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अमेरिका की क्रांति या स्वतंत्रता संग्राम american revolution in hindi

अमेरिका की क्रांति  या स्वतंत्रता संग्राम american revolution in hindi

पुनर्जागरण तथा  औद्योगिक  क्रांति के फल स्वरुप यूरोपियन देशों में  विश्व में नए स्थल खोजने तथा उन्हें उपनिवेश बनाने की होड़ मची आधुनिक युग में भौगोलिक अनुसंधान के लिए समुद्री यात्राओं को पुर्तगाली शासक हेनरी द नेविगेटर ने सर्वाधिक प्रोत्साहन दिया.

स्पेन की महारानी इसाबेला के प्रोत्साहन से सर्वप्रथम 1492 ईस्वी में कोलंबस ने नई दुनिया के नाम से इस महाद्वीप की खोज की कोलंबस ने इस दीप को भारत समझ कर यहां के निवासियों को रेड इंडियन कहा  उसके बाद एक अन्य इतावली यात्री वेस्पुची अमेरिगो 1499 ईस्वी में अमेरिका पहुंचा इसके नाम पर इस महादेश का नाम अमेरिका पड़ा.

अमेरिका की खोज के बाद यूरोपियन देशों में इसे उपनिवेश बनाने की होड़ मच गई इसी क्रम में स्पेन ने सर्वप्रथम 1565 में अपना एक दल अमेरिका महाद्वीप की और भेजा इस दल ने अपनी पहली बस्ती आॅग्सटाइन  में स्थापित की लेकिन राजकीय संरक्षण ना मिलने के कारण  ये लोग सफल नहीं हो पाए
17 वीं शताब्दी के आरंभ में अमेरिका में इंग्लैंड से भारी संख्या में अंग्रेजों का आगमन हुआ सर्वप्रथम क्रिस्टोफर न्यू फोर्ड ने 120 अंग्रेजों के दल सहित 1607 ईस्वी में वर्जीनिया प्रांत में प्रवेश किया और यहां जेम्स टाउन में अपनी बस्ती स्थापित की.

18 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध  तक ब्रिटेन वासियों ने अमेरिका में अपने 13 उपनिवेश स्थापित किए कालांतर में 1776 से 1783 केच दौरान अमेरिका में उपनिवेश वासियों ने ब्रिटिश आधिपत्य से मुक्ति के लिए जो संघर्ष किया जो विश्व इतिहास में अमेरिका की क्रांति अथवा अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम नाम से जाना जाता है.

अमेरिका की क्रांति के कारण

राजनीतिक कारण

 चार्ल्स मैक्लीन एंड्रयूज के अनुसार अमेरिकी क्रांति का प्रारंभ अंग्रेजों और  अंग्रेजी उपनिवेश ओं के मध्य पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध का परिणाम था इसके अलावा ब्रिटिश सरकार उपनिवेशओं के प्रति कठोर नीति तथा राजनीतिक सिद्धांतों से मतभेदों की पुष्टि करती है.

आर्थिक कारण

अमेरिकन क्रांति का मुख्य कारण आर्थिक प्रश्नों को लेकर था वाणिज्यवाद की अवधारणा के अनुसार ब्रिटेन का यह मानना था कि उसके अमेरिकी उपनिवेश ओं का मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन को लाभ पहुंचाना है इंग्लैंड सरकार ने अपने वाणिज्य वादी हितों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी उपनिवेश  पर कई कर आरोपित किए जिनके परिणाम स्वरूप विरोध हुआ जो आगे चलकर क्रांति का रूप धारण करता है.

सप्त वर्षीय युद्ध 1756 -63  में प्रशा व ऑस्ट्रिया के बीच लड़ा गया जिसमें प्रशा का साथ इंग्लैंड जबकि ऑस्ट्रिया का साथ फ़्रांस और रूस ने दिया इस युद्ध में अमेरिकन उपनिवेशओं ने ब्रिटेन की कोई मदद नहीं की अपितु कई बार तो उनकी सामग्री लूटकर फ्रांस की सेना को भेज दी इस युद्ध के बाद इंग्लैंड ने कनाडा पर अधिकार कर लिया जिससे अमेरिका के उत्तर में फ्रांसीसी खतरा समाप्त हो गया सप्त वर्षीय युद्ध में यद्यपि फ्रांस के विरुद्ध इंग्लैंड की विजय हुई किंतु इंग्लैंड युद्ध के समय हुए खर्चों के कारण ऋण  में दब गया इसलिए आर्थिक संकट को दूर करने के लिए उपनिवेश  पर कई कर लगाए जिसके कारण अमेरिकी उपनिवेश ओं ने विरोध किया

ग्रीनविले की नीतियां 1763

1763 में ब्रिटेन का प्रधानमंत्री ग्रीनविले बनता है प्रधानमंत्री बनने के बाद उसने चार अधिनियम पारित करवाए 1763 के बाद ब्रिटिश सरकार ने अपनी योजना का आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कई कठोर नीतियां लागू की ग्रेनविले द्वारा लागू किए गए चार अधिनियम में पहला अधिनियम शुगर अधिनियम 1764 था जो 1733 के शीरा का परिष्कृत रूप था.

यह 1764 में लागू हुआ इसके अंतर्गत इंग्लैंड के अतिरिक्त अन्य देशों से आने वाली विदेशी शीरे का आयात बंद कर दिया ब्रिटिश सरकार ने ऐसा इसलिए किया कि वह चुंगी के द्वारा अपना राजस्व बढ़ा सके अब उपनिवेश वासी ना तो सस्ती दरों पर डस और फ्रांसीसी से खरीद सकते हैं और ना ही रम बना सकते हैं इसके कारण अमेरिका में विरोध शुरू हो गया.

ग्रेनविले का दूसरा अधिनियम स्टांप एक्ट 1765 था जिसके द्वारा  ब्रिटिश सरकार ने समाचार पत्रों कानूनी एवं व्यापारिक दस्तावेजों व अन्य कागजातों पर स्टांप  कर देना अनिवार्य कर दिया इसका अमेरिका में अत्यधिक विरोध हुआ इस विरोध का कारण आर्थिक बोझ ना होकर सैद्धांतिक था अमेरिका में इसके विरोध स्वरूप कई संगठन स्थापित हुए जिसमें अमेरिका के विभिन्न शहरों में स्वतंत्रता के पुत्र एवं स्वतंत्रता की पुत्रियां नामक संगठन स्थापित हुए इसके साथ-साथ प्रतिनिधित्व के बिना कर नहीं की अवधारणा स्थापित हुई तथा वर्जिनियां  में इसका विरोध हेनरी वर्गिस  तथा अन्य क्षेत्रों में पेट्रिक हैनरी ने किया इस समय पेट्रिक हैनरी ने आह्वान किया कि स्वतंत्रता दो या तो मृत्यु दो

तीसरा अधिनियम करेंसी एक्ट 1765 था इस एक्ट के अनुसार अमेरिकी उपनिवेश  में दूसरे देशों के साथ प्रचलित मुद्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया जिसे केवल अंग्रेजी मुद्रा का ही प्रयोग हो सकेगाद
चौथा अधिनियम क्वार्टरिन्ग एक्ट 1765 था जिसमें ब्रिटिश सरकार ने कानून बनाया कि अमेरिका में मौजूद ब्रिटिश सेना का खर्च अब अमेरिकन वासियों को भुगतना पड़ेगा
1766 में ब्रिटिश सरकार ने जन आक्रोश तथा व्यापार को  हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का फैसला किया 1765 में ग्रीन विलें की सरकार  के पतन के बाद बनी नई रॉकिंघम सरकार ने  1766 में स्टांप एक्ट को समाप्त कर दिया किंतु साथ ही यह घोषणा भी कर दी कि इंग्लैंड की संसद को अमेरिका पर कर लगाने का पूर्ण अधिकार है जो रॉकिंघम घोषणा के नाम से प्रसिद्ध जिसका भारी विरोध हुआ
चाॅल्स टाउनशैण्ड जो रॉकिंघम सरकार में वित्त मंत्री था उसने सोचा कि अमेरिकी जनता आंतरिक करो का विरोध करती है और बाहरी  कर उन्हें स्वीकार है अतः उसने 1767 में  पांच वस्तुओं यथा चाय शीशा कागज सिक्का धातु और रंग पर सीमा शुल्क लगाया जिसका आयात अमेरिका इंग्लैंड से ही कर सकता था टाउनसेंड की सोच के विपरीत अमेरिकन लोगों ने इस योजना को नकार दिया और कहा कि प्रतिनिधित्व की बिना कर नहीं इस घोर विरोध के कारण टाउन सेंड ने करो को 1770 में रद्द कर दिया केवल चाय पर कर बना रहा

टाउनसेंड की योजना लागू होने के बाद अवैध व्यापार बढ़ गया बोस्टन में अवैध व्यापार की अधिकता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने 2 सैनिक टुकड़ियों को बोस्टन में तैनात कर दिया 5 मार्च 1770 को  सैनिक टुकड़ियों और संस ऑफ लिबर्टी के बीच में झड़प हुई जिसमें कई अमेरिकी मारे गए  यह घटना विश्व इतिहास में बोस्टन हत्याकांड के नाम से जानी जाती है

 बौद्धिक कारण

 बौद्धिक चेतना अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख कारण था 1637 में मैसाचुसेट्स के कैंब्रिज नगर में हार्वर्ड कॉलेज की स्थापना हुई
 1639 में वर्जिनियां में विलियम एंड मैरी कॉलेज शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र बन गया था
बेंजामिन फ्रैंकलिन ने एक विचार केंद्र की स्थापना की जो बाद में अमेरिकन फिलोसॉफिकल सोसायटी के नाम से विख्यात हुआ
 1704 में पोस्ट न्यूज़लेटर पहला समाचार पत्र प्रकाशित हुआ
 थॉमस पेन की किताब कॉमन सेंस ने अमेरिका में राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ाया

 तात्कालिक कारण

अमेरिकन स्वतंत्रता संग्राम का तात्कालिक कारण ब्रिटिश सरकार की चाय नीति   बनी सन 1773 मैं प्रधानमंत्री लॉर्ड  नॉर्थ ने चाय की नीति का ऐलान किया इस नीति के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को अमेरिका स्थित ब्रिटिश उपनिवेश ओं में अपने जहाजों के माध्यम से  सीधे चाय भेजने की अनुमति दे दी गई इससे पहले  चाय ब्रिटेन से होकर गुजरती थी जहां उसे  अधिक चुंगी देनी पड़ती थी यह चाय की नीति अमेरिकन वासियों को फायदा दे रही थी इसके बाद भी अमेरिका का व्यापारिक वर्ग इससे नाराज था तथा अमेरिका के स्थानीय व्यापारियों का चाय का व्यापार भी बर्बाद हो रहा था इस कारण इस नीति का विरोध हुआ
चाय की नीति के विरोध के दौरान ऐडम्स के नेतृत्व में संस ऑफ़ लिबर्टी के सदस्यों ने बोस्टन बंदरगाह पर ईस्ट इंडिया कंपनी के चाय के जहाजों पर सदम वेश में घुसकर जहाज में मौजूद 342 साल की पेटियां को समुद्र में गिरा दिया इस घटना को इतिहास में बोस्टन टी पार्टी के नाम से जाना जाता है
 बोस्टन टी पार्टी की प्रतिक्रिया  के परिणाम स्वरूप ब्रिटिश संसद में intolerable act पारित किया गया इसके अलावा और भी कई कड़े कदम उठाए गए जिसमें यह प्रावधान किया गया कि बोस्टन बंदरगाह तब तक बंद रहेगा जब तक बोस्टन टी पार्टी की घटना के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी को हुई क्षति की भरपाई ना हो जाए दूसरा कहा गया कि सरकारी अधिकारियों की हत्या की मुकदमे की सुनवाई अब इंग्लैंड या अन्य उपनिवेश में की जाएगी ना कि अमेरिका में  तीसरे प्रावधान के   द्वारा यह कहा गया कि कोई भी ब्रिटिश अधिकारी बोस्टन के भी घर में रुक सकता है
उपर्युक्त अधिनियम के परिणाम स्वरूप प्रत्युत्तर में अमेरिकन राज्यों के प्रतिनिधियों ने प्रथम महाद्वीपीय कांग्रेस का अधिवेशन बुलाया वर्जिनियां के आमंत्रण पर जॉर्जिया को छोड़कर शेष सभी 12 उपनिवेश ओं के 56 प्रतिनिधि 5 सितंबर 1770 को फिलाडेल्फिया में एकत्रित हुए सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पूर्ण स्वराज्य की मांग नहीं होकर आंतरिक मामलों में पूर्ण स्वायत्तता था साथ ही सम्मेलन में घोषणा की गई कि अगर हमारी मांगे पूरी नहीं होती है तो अमेरिकी राज्य ब्रिटेन से   संबंध विच्छेद कर देगा इसके बाद ब्रिटिश सरकार के सामने अमेरिकन एक चुनौती के रूप में खड़े हो गए 

 उपर्युक्त के अलावा प्रमुख कारणों में ब्रिटिश राजा का   अदूरदर्शी होना भी रहा इस क्रांति के सफल होने में प्रमुख भूमिका वॉशिंगटन के नेतृत्व की रही साथ ही साथ ब्रिटिश सेना का  अमेरिकी भूभाग पर अनुकूल परिस्थितियां ना मिलना तथा अमेरिकन सेना की छापे मार युद्ध पद्धति के साथ-साथ कुशल नेतृत्व रहा

इस क्रांति के परिणाम स्वरूप जहां अमेरिका को स्वतंत्रता मिली नागरिकों को अधिकारों की प्राप्ति हुई तथा कालांतर में अमेरिका एक विश्व शक्ति के रूप में उभरा वही ब्रिटिश सत्ता को चुनौती मिली  ब्रिटेन ने अपनी औपनिवेशिक नीति को उदार किया तथा साथ ही  ब्रिटिश  सर्वोच्च  को गहरा आघात लगा

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