100- 200 Words Hindi Essays, Notes, Articles, Debates, Paragraphs & Speech

बाल विवाह पर निबंध | Essay on Child Marriage in Hindi

बाल विवाह पर निबंध Essay on Child Marriage in Hindi: नमस्कार दोस्तों आपका हार्दिक स्वागत है, आज हम हमारे समाज की एक बुराई कुरीति अथवा अभिशाप, बाल विवाह का भाषण स्पीच निबंध अनुच्छेद बता रहे हैं. bal vivah par nibandh को आप सरल शब्दों में लिख सकते हैं.

Essay on Child Marriage in Hindi

विवाह संस्कार व भूमिका- हिन्दू संस्कृति में एक व्यक्ति के जन्म से मृत्यु तक सोलह तरह के पर्व उत्सव होते है जिन्हें संस्कारों का नाम दिया जाता हैं. जिनमें विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया हैं. प्रत्येक दौर में विवाह को दो पवित्र भावनाओं के बंधन के रूप में स्वीकृति दी गई जो अगले सात जन्मों तक एक दूसरे का साथ निभाए. 

बदलते वक्त के साथ विवाह संस्कार में कई तरह की बुराइयां सम्मिलित हो गई और इन कुरीतियों के चलते विवाह व्यवस्था विकृति का शिकार हो गई. जिसका एक स्वरूप हम बाल विवाह अथवा अनमेल विवाह के रूप में देखते है. यह भारतीय समाज के लिए अभिशाप साबित हो रहा हैं.

बाल विवाह की कुप्रथा- ऐसा नहीं है कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था में बाल विवाहों का शुरू से प्रचलन रहा, वैदिक काल में इस तरह का कोई संकेत नहीं मिलता हैं. मध्यकाल के आते आते जब भारत बाहरी आक्रमणों को झेल रहा था तब बेटियों को विदेशी शासक भोग की वस्तु समझकर अपहरण कर ले जाते तथा उनके साथ सम्बन्ध बना लेते थे.

इसी दौर में रोटी बेटी की कुप्रथा का प्रचलन हो गया. गरीब तथा निम्न वर्ग के कमजोर तबके के लोगों के लिए अपनी बेटी को घर में रखना दुष्कर कार्य हो गया था अतः उन्होंने बचपन में ही बेटियों का विवाह करना शुरू कर दिया. दहेज प्रथा के कारण आज भी भारतीय समाज में बाल विवाह धड़ल्ले से हो रहे हैं.

मध्यकाल में एक दौर ऐसा भी आया जब बेटी के जन्म को अशुभ माना जाने लगा. शिक्षा के अभाव तथा स्वतंत्रता न होने के कारण लड़कियाँ इसका विरोध भी नहीं कर पाती थी. छोटी उम्रः में विवाह हो जाने के कारण दहेज भी कम देना पड़ता था. इस कारण से मध्यम तथा निम्न वर्गीय परिवारों में बाल विवाह की प्रथा ने अपनी जड़े गहरी जमा ली.

बाल विवाह का अभिशाप- कुछ देशों को छोड़कर लगभग सभी देशों में आज विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित हैं भारत में लड़के की उम्रः 21 वर्ष तथा लड़की की आयु 18 वर्ष रखी गई हैं. वयस्क होने पर विवाह करने से उनमें विवाह के बंधन के महत्व तथा जिम्मेदारियों का एहसास होता हैं.

भारतीय विवाहों के रीति रिवाजों में कन्यादान का बड़ा महत्व माना गया हैं. विवाह के समय पुत्री के पिता पक्ष की ओर से अपने सामर्थ्य के अनुसार कुछ धन दिया जाता था. धीरे धीरे यह प्रथा भी विकृत होती गई और बेटी को भार समझा जाने लगा. माँ बाप बचपन में ही पुत्रियों का विवाह करवाकर स्वयं को जिम्मेदारियों से मुक्त करने लगे.

थोड़ी सी सहूलियत के लिए शुरू हुई ये प्रथाएं आज बेटी के जीवन का अभिशाप बन गई हैं. इस गलत परम्परा को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा हैं. बेटी को कम उम्रः में ही ब्याह दिया जाता है जिससे कई तरह कि समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं. कम उम्रः में विवाह से बालिका के शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य में बाधक तो हैं ही साथ ही जल्दी संतानोत्पत्ति होने से जनसंख्या में भी असीमित वृद्धि हो रही हैं. इन सब कारणों से बाल विवाह एक सभ्य समाज के लिए अभिशाप ही हैं.

बाल विवाह की समस्या को रोकने के उपाय- समय समय पर समाज सुधारकों ने इस तरह की कुप्रथाओं को मिटाने के प्रयास किये हैं. हमारी संसद ने भी बाल विवाह निषेध के लिए कठोर कानून बनाए हैं और लड़के तथा लड़की के विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की हैं.

विवाह की न्यूनतम आयु से पूर्व होने वाले विवाह को बाल विवाह माना जाता है तथा यह गैर कानूनी अपराध की श्रेणी में गिना जाता हैं. बाल विवाह की शिकायत प्राप्त होने पर दोनों पक्षकारों को कड़ी सजा तथा जुर्माने का प्रावधान होने के बावजूद हमारे देश में बाल विवाह आज भी हो रहे हैं. 

कानून की सख्ती की बजाय यदि जनजागरण से बाल विवाह को समाप्त करने के प्रयास किये जाए तो यह अधिक प्रभावी कदम हो सकता हैं. अब तो माननीय उच्चतम न्यायालय ने प्रत्येक व्यक्ति के विवाह पंजीयन को अनिवार्य कर दिया हैं. कोर्ट के इस कदम से भी बाल विवाहों में कमी लाने में मदद मिलेगी. इस तरह बाल विवाह उन्मूलन के लिए सरकार और समाज इन दोनों स्तरों पर समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता हैं.

उपसंहार- बाल विवाह हमारे आधुनिक समाज में गहरे तक व्याप्त ऐसी कुप्रथा है जिसका दुष्परिणाम लड़के तथा लड़की दोनों को भुगतना पड़ता हैं. इस प्रथा के चलते समाज में कई बुराइयाँ उत्पन्न हो चुकी हैं. आज के समय में बाल विवाह समस्या का निवारण बेहद जरुरी हो गया हैं इसके बिना बेटियों को इस अभिशाप से मुक्त नहीं किया जा सकता हैं.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अपनी मूल्यवान राय दे