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आदर्श विद्यार्थी पर निबंध | Essay on Ideal Student in Hindi

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध | Essay on Ideal Student in Hindi: नमस्कार दोस्तों आज हम आदर्श छात्र पर निबंध बता रहे हैं. एक आदर्श विद्यार्थी किसे कहा जाता है इस विषय पर शोर्ट निबंध, भाषण, स्पीच अनुच्छेद यहाँ सरल भाषा में स्टूडेंट्स के लिए दिया गया हैं.

Essay on Ideal Student in Hindi

भारत में शिक्षा व्यवस्था को जन जन तक पहुंचाया जा रहा हैं. आज हर छोटे से गाँव से लेकर कस्बें नगर में प्राथमिक विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय खुले हैं. यहाँ अध्ययन करने वाली छात्र पीढ़ी को देश का भविष्य माना जाता हैं. छात्र समाज, संस्था के सामान्य कानून का पालन करते हुए चरित्रवान बने इसे ही आदर्श छात्र कहा गया है जो अपने कर्तव्यों की पालना सही ढंग से करे.

विद्यार्थी के अध्ययनकाल को जीवन का स्वर्णिम काल कहा जाता हैं. इसी समय पर बालक का भविष्य निर्भर करता हैं. जो इस काल में मेहनत के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता हैं, उसे जीवन में हर अवसर सफलता हाथ लगती हैं.

और जो इस काल में पढ़ाई की बजाय दूसरे कामों में लग जाते है और अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते है उन्हें सिर्फ असफलता ही हाथ लगती हैं. आजकल छात्र जिनकी आयु पढ़ने की होती हैं. वह मोबाइल, टीवी रेडियो या अन्य किसी यंत्र के साथ अपने अमूल्य समय की बर्बादी कर रहे होते है, जिन्हें आदर्श विद्यार्थी नहीं कहा जा सकता.

एक विद्यार्थी का उद्देश्य शिक्षा प्राप्त करना होता हैं. शिक्षा एक जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया हैं. इसके द्वारा व्यक्ति आत्मनिर्भर बनता है एवं अपने चरित्र का निर्माण करता हैं. आदर्श विद्यार्थी वह होता है जो अपने उद्देश्यों पर खरा उतरता हैं.

इसी प्रकार एक विद्यार्थी का ईमानदार होना भी जरुरी है और उन्हें अपने भले बुरे की पहचान करने की समझ भी होनी चाहिए. दोस्तों के साथ रहकर उनका सहयोग करता है और आवश्यकता पड़ने पर उन्ही की सहायता लेता हैं. एक आदर्श विद्यार्थी अपने से बड़ों का आदर सत्कार करता है तथा उनकी बताई बातों का अपने जीवन में पालन भी करता हैं.

सुबह जल्दी उठकर अपने नित्य कर्म करता है जैसे योग व्यायाम और स्नान आदि के बाद अपने ध्यान पढ़ाई में देने लगता हैं. एक आदर्शी विद्यार्थी अपने समाज में भी स्नेह प्राप्त करता हैं. अक्सर वह शिष्टाचार के साथ पेश आता हैं. 

वह बात बात पर अपने साथियों के साथ झगड़ा नहीं करता है विद्यार्थी को जीवन में सुख की प्राप्ति कठिन है उसे रात दिन एक करके अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केन्द्रित करना होता हैं. एक आदर्श विद्यार्थी पर संस्कृत के श्लोक में कहा गया है सुखार्थिन कुत्तों विद्या विध्यार्थिन कुतो विद्या अर्थात सुख चाहने वालों को विद्या की प्राप्ति एवं विद्या की अभिलाषा रखने वाले को सुख की प्राप्ति नहीं हो सक्तो.

एक आदर्श विद्यार्थी से ही देश के अच्छे भविष्य की आशा की जाती हैं. इस तरह आदर्श छात्र देश के भविष्य एवं समाज के गौरव होते हैं.

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