100- 200 Words Hindi Essays, Notes, Articles, Debates, Paragraphs & Speech

दिवाली पर निबंध | Essay on Diwali in Hindi

दिवाली पर निबंध Essay on Diwali in Hindi: आज के निबंध में आज हम दिवाली/दीपावली पर छोटा बड़ा भाषण स्पीच अनुच्छेद स्टूडेंट्स kids के लिए शेयर कर रहे हैं. कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 के बच्चों के लिए शोर्ट लॉन्ग दिवाली निबंध 2019 यहाँ विभिन्न शब्द सीमा में दिया गया हैं.

Essay on Diwali in Hindi (5 & 10 Lines)

# दिवाली हिन्दुओं का पवित्र त्योहार है जिसे प्रकाश पर्व भी कहा जाता हैं.
# यह पर्व कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता हैं.
# दीपावली का पर्व पांच दिनों तक चलता हैं.
# लक्ष्मी पूजा, पटाखे, स्वादिष्ट व्यंजन दिवाली के मुख्य लक्षण हैं.
# भगवान राम इसी दिन रावण को मारकर सीता के साथ अयोध्या आए थे.
# दिवाली भारत में ही नहीं बल्कि दुनियां के लगभग सभी बड़े देशों में यह पर्व मनाया जाता हैं.

Essay on Diwali in Hindi (100 Words)

भारत को उत्सवों एवं पर्वों का देश भी कहा जाता हैं. होली, ईद, क्रिसमस की तरह दिवाली भी भारत का सबसे बड़ा त्योहार हैं. यह कार्तिक माह की अमावस्या की रात्रि को मनाया जाता हैं. यह दीपों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता हैं.

यह पर्व असत्य पर सत्य, अन्धकार पर प्रकाश तथा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन प्रभु श्रीराम का अयोध्या में आगमन हुआ था. तब अयोध्या के लोगों ने घी के दिए जलाकर उनका स्वागत किया था.

उसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए हम हर साल दिवाली का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. इस दिन धन की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना की जाती हैं. इस तरह यह एक खुशियों का पर्व है जो हमारे जीवन में आनन्द बिखेर जाता हैं.

Short Essay on Diwali in Hindi Language In 200-250 Words

भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश हैं जहाँ विश्व के सभी धर्म, पंथ और मजहब के लोग निवास करते हैं. भारत में सर्वाधिक जनसंख्या हिन्दू धर्म की हैं. हिन्दुओं के कई त्योहार है जिनमें होली, दीपावली, रक्षाबन्धन तथा दशहरा मुख्य पर्व माने गये हैं. दिवाली को दीपों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता हैं.

प्राचीनकाल से यह पर्व मनाया जाता रहा हैं, इसे मनाने के पीछे प्रमुख कथा रामायण से जुडी हुई हैं जिसके अनुसार सीता हरण के बाद राम सीता की तलाश में जाते हैं. विजयादशमी के दिन रावण का वध कर वे सीता समेत कार्तिक अमावस्या के दिन अयोध्या पहुँचते हैं. वहां की जनता अपने राजा का स्वागत घी के दिए जला कर करती हैं. इस तरह से यह दीपों का त्योहार बन गया जिसे हर हिन्दू प्रत्येक वर्ष धूमधाम से मनाता हैं.

बच्चें बूढ़े बालक स्त्रियाँ सभी आयु के लोग दिवाली पर्व को मनाते हैं. भारत में इस पर्व के मौके पर लम्बी सरकारी छुट्टियाँ भी रहती हैं जिससे नौकरी पेशे से जुड़े लोग भी अपने परिवार के साथ इस पर्व को मनाते हैं. 

अंग्रेजी महीनों के अनुसार यह पर्व अक्टूबर अथवा नवम्बर माह में पड़ता हैं. इसके आगमन से कई दिन पूर्व से ही लोग घर की साफ़ सफाई रंग रोगन तथा खरीददारी में लग जाते हैं. दिवाली की शाम को घर घर घी के दिए लाइट आदि से जगमगाहट की जाती हैं. शुभ मुहूर्त के समय माँ लक्ष्मी, श्रीगणेश तथा सरस्वती जी की पूजा आराधना कर सुख सम्रद्धि की कामना की जाती हैं.

Essay on Diwali in Hindi For Class 5,6,7,8 स्टूडेंट्स इन 500 Words With हेडिंग

भारत विविधताओं से भरा देश हैं जहाँ विभिन्न धर्म, संस्कृति तथा भाषाभाषी लोग निवास करते हैं, सभी समुदायों के अपने अपने त्योहार हैं जिन्हें लोग मिलकर मनाते हैं. दिवाली हिन्दू धर्म मानने वालों का सबसे बड़ा उत्सव हैं. जिसे भारत के साथ ही दुनिया भर में जहा भारतीय रहते हैं वहां धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाते हैं.

दिवाली के पावन पर्व की शुरुआत आश्विन नवरात्र से ही हो जाती हैं. दशहरे के 20 वें दिन कार्तिक अमावस्या की रात को यह पर्व मनाया जाता हैं जो अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवम्बर माह में पड़ता हैं. इसे कृषि पर्व भी कहा जाता हैं. कृषक अपनी खरीफ की फसल को काटने के बाद शरद ऋतु से पूर्व अपने आराध्य ईश्वर को धन्यवाद देते हैं.

इस उत्सव को जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायी भी उतनी ही श्रद्धा और भक्ति से मनाते हैं जितने कि हिन्दू. जैन धर्म के प्रवर्तक महावीर स्वामी को इसी दिन मोक्ष मिला था इस घटना को जैनी क्षमा दिवस के रूप में मनाते है इसके अतिरिक सिख धर्म में भी दिवाली के दिन का ऐतिहासिक महत्व हैं इस दिन छठे सिख गुरु हर गोबिंद जी को मुगलों ने रिहा किया था, अतः सिख लोग इसे बंदी छोड़ पर्व के रूप में भी मनाते हैं.

हिन्दू धर्म की कथाओं के अनुसार माना जाता हैं कि जब रावण सीता का हरण का लंका ले गया तो भगवान राम ने लंका की चढ़ाई की और दशहरा के दिन रावण का वध कर सीता के साथ अयोध्या रवाना हुए थे. कहते है कि कार्तिक अमावस्या की रात को ही प्रभु राम सरयू के तट अयोध्या पहुंचे थे. अपने प्रिय राम के आगमन पर वहां के निवासियों ने घी के दिए जलाए तथा खुशियों के साथ राम को गले लगाया. 

दिवाली की रात धन दात्री देवी लक्ष्मी जी की पूजा करने का विधान हैं. सुख सम्पदा के लिए लक्ष्मी के साथ ही माँ सरस्वती तथा गणपति का भी पूजन किया जाता हैं. इस रात को घर में विभिन्न तरह के पकवान बनाए जाते हैं दोस्तों रिश्तेदारों को पावन पर्व की बधाई के साथ उपहार भी आदान प्रदान किये जाते हैं.

दिवाली के एक माह पूर्व से ही लोग घरों की साफ़ सफाई तथा पर्व की तैयारी में लग जाते हैं. लोग अपने घरों दुकानों तथा ऑफिस आदि को सजाते संवारते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी सबसे स्वच्छ स्थल में वास करती हैं. रात में लोग माँ के स्वागत के लिए घरों के द्वार भी खुले छोड देते हैं.

दरअसल दिवाली का पर्व एक दिन का न होकर पंचदिवसीय पर्व हैं. इसका प्रथम दिवस धनतेरस के रूप में जाना जाता हैं. इस दिन कुबेर और धन्वन्तरि का जन्म हुआ था. मान्यता है कि इस दिन खरीददारी करने से धन 13 गुणा बढ़ जाता हैं. इसका दूसरा दिन छोटी दीपावली का होता हैं इसके पीछे मान्यता है कि इस दिन कृष्ण ने नरकासुर का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय दिलाई थी.

पर्व का तीसरा दिन मुख्य दिन होता हैं इस दिन दिवाली का उत्सव मनाते है तथा पूजा सम्पन्न होती हैं. घर घर घी के दिए जलाकर, पटाखे, फुलझड़ी जलाया उत्सव मनाया जाता हैं. आज के समय में इको फ्रेंडली अर्थात प्रदूषण मुक्त दीवाली मनाने की बात कही जाती हैं. वर्तमान में मिट्टी के दीपकों का स्थान मोमबत्तियों तथा सजावट की लाइट्स ने ले लिया हैं.

उत्सव का चौथा दिन गौवर्धन पूजा के रूप में मनाते हैं. ऐसी मान्यता है कि कृष्ण जी ने इसी दिन इंद्र देव के अहंकार को मिटाकर अपनी अंगुली पर गौवर्धन पर्वत उठाया था. इस तरह इस दिन गायो व बछड़ों की पूजा भी की जाती हैं. दिवाली का पांचवा और आखिरी दिन भैया दूज का होता हैं. इस दिन बहिन भाई के यहाँ जाती हैं.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अपनी मूल्यवान राय दे