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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध | Essay on Environmental Pollution in Hindi

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध | Essay on Environmental Pollution in Hindi: आज हमारा देश भारत ही नहीं, सारा संसार पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से ग्रस्त हैं. संसार की प्रत्येक वस्तु किसी न किसी रूप में प्रदूषित हो रही हैं. पानी, हवा, मिट्टी, अनाज आदि सभी प्रदूषण से ग्रस्त हो रहे हैं.

नगरों में यह समस्या अधिक है, क्योकि गंदे जल, मल, कारखानों से निकलने वाली गैसें तथा गंदे पदार्थ, यातायात के साधन, परमाणु रेडियोधर्मिता एवं कचरा आदि के कारण पर्यावरण में प्रदूषण फ़ैल रहा हैं. गाँवों में पेड़ काटे जा रहे हैं. हरियाली घट रही हैं. इससे भी प्रदूषण बढ़ रहा हैं. इस तरह पर्यावरण प्रदूषण मानव जीवन जीवन के लिए एक खतरा बन रहा हैं.

पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव-निरंतर बढ़ रही जनसंख्या तीव्र गति से शहरों एवं उद्योगों का विस्तार, प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से दोहन, यातायात के साधनों का विस्तार तथा परमाणु गैसीय कणों के कारण धरती पर प्रदूषण फ़ैल रहा हैं.

आज पवित्र गंगा यमुना नदी भी प्रदूषित हो गई हैं. पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव भूमि, जल, वायु, खाद्यान्न आदि अनेक स्तरों पर दिखाई दे रहा हैं. इससे मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर हो रहा हैं. तथा अनेक नये रोग पनप रहे हैं.

जल प्रदूषण से सभी प्राणियों का जीवन खतरे में पड़ रहा है, इससे अनाज और फल सब्जियां भी दूषित हो रही हैं. रेगिस्तान का बढ़ना, भूकम्प आना, बाढ़ एवं भूस्खलन आदि अनेक आपदाएं पर्यावरण में असंतुलन के कारण आ रही हैं. वैज्ञानिकों ने इस सम्बन्ध में अनेक हानियाँ एवं आशंकाएं भविष्य में घटित होने की घोषणा की हैं. अतः पर्यावरण प्रदूषण का सारे संसार पर बुरा प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा हैं.

पर्यावरण संतुलन के उपाय- संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन पर्यावरण संतुलन के अनेक उपाय कर रहे हैं. हमारे देश में भी सरकार ऐसे उपाय कर रही हैं. इसके लिए वनों की कटाई रोकी जा रही हैं.

तथा नयें वृक्ष लगाये जा रहे हैं. जलाशयों एवं नदियों को स्वच्छ रखने का अभियान चल रहा हैं पर्यावरण संतुलन के लिए जन जागरण किया जा रहा हैं. ध्वनि और वायु प्रदूषण रोकने के उपाय किये जा रहे हैं. इसी तरह अनेक अन्य उपाय किये जा रहे हैं, ताकि पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सके.

उपसंहार- पर्यावरण प्रदूषण एक विकराल समस्या हैं. यह मानव सभ्यता के सामने एक चुनौती हैं. पर्यावरण में संतुलन बनाये रखने के लिए सरकार अनेक उपाय कर रही हैं, परन्तु जब तक जनसंख्या का नियंत्रण नहीं हो सकता, तब तक इस समस्या का निवारण संभव नहीं हैं. पर्यावरण में संतुलन रहने से ही धरती पर खुशहाल जीवन का विकास हो सकता हैं.

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