऐसे वीर सपूतों को,शत शत नमन हमारा है।
ना पूछो ज़माने को,काया हमारी कहानी है ,
हमारी पहचान तो सिर्फ ये है के हम हिन्दुस्तानी है।
लिपट कर उस तिरंगे में,
आज भी कई बदन आ रहे है
यूं ही नहीं हम
आज़ादी का जशन मना रहे है।
सागर जिसके पांव परवारे
हिमालय जिसका सरताज है
गूंज रहा दुनिया में डंका भारत का
खुशियों का दिन आज है।
-Sana Siddiquie

15 August 2021 Par Poem

आजादी का यह उपहार दिया जिसने भारत को आधार
क्रांति रूपी लघु से सिंचित धरा भारत की हैं ये अभिजित
बलिदान ये व्यर्थ न जाए कीमत इसकी हम चुकाए
शिक्षा स्वास्थ्य और अवसंरचना बस यही हो सपना अपना
आत्मनिर्भर भारत हो अपना तभी पूर्ण होगा ये सपना
आओ मिलकर करे नमन जिसने की ये धरा अमन
बलिदान ये व्यर्थ न जाए कीमत इसकी हम चुकाए
बापू का था जो एक सपना स्वच्छ भारत हो अपना
आओ मिलकर करे विचार सपना हो ये साकार
जय जवान जय किसान का नारा अब संकल्पित करे
युवा शक्ति के बल पर भारत अब विश्व गुरु बने
बलिदान ये व्यर्थ न जाए इसकी कीमत हम चुकाएं
- शिवम मेहरा

Kavita On Independence Day 2021

मेरा भारतवर्ष महान मेरा भारतवर्ष महान 
अद्भुत भूगोल इतिहास भव्य राजनीति में कीर्तिमान
मेरा भारतवर्ष महान मेरा भारतवर्ष महान 

प्रकृति संस्कृति खुशहाली देखो केरल से कश्मीर
विश्व पटल पर अद्वितीय निराली भारत की तस्वीर
सागर करता है अठखेली खड़ा हिमालय सीना तान
मेरा भारतवर्ष महान मेरा भारतवर्ष महान 

भोजन भाषा रंग रूप विविध अनेकता में एकता है
विविध पंथ मत दर्शन पर राष्ट्र में धर्मनिरपेक्षता है
यहीं शंखनाद होता है और यहीं गूंजती अजान
मेरा भारतवर्ष महान मेरा भारतवर्ष महान 

सोलह कलाओं के धारी जन्मे यहाँ गिरिधर गोपाल
गायन वादन नृत्य कला कुशल भारत के लाल
रणकुशल धनुर्धारी सपूत जिनका नहीं बखान
मेरा भारतवर्ष महान मेरा भारतवर्ष महान 

अन्तरिक्ष के नियम गढ़े और शून्य खोजा हमने
धन्वन्तरि और आयुर्वेद अरोग्य द्वारा खोला हमने
हमने दुनिया को बतलाया पौधों में भी होते प्राण
मेरा भारतवर्ष महान मेरा भारतवर्ष महान 

रणकुशल यहाँ वीरांगनाए धरा गगन में परचम लहराएं
विज्ञान राजनीति समाज हर क्षेत्र में कौशल दिखलाया
सतयुग से कलयुग अनंत नारी शक्ति का यशगान
मेरा भारतवर्ष महान मेरा भारतवर्ष महान 
- नवीन कुमार जैन

Independence Day Par Kavita

शत्रु सीमा लांघ न जाए
खड़े रहे चट्टानों से
देशभक्ति क्या होती है
तुम पूछो जरा जवानो से
शीश झुकाया नहीं भले ही
अपने प्राण गवाएं है
भरा पड़ा इतिहास हमारा
वीरों के बलिदान से

धुल चटाई बैरी को
जब उसने आँख उठाई है
भारत की सेना के रूप में
उसकी मृत्यु आई है
मार भगाया है दुश्मन को
सरेआम मैदानों से
भरा पड़ा है इतिहास हमारा
वीरों के बलिदान से
- देवांशु सिंह

Small Poem On Independence Day 2021 In Hindi

भक्ति मन को तन से भिन्न कर ले जाती एक मार्ग पर
आलोक में उसके मन निश्छल हो चलता परमार्थ पर
इस भक्ति में देशप्रेम का राग जब लग जाए
सर्वस्व न्यौछावर करने भी फिर मन कभी न कतराएं

राष्ट्र राष्ट्रीयता देता जीवन को पहचान दिलाता है
विशाल धरा पर हमें एक भिन्न आभास कराता है
फिर उस पर भी यदि मस्तक श्रद्धा से न झुके
तो वो राष्ट्र नहीं स्व का निरादर मान स्वयं से पूछे

कि धरातल की वेदी पर उसका पालनकर्ता कौन
जीवन वृक्ष का उसके निरंतर सृजनकर्ता मौन
उत्तर मुख से न निकलेगा मन खिन्न हो जाएगा
राष्ट्र की महत्ता पर जब कोई प्रश्नचिह्न लगाएगा.

देशभक्ति किसी अन्य विशेषण की सहाय नही
यह संज्ञा तो स्वयं में चरितार्थ परम सुख हिताय यही
जब जब साँसे राष्ट्र के नाते अपना दम तोड़ती है
तत्क्षण राष्ट्र के साथ अमरत्व प्राप्त वे करती है

प्रकृति भी मोहित जिस पर नित संध्या तिरती हो जाती
गंगा जहाँ बहती सिन्धु लहरे जिसमें समाती
उसी राष्ट्र के हित को सर्वोपरि रख जहाँ अडिग हिमालय है
भक्ति करूं मैं उसी भारत कि जहाँ कण कण देवालय है
- यश गेहलोत

Best Poem On Independence Day In Hindi

वीर जवानों को गाथाएं जिसकी रग रग में बसती है
गंगा यमुना सी नदियाँ जिसके आंचल में बहती है

है यह धरा जहाँ नारी शक्ति का सम्मान
यह है वह भूमि जिसका करें युवा शक्ति आव्हान

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
है जहाँ एक दूजे के भाई

प्यार की बूंदों से सींचकर जिसको स्वर्ग बनाया है
मत भूलों वह बलिदान जिसने इसे आजाद कराया है

अपने प्राण और आत्म सम्मान
किया जिस देश पर सब कुर्बान

जिस देश ने दिया पार हर किसी को
दिया गणित का ज्ञान हर मुल्क को

है दिया जगत को शांति का संदेश
अनेकता में एकता दर्शाता उसका हर प्रदेश

योग सिखाकर सम्पूर्ण विश्व को इसने स्वस्थ बनाया
इसने ही तो हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया

करे हर कोई नतमस्तक होकर इसे प्रणाम
ऐसा महान है मेरा हिंदुस्तान
ऐसा महान है मेरा हिंदुस्तान
- दिशा शर्मा

15 August Kavita In Hindi

उठा के तिरंगे को 
कसम ये रोज खाते है
झुका के शीश अपना जो
वतन पे जान लुटाते है

रहे आजाद ये गणतंत्र
तिरंगा यूँ ही लहराएं
न भूलों उन शहीदों को
जिन्होंने प्राण गंवाए

बदल कर भी नहीं बदला
बहुत कुछ देश मे अपने
बना गणतंत्र ये अपना
कहाँ पुरे हुए सपने

लगी जो दीमकें जड़ में
करें है खोखला इसको
पिसा घुन की तरह कोई
पता चला यहाँ किसको

यहाँ वादे है दिलासे है
इरादों का पता किसको
छिपी पदों में बातें है
चली है वो पता किसको

वो फहराता तिरंगा भी
मौन हो सोचता हरदम
हिले बुनियादी ढाँचे में
घुटे गणतंत्र का अब दम

छली जाती है मानवता
सिसकती सहमी सी बैठी
धर्म जाति के फंदे में
आग आरक्षण की पैठी

असमता की लकीरों में
बना है न्याय भी अँधा
पनपता है रसूखों से
अपराध का फंदा

मना स्वतंत्रता का ये पर्व
निभा कर्तव्य पाएगे
जो बीता आज का ये दिन
हम सब भूल जाएगे
- सारांश भदौरिया

A Poem On Independence Day 2021 In Hindi

कर तू उद्घोष भारत के नाम का
बढ़ा तू मान उस वीर बलिदान का
नहीं मिली ये स्वतंत्रता यूँ ही
था इसमें त्याग घर परिवार का
वहां खून चली लाठी ख्वाब था स्वर्णिम हिंदुस्तान का
तो कर तू उद्घोष भारत के नाम का

नींव घरी और करा तिलक रानी ने स्वाभिमान का
बलिदान दिया परन्तु शीश झुका दिया अंग्रेजी सरकार का
तो कर तू उद्घोष भारत के नाम का

भगत को सूली चढ़ाकर भी झुका शीश जुल्मी सरकार का
लाभ हुआ इस देश को तिलक की योजना का
गणपति का नाम लेकर बढ़ा कदम अंत करने पराधीनता का
आजादी की ललक थी मन में विश्वास था जनमानस का

तो आए फरिश्ते बापू बनकर रखा ख्याल जन मानस का
ऊंच नीच के भेद भुलाकर लहराया परचम अहिंसा के मार्ग का
फहराया तिरंगा किले के मुख्य द्वार पर बनाया संविधान देश का
तो कर तू उद्घोष भारत के नाम का

सरदार की एकता को सलाम है इस देश का
नमन है उस बलिदान को जिसने लिखा स्वर्णिम इतिहास हिंदुस्तान का
तो कर तू उद्घोष भारत के नाम का
- अक्षत चावड़ा

Poem On Independence Day In Hindi For Class 1

अपना देश अपनी माटी
कश्मीर हो या गुहावटी अपना देश अपनी माटी
देश की रक्षा के लिए खड़े रहते लाखो शेर यहाँ

हो जाते है लाखो दुश्मन मिनटों में ही ढेर यहाँ
यही हुए थे वीर शिवाजी यहीं हुए राणा प्रताप
दोनों के ही नाम मात्र से दुखती ही मुगलों की छाती
कश्मीर हो या गुहावटी अपना देश अपनी माटी

माँ सीता को ले जाने रावण एक आया
कंस ने भी मथुरा में अपना कोहराम मचाया
कृष्ण और राम ने इनका वंश मिला दिया माटी
कश्मीर हो या गुहावटी अपना देश अपनी माटी

देश का दिल है म प्र और इसका भी दिल है भोपाल
यही पर है भीम बैठका और उज्जैन में महाकाल
जम्मू में है बर्फ पहाड़ केरल नारियल वृक्ष विशाल
बंगाल में है दुर्गा पूजा, गुजरात में गरबा धमाल

फिर सेना की हो बंदूके या बुजुर्गों की लाठी
कश्मीर हो या गुहावटी अपना देश अपनी माटी
बहती रहती यही पर नदियाँ गंगा, सरस्वती यमुना
फिर देखों तीनों का संगम कलकत्ता में मिलना
यहीं हुआ युद्ध पानीपत का, यही हुआ हल्दीघाटी
कश्मीर हो या गुहावटी अपना देश अपनी माटी
- राहुल सिंह चौहान

Patriotic Poem In Hindi For Independence Day 2021

जहाँ अभी तक कई ओहदे काबिलियत से ज्यादा पहचान के मोहताज है
आप ही बताइए मैं कैसे कहूँ कि मेरा मुल्क आजाद है

हवेलियो से मुल्क की दास्ताँ न बताइए
शक्ल ए हिंदुस्तान तो फुटपाथ पर आबाद है

जहाँ अंधे है सरकारी कुर्सियों के ठेकेदार
वहां खुशहाली और न्याय की बाते सब बकवास है

जहाँ भूख से तडप से मरते है हजारो बच्चे
यह गोदामों में भरे अनाजों की सौगात है

जहाँ हजारों के पास झूठा बीपीएल कार्ड है
आप ही बताइए मैं कैसे कहूँ कि मेरा मुल्क आजाद है

जहाँ का व्यापारी पेट काटकर भरता है इनकम टैक्स
लेकिन भ्रष्टाचारियों की पेटी फिर भी धन से आबाद है

जहाँ सहुलतों की सीमा है सिर्फ स्मार्टफ़ोनों तक
वहां गरीब कैसे जाने हुआ कौनसी योजना का आगाज है

जहाँ लाखों के पास झूठी डिग्रीयों की किताब है
आप ही बताइए मैं कैसे कहूँ कि मेरा मुल्क आजाद है

जब देश में अत्याचार भ्रष्टाचार का विनाश होगा
जब आम नागरिक और उसके अधिकारों का विकास होगा

जब कोई बच्चा भूख की तडप से नहीं मरेगा
जब नन्हे नन्हे हाथों से कोई बाल मजदूरी नहीं करेगा

जब फुटपाथ से उठकर हर गरीब नये घर में आएगा
जब हर जरूरतमंद अपनी योजनाओं से लाभ पाएगा

जब हर इंसान की रूह कहेगी, हाँ यही असली विकास है

तब मैं खुद सारी दुनियां से कहूँगी
हाँ मेरा मुल्क सही मायनों में आजाद है
- यशस्वी शर्मा

15 August Ke Liye Kavita In Hindi

हाँ कठिन है स्याहियो से पीर का विस्तार लिखना
हाँ कठिन है प्रष्ट पर जो छीन रहा अधिकार लिखना
राष्ट्र कल जो वक्ष अपना शान से ताने खड़ा था
है कठिन वो देश मेरा हो रहा लाचार लिखना

मैं मगर सामर्थ्य इसका आजमाना चाहता हूँ
मैं कलम से सो रहा भारत जगाना चाहता हूँ

वो जिन्होंने इस धरा के वास्ते निज प्राण खोए
तीर झेले छातियों पर दुश्मन के और न रोएँ
घास की रोटी चबाई महल अपने तज गार जो
पुष्प से पाले गये और कटको पर रात सोए

जिन्होंने बालपन में खेल में बंदूक बोई
अनगिनत बलिदान जिनके भूल कैसे पाए कोई
वो की जिनपर वीरता को भी अभिमान होगा
पीढियों तक याद रखे जाएगे यशगान होगा

मैं उन्ही के स्वप्न का भारत बनाना चाहता हूँ
मैं कलम से सो रहा भारत जगाना चाहता हूँ

थक गार है अब नयन इन क्रन्दनों के गुन्ज्नो से
हे विधाता आ छुडाओं रुढियों के बन्धनों से
कंठ मेरा हो गया है पीर के गीतों से आहत
पुष्प बेसुध हो गये कंटक के ज्यो आलिंगनों से

मैं अमन के गीत फिर से गुनगुनाना चाहता हूँ
मैं कलम से सो रहा भारत जगाना चाहता हूँ

लेखनी ललकारती आओ मिटाएं हर कुरीति
खत्म कर दे द्वेष हिंसा, स्वार्थ सिंचित राजनीति
जो मिले हमसे कहें अब हर तरह ही रौशनी है
कोई भी अब न सुनाए आसुओं की आपबीती

फिर से मैं स्वर्ण गौरेया बनाना चाहता हूँ
मैं कलम से सो रहा भारत जगाना चाहता हूँ
- निखिल महेश तुरकर

Hindi Independence Day Poem 2021

हिन्द पताके की शान को लहराया
केसरिया ध्वज को गगन की ऊंचाई तक चुम्हाया
दौ सो वर्षों की गुलामी से स्वतन्त्रता की ओर ले आया
यह जज्बा ही तो था उन जवानों का जिन्होंने
हमें गुलामी के पुतलों से इंसान बनाया

सुनहरे स्वतंत्र कल की उम्मीदों में जिन्होंने अपने आज को संघर्ष बनाया
यह जज्बा ही तो था उन जवानों का जिन्होंने आज वर्चस्व लहराया
देह जिनका शव हुआ वीरों की तरह कट मिटा पर विचार चलता आया
यह जज्बा ही तो है उन जवानों का जिन्होंने खुद से पहले
माँ की लाज को सरमाथे पर लाया

अपने अनुभवों से माँ को उन्होंने बेड़ियों से छुडाया
कठोर बंटवारे से देश को फिर चलना सिखाया
माँ को धर्म जात छूत अछूत काले गोर की
संकीर्णताओं से फिर स्वर्ण चिड़ि बनाकर उड़ाया
जज्बा ही तो है जवानों का जिन्होंने
स्वतंत्रता का सपना साकार करवाया है

गांधी की दांडी सुभाष की हिन्द सेना तक योगदान सबका प्रबल रहा
चरखे से बंटवारे तक हिन्दू मुस्लिम के नारों तक
माँ के बहादुर बेटों का संघर्ष जारी रहा
उनके लहू का कतरा कतरा बह चला
यह जज्बा ही तो था उन जवानों का जिससे
हमें यह स्वतंत्र सुनहरी धूप मिली

उन वीर सेनानियों के बलिदान से ही 
वर्तमान का यह भारत बना है
अनेक नारों से मातृत्व की भावना जगी है
इतिहास के तजुर्बे से हमें सीखना है
विद्रोह की स्मृतियाँ को यादों में सहेजना है
हमारे गुरु के दिखाए मार्ग पर चलना है
भारत को एक बार फिर विश्व गुरु बनना है
फिर से सोने की चिड़ियाँ बन उड़ चलना है
- श्रेया चौधरी

Independence Day Ke Liye Poem

जिसने दी है सुनो कुर्बानी
याद करती है उसको जवानी
देश पर जान निशा करने वाला
वो है भारत माँ का दुलारा
थोड़ी बातें है हमने बखानी
याद करती है उसको जवानी

नागासाकी हिरोशिमा का
जख्म अभी तक भरा नही
अमन चैन का कोई रावण
आज भी तक मरा नहीं
मत छीनो तुम हंसी ख़ुशी
अपने ही संतानों की
खेल रहे हो क्यों होली तुम
अपने ही अरमानों की

पराधीनता की बेड़ियों में
सदियों तक जकड़ा रहा ये देश
परतंत्रता के अन्धकार को दूर करने
बापू ने बदला अपना वेश

धर्म जाति और रंग रूप को भूलकर
एक हुए सब भारतवासी
फिरंगियों को भगाने के लिए
आगे आया हर देशवासी

स्वतंत्रता का यह पर्व
अजर रहे अमर रहे
आत्मनिर्भर भारत बने
स्वतंत्रता की ज्योत जलती रहे
अमर शहीदों के बलिदान को
हम भुला ना पाएगे
वीरों के इस धरती पर
अब गैर नहीं आ पाएगे

लहरे ये तिरंगा लहराए ये तिरंगा
रंगों में सब रंग न्यारा है
स्वतंत्र भारत आत्मनिर्भर भारत
ये भारत देश हमारा है
- काव्यांश किरण जैन 

Independence Day Poem In Hindi For Class 1

सीमा पर जाने को निकला जिस दिन मैं घर से था
खामोशी सन्नाटा पसरा उस दिन सारे शहर में था

बाबूजी ने पढ़ ली थी मेरे बुलावे की वो चिट्टी
कांपती आवाज में बोले बेटा तुझे बुलाती देश की मिट्टी

तिलक लगा के माँ ने मेरा मस्तक चूमा था
भर्रायी आवाज में कसके मुझकों बाहों में झुमा था

कल की रात हंसी ठिठोली में दोस्तों के साथ गुजारी थी
आज उन्ही दोस्तों ने पास आकर मुझे सलामी मारी थी

निकल रहा था घर से जब मैं तो रिश्ते भावुक हो रहे थे
गली मोहल्ले चौक चौराहे मुझे विदाई कह रहे थे

ना देखूंगा मुड़ के अब मैं ऐसा मन में ठाना था
भारत माँ का सपना ही मैंने अपना माना था

ना रोना मेरी याद में तुम माँ, मैं वापस जरुर आऊंगा
ना लौट सका वरदी में तो तिरंगे में लाया जाऊँगा

खा के गोली सीने पे देश की मिट्टी में मिल जाऊँगा
याद करेगी दुनियां मुझको मैं मर के भी अमर जवान बन जाऊँगा
- Asmita Dwivedi

Patriotic Poem In Hindi For Independence Day

।।वीरों की गाथा।।

सालों पहले लड़े गए
लड़े गए स्वतंत्रता संग्राम है।
कई वीरों ने प्राण त्यागे
कईयों ने छोड़ा संसार है।।

यह गाथा है उन वीरों की
जिनसे बनता ये देश महान है।
भारत देश का हर एक निवासी
करता उन्हें प्रणाम है।।

हाथों में तलवार लिए
वे थे लड़ने को तैयार।
मातृभूमि की रक्षा ही जैसे
उनका सारा संसार।।

यह फर्ज है हर देशवासी का
की याद रखें उनका बलिदान।
मरने के बाद भी अमर हैं
हमारे दिलों में वे वीर जवान।।

15 August Ke Liye Kavita In Hindi

मेरा देश महान है
सूरज जिसको रोशन करता
चन्द्रमा नित शीतलता भरता
त्याग और बलिदान से जिसका
भरा हुआ इतिहास है
मेरा भारत महान है

सूर कबीर मीरा सी भक्ति
अहिल्या दुर्गा लक्ष्मी सी शक्ति
वीर सुभाष भगत बिस्मिल के
आजादी के दीवानों का
लिखा हुआ इतिहास है
मेरा भारत महान है

वेद पुराण कुरआन तुम पढलो
गीता बाइबिल आगम सुन लो
मानवता का भाव ही
सब धर्मों का सार है
मेरा भारत महान है

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
आपस में सब भाई भाई
भिन्न धर्म है भिन्न जातियां
भिन्न आचार विचार है
अनेकता में एकता की सीख देता
तिरंगा हमारी पहचान है
मेरा देश महान है

मेक इन इंडिया स्किल इंडिया
स्टैंड अप इंडिया इनक्रीडिबल इंडिया
से युवा शक्ति को आगे बढ़ाना है
आत्मनिर्भर भारत स्वतंत्र भारत बनकर
कोरोना को हराना है
यही विश्वास यही पैगाम है
मेरा देश महान है
- समीक्षा जैन

Hindi Independence Day Poem

हो सर्वश्रेष्ठ हो विश्वगुरु ऐसा जग में व्यवहार करे
चलो देश के नवयुवकों हम नव भारत तैयार करे

हो प्रेम योग से परिपूर्ण जो भेदभाव को जाने ना
खुली सोच को जाने समझे रूढ़ीवाद पहचाने ना
कल को मुठी में करने वालों अब शुरुआत इस बार करें
चलो देश के नवयुवकों हम नव भारत तैयार करे

आधुनिकता के साथ चलें निज संस्कृति से भागें ना
परदेशी को भी माने पूछे पर स्वदेशी को त्यागे ना
आत्मसंचालन का नारा, हम जन जन में इजहार करें
चलो देश के नवयुवकों हम नव भारत तैयार करे

मातृभूमि से जुड़े रहे हम, माटी की बोली भूले ना
शहरों से आगे बढ़े चले त्यागे गाँव खेत की मूले ना
पिछड़े लोगों में जा जाकर साक्षरता उजियार करें
चलो देश के नवयुवकों हम नव भारत तैयार करे
- शिवांक साहू उज्ज्वल
भारत माँ की बेटी हूँ सौभाग्य ये मेरा
जिसकी मिट्टी का कण कण शौर्य धर्म से भरा है
जहाँ दिन की शुरुआत राम नाम से होती है

Independence Day Ke Liye Poem

मैं भारत माँ की बेटी हूँ
जहाँ रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, महाराणा के शौर्य
रानी पद्मावती के बलिदान रण के वीरबांकुरो की
गाथ सुनाई जाती है
मैं उस देश की बेटी हूँ

खुशनसीब हूँ भारत माँ तेरी मिट्टी में पली हूँ
तेरी मिट्टी के कण कण की लाज रखूंगी माँ
भारत माँ की बेटी हूँ सौभाग्य ये मेरा है
भारत माता की जय
- लक्ष्मी सोलंकी

Independence Day Poem In Hindi For Class 1

आजादी का महापर्व हम सबको प्यारा लगता है
हर सैनिक भारत माता का राजदुलारा लगता है
सरहद पर लड़ने वाला हर वीर निराला लगता है
आजादी का महापर्व हम सबको प्यारा लगता है
माँ की हालत क्या होगी गर भाई भाई का दुश्मन हो
जात पात का भेद मिटा दो हर दिल में अपनापन हो
हिन्दू ईद मनाएं मुस्लिम का रक्षाबंधन हो

नये युग के नये गीतों में भी भारत माँ का वन्दन हो
सरहद पर लड़ने वालों का हर दिल में अभिनन्दन हो
कफन बांधकर सर पर जो लाज देश की रखता
आजादी का...

वीर सपूतों की कुर्बानी सबकों याद जुबानी हो
आजादी का हर संग्राम एक अमर कहानी हो
भारत का हर बच्चा बच्चा भारत माँ की शान बने
भगतसिंह आजाद के जैसे भारत का अभिमान बने
सबके दिल में देश प्रेम का अविरल निर्झर बहता है
आजादी का...........

धन्य धरा उस देश की जिसमें महावीर अवतार हुए
सत्य अहिंसा के अनुयायी बापू जैसे लाल हुए
धन्य हो गई कोख माओं की, जिससे वीर जवान हुए
सरहद पर लड़ते लड़ते जिनने प्राण दान दिए
धन्य सैनिकों की पत्नी जो उम्मीदों पर जीती है
अरमानो की चिता जलाकर ख़ुशी से आसू पीती है
धन्य धन्य वो वीर लला जो हंस कर प्राण को तजता है
आजादी का.............
- माहि जैन

15 August Ki Poem

मेरे देश की माटी करे आव्हान
सीमा पर जो खड़े जवान रखना अपने वतन का मान
चाहे आंधी आये या आये तूफान
तुम हो मेरे लाल मेरी आन बान और शान
जिस पर तुमने जन्म लिया और जिसने तुमको पाला
रक्षा करना अपनी माँ की यही है कर्ज तुम्हारा
याद रखी कर्तव्य ये अपना मातृभूमि पर जन्म हमारा
हर जन्म में हमने अपनी पीढ़ियों को खोया

मातृभूमि की रक्षा करने हमने अपनों को खोया
एक माँ ने बेटे को तो पत्नी ने अपने सुहाग को खोया
किसी के ऊपर का साया तो किसी का साया खोया
याद करो तुम कुर्बानी वो हर बलिदान वाली
मातृभूमि पर शहीद हुए वो वीरों की कहानी

सुनकर मेरे देश का जब बच्चा बच्चा रोया
ऐसे वीर सपूतों ने अपनी मातृभूमि का फर्ज निभाया
माँ तू जग की जननी है तुझसे ही ये संसार
कैसे भूलूंगा माँ में तो मेरा मुझ पर था जो उपकार
माता तेरे चरणों में मैं अपना शीश झुकाता हूँ
मिले आशीष सभी का फिर मैं अपना वचन निभाता हूँ
हर जन्म में बनकर तेरा पुत्र माँ एक नेक भारत बनाऊंगा
करके प्रणाम सभी को वीर तिरंगा ओढ़ कर जाऊँगा
- कृष्ण कुमार भारके

Patriotic Poem On Independence Day In Hindi

मेरे हिंदुस्तान की माटी है वीरों की
जहां चर्चा है उन वीर शहीदों की

आजादी के लिए हुए कितने बलिदान
आओ मिलकर गाए उनकी गाथा गान

गए आजादी की अलख जगाने
शहीद हुए चंद्रशेखर जैसे वीर परवाने

रानी लक्ष्मीबाई हुई बलिदान थी
आजादी की राह नहीं आसान थी

भारत माता को स्वतंत्र कराने
ना जाने कितने चढ़ गए फांसी पर भगत सिंह जैसे वीर मस्ताने

गांधी ने दांडी में बनाई नमक थी
अंग्रेजों को कहां चंद्रशेखर की भनक थी

पटेल नेहरू गांधी ने भारत को कराया आजाद
भगत सिंह ने नारा दिया इंकलाब जिंदाबाद

Independence Day Ki Poem

लो आज मैं चल दिया एक पथ पर
जिसने मुझे चढ़ा दिया भारत के रथ पर
होकर सारे जहाँ से चला हूँ पथ पर
लो आज में थम गया भारत के रथ पर

सुनता हूँ आज मैं क्या बतलाया है भारत ने
प्रगति ने चढ़ाया ऊंचाइयों पर मिट्टी से जोड़ा भारत ने
होती है उज्ज्वल मेरा देश धर्म निरपेक्ष से
वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश मिला मेरे भारत से
हुआ है अभिषेक इस धरा का पवित्र नदियों से
धन्य हुआ मैं भारतमाता तेरे आंचल से

अब मुड़ा रथ इतिहास की ओर
ले चला बलिदानों की ओर
जिसने सबका हित ही चाहा
सबने उस पर जुल्म ही ढाया
अरे आसान था भारत पर जुल्म ढालना
पर कठिन था हिमालय का शीर्ष झुकना
अरे आसान था भारत का उपयोग करना
पर कठिन था सोन चिरैया को पिंजरे में बंद करना

फिर भी उड़ते परिंदे हुए शेर की तरह स्वतंत्र हुए
जो बलिदान देना सिखा गये वो वीर सिख मराठा हुए
अलख स्वतंत्रता का जगाने बलिदान हुए पुत्र महान
क्रांति कर लक्ष्मीबाई ने देश हित में त्यागे प्राण
त्याग अहिंसा का पथ बापू ने दिखला दिया
स्वतंत्रता का मान वीर सपूतों ने सिखला दिया.
- शुभम खेमरिया

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