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दूरदर्शन से लाभ हानि निबंध - Doordarshan se labh aur hani

दूरदर्शन से लाभ हानि निबंध - Doordarshan se labh aur hani Essay In Hindi: फ्रेंड्स आपका स्वागत है हम सभी के घरों में दूरदर्शन आ चूका है आज यहाँ दूरदर्शन के लाभ या हानि के निबंध को हम पढ़ने वाले हैं. आशा करते हैं आपकों यह निबंध अच्छा लगेगा.

Advantages And Disadvantages Doordarshan se labh aur hani

आज के जीवन में विज्ञान का अहम योगदान हैं तकनीक तथा विज्ञान के बिना एक दिन के जीवन की कल्पना भी भयभीत कर देती हैं. विज्ञान के चमत्कारों का हमारे जीवन से परोक्ष सम्बन्ध रहा हैं. तकनीक कभी हमारी नौकरी के रूप में कार्य कर रही है तो कभी मार्गदर्शक की भूमिका में नजर आती हैं. रेडियो के पश्चात सिनेमा जगत और रही सही कसर टेलीविजन ने पूरी कर दी, जिन्हें हम दूरदर्शन अथवा टीवी के रूप में भी जानते हैं आज सभी घरों तक दूरदर्शन ने अपनी पहुँच बना ली हैं. 

दूरदर्शन की लोकप्रियता का बड़ा कारण इसकी सार्वभौमिकता तथा सिनेमा को अपने में शामिल करना रहा हैं. कभी हम रेडियो पर समाचार, खेलों का प्रसारण और आकाशवाणी के कार्यक्रम सुना करते थे. मगर शायद किसी ने उस वक्त ऐसा नहीं सोचा होगा, कि हम अपने कमरे में बैठे सम्पूर्ण संसार के दर्शन कर पाएगे. देश विदेश के समाचार, खेल, फिल्म संगीत को आज हम अपने दूरदर्शन पर देखकर मनोरंजन कर लेते हैं.

निश्चय ही दूरदर्शन ने हमें बहुत से फायदे एवं सुविधाएं प्रदान की हैं, मगर इनके लाभों की ओट में इसके दुष्प्रभाव हानि आदि को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता हैं. आज हर घर में यह दृश्य देखने को मिलेगा जहाँ माँ अपने बच्चें से कहेगी टीवी ने बच्चें को बिगाड़ दिया हैं. बच्चें दस से पन्द्रह घंटे लगातार टीवी देखते हैं इससे उनकी शिक्षा तथा स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव तो पड़ता ही है साथ ही माता पिता की बातों को न मानना और अनसुना कर देनी की प्रवृति तेजी से बढ़ रही हैं. आज बच्चों के परीक्षा परिणामों तथा उनकी जानकारी के स्तर को देखकर यह समझा जा सकता हैं. दूरदर्शन ने कितना बड़ा नुकसान किया हैं.

शालीनता, शिष्टाचार, लोक मर्यादा हमारी पहचान रही हैं मगर आज की सिनेमा की फिल्मों ने बच्चों को फैशन के नाम पर अश्लीलता ही परोसी हैं. चुबंन, रोमांच, प्यार तथा बच्चियों व महिलाओं के साथ जोर जबरदस्ती के दृश्य समाज को गलत दिशा में लेकर जा रहे हैं. आज हमारे शहरों में लड़कियों द्वारा छोटे कपड़े पहनने बार में जाने के दृश्य आम हो गये हैं. निसंदेह इस प्रकार की प्रवृत्तियों के लिए दूरदर्शन ही काफी हद तक जिम्मेदार हैं.

आज नन्हें नन्हे बालकों को स्टंट, दादागिरी और स्टाइल का प्रदर्शन करते देखा जा सकता हैं. बच्चें अपनी उम्रः से पहले स्वयं को जवान बना रहे हैं. किसी की हत्या, मारकाट और युवक युवतियों को भगाकर ले जाने के प्रसंग हर फिल्म के मुख्य भाग होते हैं. आज स्थिति यह हो चुकी हैं कि हम धन खर्च कर अपने घर में अश्लीलता को बुला रहे हैं. नन्हे नन्हे बच्चों में बदले की भावना तथा क्रोध के तरीके दूरदर्शन की ही देन हैं.

आज की फिल्मों में कानूनों नियमों को भंग करने वाले अधिक वरीयता देने से इसका असर हमारे विद्यार्थियों में देखा जा सकता हैं. स्कूल कॉलेज जिन्हें शिक्षा मन्दिर कहा जाता हैं वहां अनुशासन के नाम पर बिगड़े माहौल ही नजर आते हैं जिससे शिक्षा तथा भारतीय संस्कारों का स्तर गिरा हैं.

दूरदर्शन दुधारी तलवार की तरह हैं इसके लाभ है तो नुकसान भी हैं. यदि माता पिता तथा हमारा समाज अपनी जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभाना शुरू करे तो हम दूरदर्शन के लाभों से लाभान्वित हो सकते हैं यदि शिक्षा के अच्छे कार्यक्रमों का प्रसारण हो तो यह बच्चों की बहुत मदद कर सकता हैं. उन्हें इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, प्रशासन, नाटक, एकांकी के माध्यम से जटिल विषयों को आसानी से समझाया जा सकता हैं.

दूरदर्शन के लाभ की बात की जाए तो यह हमारी संस्कृति, सभ्यता तथा आदर्शों को अगली पीढ़ी तक पहुचाने में भी निर्णायक भूमिका अदा कर सकता हैं जिस तरह आज महाभारत, रामायण, चाणक्य, चन्द्रगुप्त मौर्य के सीरियल दिखाए जा रहे हैं. यह हमारी धार्मिक संस्कृति को बचाने तथा उसे प्रोत्साहन करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. मैनेजमेंट तथा तकनीक के विद्यार्थियों को दूरदर्शन पर विशेष्यगयों का ज्ञान लाभान्वित कर सकता हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि विज्ञान तथा इसके समस्त साधन हमारे लिए लाभदायक हैं मगर इनका लाभ तब तक ही होता है जब हम इन साधनों का समुचित तथा संयमित उपयोग करे. दिन रात दूरदर्शन को देखने से आँखों की समस्याएं हो सकती हैं तथा भिन्न भिन्न तरह के मानसिक विकार उत्पन्न हो सकते हैं.

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