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मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र पर निबंध Essay on my favorite book Panchatantra In Hindi

मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र पर निबंध Essay on my favorite book Panchatantra In Hindi: नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत करता हूँ आज के निबंध स्पीच भाषण अनुच्छेद में आपकों सरल भाषा में मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र के बारे में बता रहा हूँ, स्टूडेंट्स के लिए यह निबंध बेहद उपयोगी साबित हो सकता हैं.


Essay on my favorite book Panchatantra In Hindi

कागज के आविष्कार के बाद हस्तलिखित पुस्तकों की रचना सदियों पूर्व की जाती थी. धीरे धीरे लेखन कला में विकास होता गया और मुद्रित रूप में पुस्तके उपलब्ध होने लगी. पाठक के लिए विविध विषयों पर लिखी हजारों अमूल्य पुस्तकें आसानी से उपलब्ध होने लगी. अपनी प्रिय पुस्तक का चुनाव ऐसे में बेहद जटिल हो जाता हैं.

मेरे परिवार के दो सदस्यों दादाजी और पिताजी में किताबों का कीड़ा था. वे अक्सर नई मुद्रित पुस्तक को घर ले आते थे तथा खाली वक्त में उसको बड़े छाव से पढ़ा करते थे. मेरे घर की अलमारी में हजारों की संख्या में पुरानी और नवीन पुस्तकों का संग्रह है एक दिन अनायास ही मेरी नजर पंचतंत्र पर पड़ी. मुझे किताब पढ़ना पसंद नहीं था फिर भी पता नहीं मैं उसे पढ़ने बैठ गया.

रविवार की छुट्टी का दिन था, मेरा पूरा दिन उस किताब को पढ़ने में बीत गया. रोचक व प्रेरणादायक कहानियों की इस पुस्तक को मैंने पूरा पढकर ही छोड़ा. मुझे पहली बार अहसास हुआ कि असल ज्ञान तो इस अलमारी में भरा हैं. तब से मैंने पंचतंत्र को दस बार से अधिक पढ़ा है बार बार उसे पढ़ने का मन करता हैं हर बार वह नई की नई लगती हैं.

इस घटना से पंचतंत्र मेरी प्रिय पुस्तक बन गयी. विष्णु शर्मा जी ने इसकी रचना तीसरी सदी में संस्कृत भाषा में की थी. उस दौर के भारतीय सामाजिक जीवन को आधार बनाकर रचित पुस्तक सच्चे अर्थों में हमारे समाज का आईना दिखाती हैं. इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि प्रत्येक कहानी में एक सीख दी गयी है तथा बड़े रोचक पात्रों से रोचक ढंग में कहलवाई गयी हैं.

इस प्रिय पुस्तक में अनेक कहानियां है जो विशेषकर बच्चों के लिए बेहद उपयोगी हैं. पात्रों के संवाद से बेहद रोचक तरीके से प्रस्तुत की गयी है कहानियों के मुख्य पात्र घरेलू तथा वन्य जीव जन्तु थे. बैल ऊँट सियार शेर हाथी गदहा कबूतर चूहा साँप मगरमच्छ बंदर कौआ आदि को मुख्य पात्र बनाकर जीवन सच्चाईयों को दिखाया जाता हैं.

इस कहानी में जीवन के कई बड़े रहस्यों के बारे में इस पुस्तक की कहानियों में पढ़ने में मिलता हैं. हम इन्हें पढ़ कर यह समझ सकते है सच्चा मित्र कौन होता है दुश्मन कौन होता है उनकी पहचान कैसे की जाए, कठिन कार्य को सरल बनाने में बुद्धि, विवेक का कैसा प्रयोग किया जाए. लालची और धूर्त लोगों को जीवन में किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं.

जीवन में बड़ो की राय और सलाह मानने से जीवन की राहे कितनी आसान हो जाती हैं, मुशीबत की घड़ी में किस तरह उनके अनुभव काम आते हैं. किस तरह कमजोर लोगों को ताकतवर शक्तियों द्वारा शोषण किया जाता है तथा वे उचित अवसर पाकर उनका प्रतिशोध लेने का प्रयास करते हैं. इस प्रकार की सैंकड़ों कहानियां पंचतंत्र में लिखी गयी हैं.

अमूमन एक बड़े ग्रंथ या उपन्यास को बढ़ना उबाऊ हो जाता हैं, मगर पंचतंत्र के विषय में ऐसा नहीं है जहाँ इसकी शिक्षाओं को एक कहानी के रूप में पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत किया जाता हैं. कहानी अपने अंतिम चरण तक रोचकता तथा कोतूहल बनाए रखती हैं. यही वजह है कि मैं इसे पढ़ना पसंद करता हूँ.

आम जीवन की कई स्थ्तियाँ जहाँ हम निर्णय लेने को लेकर दुविधा में होते हैं. पंचतंत्र किताब ऐसे मामलों में हम सभी की मददगार साबित हो सकती हैं. इसकी कहानियां वास्तविक जीवन की घटनाओं और उनके अच्छे समाधान के रूप में प्रस्तुत की जाती हैं इस तरह यह हमारी शंकाओं, सवालों के समाधान में मददगार साबित हो सकती हैं.

मानव मन के भावों को सुंदर ढंग से इस किताब में उकेरा गया हैं. विष्णु शर्मा द्वारा रचित पंचतंत्र की किताब मात्र मनोरंजक एवं प्रेरणादायक ही नहीं, बल्कि इनका मनोविज्ञान और दर्शन से भी गहरा सम्बन्ध हैं. प्राचीन ग्रंथ के रूप में हमारी विरासत के महत्व का अनुमान इसी बात से लगा सकते हैं कि इसका आज विश्व की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद किया जा चूका है.

मानव जाति खासकर बच्चों के पथ प्रदर्शन में पंचतंत्र अहम भूमिका निभा रही हैं. दुनिया भर के बच्चों के लिए स्कूल के पाठ्यक्रम में इन कहानियों को पढ़ाया जाता हैं. भले ही आज हमने विज्ञान एवं तकनीक भी बड़ी उन्नति कर ली हैं. मगर आम जीवन में आने वाली सामान्य मुश्किलें ज्यो की त्यों बरकरार हैं ऐसे में यह पुस्तक हमारे आंतरिक द्वंद को खत्म कर सही दिशा की ओर प्रेरित कर सकती हैं.

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