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आतंकवाद पर निबंध Essay on Terrorism in English & Hindi Language

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Essay on Terrorism in English

आतंकवाद पर निबंध Essay on Terrorism in English & Hindi Language
Terrorism is a new concept developed in the last quarter of the 20th century. it refers to a number of activities such as killing innocent people to create fear in general masses, blowing up a bridge, rail roads, roads, huge buildings, throwing bombs and hand grenades in markets, public places, hijacking airplanes and attacking police and army. Terrorism destroys established society.

Terrorism is increasing rapidly because some countries are encouraging it for their political ends. Pakistan is helping the terrorists by giving them money, training and supplying deadly arms to them. the Pakistan intelligence agency ISI picks up youngsters and provokes them to rage war in Jammu and Kashmir. as a matter of fact, Pakistan has become a sanctuary and training ground of terrorists.

there are various reasons for the spread of terrorism in the world. some groups and countries encourage terrorism for gaining their political ends. west Asia region has remained the center of terrorist activities since the birth of Israel. in Afghanistan, the new generation of Islamic militants emerged to fight against the Russians. Osama bin laden became their leader. he gave up a life of luxury 20 years ago. he used his money to train young men in guerilla warfare on different bases in Afghanistan. he inducted terrorism in the youth and brainwashed them.

terrorists recently have singled out places of worship as targets of attack. about so people died in blasts at sankat mochan temple in Varanasi, Noorani masjid in Malegaon and mecca masjid in Hyderabad, all since March 2006.

the nine serial bomb blasts in Jaipur on April 13, 2008, in which more than seventy innocent people were killed was a shocking event. such attacks could lead to their aftermath to communal riots. Islamist terrorists have been indifferent to shrines that represent liberal tradition within India.

the Ajmer sharif incident is a condemnable act of terror. disruptive activities of terrorism posed a serious threat to world peace. it is imperative for nations to take a firm stand against the scourge. terrorism has no justification whatsoever and no cause can be served by shedding the blood of innocent people.

the pm wants to set up a new federal agency to counter-terrorism. terrorism is globalized phenomenon, terrorists don't respect state boundaries, they don't always represent a nation-state. standard methods of policing are not effective in countering these criminals who are highly motivated and have enormous financial resources. India needs to rethink its counter-terrorism strategies and revamp its security apparatus to weed out terrorism.

it is necessary to create a category of federal crimes and set up an agency to fight the theme. terrorism calls for counter terror operation on a national scale. draconian legal measures like pota didn't help the government to wipe out terrorism. terrorists lake advantage of bad policing.

loopholes in the criminal justice system especially the delays in investigation and the judicial process help them. effective policing is the key to containing terrorism. a federal anti-terror agency is a step in the right direction.

terrorism in any form is a curse and should be condemned. the need of the hour is to find a way to stop this terrorism. those in authority should understand their responsibility towards all sections of the society.

they will have to be hones and sincere in their efforts to fight terrorism. a firm political will is required to tackle the problem. they should not hasitate to tackle terrorism with an iron hand if required. no single country, however powerful may it be, can control terrorism. India has always stressed the need for a combined international effort to fight terrorism. therefore, an international campaign is to be launched against this global terrorism. for this purpose realignment and regrouping of democratic countries is necessary. world opinion against terrorism is to be created.

Terrorism in Hindi

Terrorism in Hindi
आतंक शब्द का अर्थ भय, त्रास या अनिष्ट की पीड़ा होता हैं. नागरिकों पर हथियारों से हमला करना, उनके बीच भय का वातावरण बनाना. आतंकवाद कहलाता हैं. आतंकवादी शत्रु देश के इशारों पर क्रूरता का आचरण करते हैं.

आज ये आतंकवादी हमारे देश में ही नहीं, विश्व के अधिकांश देशों में अपनी आतंकी गतिविधियाँ चला रहे हैं. आतंकवाद से आज सभी भयभीत हैं. इसलिए यह एक विकराल समस्या हैं.

भारत में आतंकवाद-हमारा देश भी इस विकराल समस्या का सामना कर रहा हैं. हमारे देश में पंजाब में उग्रवादी प्रवृत्ति चली. वह शांत हुई तो 1989 से कश्मीर को लेकर आतंकवाद का प्रारम्भ हुआ. आतंकवादी हमारे पड़ोसी देश से प्रशिक्षण प्राप्त कर और विस्फोटक सामग्री लेकर हमारे देश में घुस आते हैं.

और चिन्हित स्थानों पर हमला कर देते हैं. इन्ही आतंकवादियों ने दिल्ली के लाल किले पर, श्रीनगर विधानसभा और संसद भवन पर हमला किया. इनके द्वारा किये जाने वाले हमलों से आमजन में भय का वातावरण बना हुआ हैं.

जम्मू कश्मीर सहित पूरे देश में जगह जगह आतंकवादी हमले होते रहे हैं. इन हमलों में आतंकवादी अत्याधुनिक हथियारों और विस्फोटक सामग्री का उपयोग करके नरसंहार करते हैं. 

२४ सितम्बर 2002 को गुजरात की राजधानी गांधीनगर में अक्षरधाम में कुछ आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलिया चलाकर ५० से अधिक लोगों को मार डाला.

इसी प्रकार जयपुर में १३ मई २००८ को हुए आठ बम धमाकों से जहाँ ६७ से अधिक लोग मारे गये वहीँ २५० से अधिक लोग घायल हुए. २७ नवम्बर २००८ को मुंबई में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ जिसमें १९५ लोगों की मौत हो गई.

६० घंटे तक चले इस आतंकी हमलें में मुंबईवासियों की ही नहीं, पूरे देश और प्रशासन की नीद उड़ गई. आतंकवादी सुनियोजित ढंग से हमले करते रहते हैं.

आतंकवाद के दुष्परिणाम- भारत को पाकिस्तान से लगती अपनी सीमा पर सेना तैनात करनी पड़ रही हैं. इससे कभी भी भयानक युद्ध छिड़ जाने की आशंका बनी रहती हैं.

आतंकवादी आए दिन आत्मघाती हमले करते रहते है. वे भारत में साम्प्रदायिक तनाव फैलाना चाहते हैं और दंगे करवाने की योजनाएं बनाते रहते हैं.

हालाँकि प्रतिदिन कुछ आतंकवादी उग्रवादी मारे व पकड़े जा रहे हैं. परन्तु सीमाओं की सुरक्षा पर सरकार को काफी धन व्यय करना पड़ रहा हैं. और देश की सम्पति को नुकसान हो रहा हैं.

आतंकवाद को रोकने के उपाय- भारत में चल रहे आतंकवाद को सख्ती से दबाना चाहिए. इसके लिए सेना और सीमा सुरक्षा बल को पूरी छूट दे देनी चाहिए.

इस सम्बन्ध में पाकिस्तान से भी शान्तिवार्ता होनी चाहिए तथा बेरोजगार युवकों को आतंकवादियों के चंगुल में नहीं फंसने देना चाहिए. विश्व के बड़े राष्ट्रों की सहायता लेकर आतंकवादियों के सारे शिविर नष्ट कर देने चाहिए.

कई हमलो में भारतीयों की साजिस होती है.ऐसे गद्दारों को पकड़कर फांसी के फंदे पर लटकाया जाए.जिससे ओर कोई इस कार्य में साथ न दें.जिस प्रकार पुलवामा का हमला हुआ.उसमे भारतीयों के भेद होने के कारण बिना बुलेट पुरुफ़ गाड़ी पर हमला किया गया/ओर हमारे देश के 40 जवानो ने अपनी जान दे दी. 

इसलिए उचित यही है.कि देश के गद्दारों को पकड़ा जाए.कहा जाता है.''घर के भेद लंका लुटावे'' यानि जब कोई अपना विरोध में खड़ा हो जाता है.

तभी हमें आतंकवाद जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है.गद्दारों को देश से भगाए. आतंकवाद से मुक्ति पाए. इस प्रकार देश को आतंकवाद से मुक्त किया जा सकता हैं.

उपसंहार- भारत सरकार आतंकवादियों की चुनौतियों का सामना कर रही हैं. हमारी सेनाएं उनका सफाया कर रही हैं. साथ ही आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण पाकिस्तान को दंडित करने की आवश्यकता हैं. इस सम्बन्ध में सरकार एवं जनता में परस्पर सहयोग अपेक्षित हैं.

हमारे देश में बचने वाले गंदे कीड़ो की वजह से हमारे देश मे आए दिन आतकंवादी हमले होते है. आतंकवादी घटाने दिन प्रतिदिन बढाती जा रही है. इस पर हमें काबू पाना होगा.

 हर रोज के समाचार पत्र में आतंकवादी हमले का जिक्र किया जाता है. आतंकवाद हमारे देश के लिए एक चिंता का विषय है, तथा देशवासियों के लिए कलंग है. इस समस्या से हमारा देश पिछले कई दशको से जूझता आ रहा है.

आतंकवाद का नाम सुनते ही हमारे जहन में काले कपडे पहने बन्दुक हाथ में रखे लोगो की टोली नजर आती है. तथा हमारे मन में उनके प्रति डर पैदा होता है. जो हम सभी की कमजोरी है.

हमारे देश के कुछ गद्दार लोगो के कारण ही आतंवादी हमारे देश में प्रदेश क्र देसज को भारी नुकसान पहुंचाते है. हाल ही में हुआ पुलवामा हमला आतकंवादी हमलो का एक उदहारण है. इसके प्रमुख जिम्मेदार देश के गद्दार है. जिन्हें देश के भगा देने में ही भलाई है.

कुछ लोगो द्वारा समाज में हिंसा को बढ़ावा देना या लोगो के प्रति हिंसात्मक को बढ़ावा देना आपसी गतिविधियों द्वारा देश को नुकसान पहुँचाना आतंकवाद होता है. अधिकांश आतकवादी हमलो के जवाबदेही हमारे देश के लोग ही होते है.

देश के प्रति जहर रखने वाले लोग आतकवाद जैसे अपराध को अंजाम देते है. आतंकवादी लोग किसी भी व्यक्ति को डरा धमकाकर अपने वश में कर लेते है. और कुछ लोग उनका सहारा देने के लिए तैयार हो जाते है, जिससे देश में आतंकवादी हमलो को अंजाम देना ओर भी आसान हो जाता है.

essay on terrorism in Hindi

आतंकवाद 20 वीं शताब्दी की अंतिम तिमाही में विकसित एक नई अवधारणा है। यह कई गतिविधियों को संदर्भित करता है जैसे सामान्य लोगों में भय पैदा करने के लिए निर्दोष लोगों की हत्या, एक पुल, रेल सड़कों, सड़कों, विशाल इमारतों को उड़ाने, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बम और हैंड ग्रेनेड फेंकना, हवाई जहाज को अपहरण करना और पुलिस और सेना पर हमला करना। । आतंकवाद स्थापित समाज को नष्ट करता है।

आतंकवाद तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि कुछ देश अपने राजनीतिक छोर के लिए इसे प्रोत्साहित कर रहे हैं। पाकिस्तान आतंकवादियों को पैसा देकर, उन्हें प्रशिक्षण देकर और घातक हथियारों की आपूर्ति कर उनकी मदद कर रहा है।

पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI युवाओं को उठा ले जाती है और उन्हें जम्मू कश्मीर में युद्ध छेड़ने के लिए उकसाती है। वास्तव में, पाकिस्तान आतंकवादियों का एक अभयारण्य और प्रशिक्षण स्थल बन गया है।

दुनिया में आतंकवाद फैलने के कई कारण हैं। कुछ समूह और देश अपने राजनीतिक छोर हासिल करने के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। इज़राइल के जन्म के बाद से पश्चिम एशिया क्षेत्र आतंकवादी गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। 

अफगानिस्तान में, इस्लामिक आतंकवादियों की नई पीढ़ी रूसियों के खिलाफ लड़ने के लिए उभरी। ओसामा बिन लादेन उनका नेता बन गया। उन्होंने 20 साल पहले विलासिता का जीवन त्याग दिया था।

उन्होंने अफगानिस्तान में अलग-अलग ठिकानों पर छापामार युद्ध में जवानों को प्रशिक्षित करने के लिए अपने पैसे का इस्तेमाल किया। उन्होंने युवाओं में आतंकवाद को शामिल किया और उनका ब्रेनवॉश किया।

आतंकवादियों ने हाल ही में हमले के ठिकानों के रूप में पूजा स्थलों को बाहर गा दिया है। मार्च 2006 के बाद से वाराणसी में सचान मोचन मंदिर, मालेगांव में नूरानी मस्जिद और हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए विस्फोटों में सभी लोगों की मौत हो गई। एक चौंकाने वाली घटना थी। इस तरह के हमले उनके दंगों को सांप्रदायिक दंगों तक ले जा सकते थे।

इस्लामवादी आतंकवादी भारत के भीतर उदार परंपरा का प्रतिनिधित्व करने वाले मंदिरों के प्रति उदासीन रहे हैं। अजमेर शरीफ की घटना आतंक की निंदनीय कार्रवाई है।

आतंकवाद की विघटनकारी गतिविधियों ने विश्व शांति के लिए एक गंभीर खतरा उत्पन्न कर दिया। देशों के लिए यह आवश्यक है कि वे दलदल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएं। आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं है और निर्दोष लोगों का खून बहाकर किसी भी कारण की सेवा नहीं की जा सकती है।

PM आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक नई संघीय एजेंसी स्थापित करना चाहता है। आतंकवाद भूमंडलीकृत घटना है, आतंकवादी राज्य की सीमाओं का सम्मान नहीं करते हैं, वे हमेशा एक राष्ट्र-राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। पुलिसिंग के मानक तरीके इन अपराधियों का मुकाबला करने में प्रभावी नहीं हैं जो अत्यधिक प्रेरित हैं और जिनके पास वित्तीय संसाधन हैं। भारत को अपनी आतंकवाद-रोधी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने और आतंकवाद को समाप्त करने के लिए अपने सुरक्षा तंत्र को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

संघीय अपराधों की एक श्रेणी बनाना और विषय से लड़ने के लिए एक एजेंसी की स्थापना करना आवश्यक है। आतंकवाद राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का आह्वान करता है। पोटा जैसे कठोर कानूनी उपायों से सरकार को आतंकवाद का सफाया करने में मदद नहीं मिली। आतंकवादी झीलें खराब पुलिसिंग का फायदा उठाती हैं।

आपराधिक न्याय प्रणाली में खामियां खासकर जांच में देरी और न्यायिक प्रक्रिया उनकी मदद करती है। प्रभावी पुलिसिंग आतंकवाद से निपटने की कुंजी है। एक संघीय आतंकवाद विरोधी एजेंसी सही दिशा में एक कदम है।

किसी भी रूप में आतंकवाद एक अभिशाप है और इसकी निंदा की जानी चाहिए। समय की जरूरत है कि इस आतंकवाद को रोकने का रास्ता खोजा जाए। उन लोगों को समाज के सभी वर्गों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

आतंकवाद से लड़ने के अपने प्रयासों में उन्हें ईमानदार और ईमानदार रहना होगा। समस्या से निपटने के लिए एक दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।

यदि आवश्यक हो तो उन्हें लोहे के हाथ से आतंकवाद से निपटने के लिए नहीं होना चाहिए। कोई भी देश, हालांकि यह शक्तिशाली हो सकता है, आतंकवाद को नियंत्रित कर सकता है।

भारत ने हमेशा आतंकवाद से लड़ने के लिए एक संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया है। इसलिए, इस वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ एक अंतर्राष्ट्रीय अभियान शुरू किया जाना है।

इस उद्देश्य के लिए लोकतांत्रिक देशों की पुन: स्थापना और पुनर्संरचना आवश्यक है। आतंकवाद के खिलाफ विश्व जनमत तैयार करना है।

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