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प्रार्थना पर निबंध Essay on Prayer in Hindi

प्रार्थना पर निबंध Essay on Prayer in Hindi
ईश्वर अथवा अपने आराध्य से बातचीत करने की आध्यात्मिक प्रणाली प्रार्थना हैं. सच्ची प्रार्थना में दिल की आवाज होती है जो महान ह्रदय तक पहुचती हैं. परम सत्ता से उत्पन्न ब्रह्मांड, पालन पोषण सभी का होता हैं मानव द्वारा स्वयं का उससे सम्पर्क साधने का साधन प्रार्थना ही हैं. परमशक्ति से बिना तप, जाप, योग, मंत्र या साधना के द्वारा प्रार्थना से ही एकाकार हो सकता हैं.

एक तरह से प्रार्थना क्षमा अथवा प्रायश्चित भी हैं. मानव अपने लालच, चिंता, पीड़ा, रोग, बीमारी तथा कमजोरी को प्रार्थना के माध्यम से ईश्वर के समक्ष प्रस्तुत करता हैं. मानव मात्र के व्यर्थ अभिमान को समाप्त करने में यह रामबाण जडीबुटी हैं.

कवि टेनिसन ने प्रार्थना के महत्व को उद्घाटित करते हुए कहा कि बिना प्रार्थना के मानव और पशु में कोई भेद नहीं हैं. प्रार्थना से आध्यात्मिक प्रवाह तो फैलता ही हैं. साथ ही साधक अपने मन मस्तिष्क में शान्ति, पवित्रता, निर्मलता तथा प्रेम से अभिभूत हो जाता हैं.

प्रार्थना अपने आप में अनेक क्रियाओं का एक नाम हैं जिसमें मानव के मन की विभिन्न दिशाओं में फैली वृत्तियों को एक केंद्र स्थान प्रदान करने वाली एक मानसिक क्रिया हैं. जो मन के समस्त भावों को एकत्र कर अपने चित्त को दृढ बनाने की प्रणाली ही प्रार्थना हैं.

सच्ची प्रार्थना प्रार्थी के आत्मा में दिव्य प्रकाश की रौशनी देती हैं जो आंतरिक शक्ति रुपी प्रकाश अव्यक्त, अपार्थिव एवं अनिर्वचनीय होता हैं. सच्चे मन से की गई प्रार्थना मानव को असत्य से सत्य की ओर, अँधेरे से उजाले की ओर तथा मौत से मोक्ष की ओर ले जाती हैं. जब हम महान विभूतियों के जीवन को देखे तो पाएगे उनके जीवन में प्रार्थना का अहम योगदान रहा.

प्रार्थना की दिव्य शक्ति और आलोक की तुलना किसी ओर से नहीं की जा सकती हैं, जो मानव नित्य प्रार्थना करता हैं. उसनें जीवन में कई बार अपनी मनोकामनाओं को हुबहू पूर्ण होते पाया हैं. कई बार तो दिल की प्रार्थना बेहद छोटी समयावधि में ही पूर्ण हो जाती हैं जिन्हें हम संयोग या चमत्कार का नाम देते हैं. ईश्वर के प्रति की गई प्रत्येक प्रार्थना अवश्य ही फलवती होती हैं. 

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