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मुख्य सचिव क्या है कौन होता है क्या कार्य है चयन प्रक्रिया Chief Secretary In Hindi

 मुख्य सचिव क्या है कौन होता है क्या कार्य है चयन प्रक्रिया  Chief Secretary In Hindi: राज्य प्रशासन मे प्रशासनिक दृष्टि से सर्वोच्च पद मुख्य सचिव का होता है इस पद पर कार्य करने वाले व्यक्ति को कर्मठ दूरदर्शी सहनशील अनुभवी तथा निष्पक्ष होना जरूरी है. क्योंकि राज्य की जनता जहां मुख्यमंत्री से समस्त आशाएं लगा कर रखती है वही मुख्यमंत्री के सपनों को साकार रूप देने वाला शिल्पी मुख्य सचिव ही होता है. इस प्रकार मुख्य सचिव राज्य प्रशासन की किंगपिन है जो नीति निर्माण नियंत्रण तथा प्रशासन के नेतृत्व में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन करता है.

मुख्य सचिव क्या है कौन होता है क्या कार्य है चयन प्रक्रिया  Chief Secretary In Hindi

मुख्य सचिव राज्य में कार्यरत लोक सेवकों में योग्यता तथा अनुभव के आधार पर वरिष्ठ  होता है. सन 1973 से पूर्व राज्यों में मुख्य सचिव पद की स्थिति सर्वोच्च नहीं थी. उदाहरण के लिए पंजाब का वित्त आयुक्त मुख्य सचिव से उच्च माना जाता था.

वर्तमान में मुख्य सचिव के पद स्थिति सभी राज्यों में कार्यरत लोक सेवकों में सर्वोच्च है. राज्य के मुख्य सचिव का पद केंद्र सरकार के मंत्रालयों में कार्यरत सचिव के समकक्ष है. नवंबर 1956 से पूर्व राजस्थान बी श्रेणी का राज्य था राजस्थान मुख्य सचिव की नियुक्ति  भारत सरकार द्वारा की जाती थी. राज्य में सन 1958 में पहली बार राज्य सरकार द्वारा राजस्थान संवर्ग के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की नियुक्ति मुख्य सचिव के रूप में की गई.

चयन प्रक्रिया- Selection Process

मुख्य सचिव का चयन मुख्यमंत्री के द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा के सुपर टाइम स्केल प्राप्त अधिकारीओं में से ही किया जाता है. सामान्यतः राज्य का मुख्यमंत्री इस संबंध में केंद्रीय सरकार से परामर्श करता है. लेकिन ऐसा करना संवैधानिक बाध्यता नहीं है मुख्य सचिव का चयन करते समय निम्नलिखित बिंदु ध्यान में रखे जाते हैं.
  1. प्रशासनिक पदों पर कार्य करने का विशद अनुभव हो
  2. प्रशासनिक प्रतिभा आकर्षक व्यक्तित्व तथा उपलब्धियों से भरा कार्यकाल रहा हो तथा मुख्यमंत्री का विश्वासपात्र अधिकारी हो
  3. हालांकि मुख्य सचिव को  चयन करने से पहले मुख्यमंत्री सचिवों की योग्यता वरिष्ठता अनुभव सेवा का रिकॉर्ड इत्यादि को गंभीरतापूर्वक देखता है तथापि सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथ्य उस अधिकारी तथा मुख्यमंत्री के मध्य  वैचारिक सामंजस्य ही होता है प्रत्येक मुख्यमंत्री ऐसा मुख्य सचिव  नियुक्त करना चाहता  है जो उसकी नीतियों विचारों तथा कार्यक्रमों को ही  परिप्रेक्ष्य  में समझते हुए उन्हें क्रियान्वित कर सके राज्य का मुख्यमंत्री परिवर्तित होते ही अधिकांश: मुख्य सचिव भी बदल जाते हैं राजस्थान के पूर्व मुख्य सचिव श्री बी एल माथुर को 4 मुख्यमंत्रियों के साथ कार्य करने का अनुभव रहा है किंतु ऐसे उदाहरण ज्यादा देखने को नहीं मिलते हैं

 मुख्य सचिव का कार्यकाल

मुख्य सचिव का कार्यकाल निश्चित नहीं किया गया सामान्यता सेवानिवृत्ति की आयु पूर्ण होने पर मुख्य सचिव भी सेवानिवृत्त कर दिए जाते हैं. परंतु  कुछ मामलों में मुख्यमंत्री के द्वारा मुख्य सचिव का कार्यकाल बढ़ा दिया जाता है. प्रशासनिक सुधार आयोग ने सुझाव दिया है. कि मुख्य सचिव को कम से कम तीन चार  वर्ष तक सेवा का अवसर दिया जाना चाहिए ताकि वह अपने कार्यकाल में कोई सार्थक परिणाम दे सके कई बार ऐसा भी हुआ है. 

जब सेवानिवृत्ति से पूर्व ही किसी मुख्य अधिकारी को मुख्यमंत्री के कारण पद से हटना पड़ा है. ऐसी स्थिति में मुख्य सचिव रह चुके व्यक्ति को राजस्व मंडल या राज्य सूचना आयोग राज्य विद्युत विनियामक आयोग या लोक उपक्रमों में नियुक्त किया जा सकता है. वस्तुत मुख्य सचिव का कार्यकाल उसकी निष्पक्षता कर्मठता व सामंजस्य बैठाने की क्षमता पर निर्भर करता है.

इस प्रकार बीएस मेहता व बी एल माथुर को राजस्थान मुख्य सचिव पद संभालने का समय 5 वर्ष से भी अधिक प्राप्त हुआ अधिकांश मुख्य सचिव एक-दो वर्ष की सेवा के बाद ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं. श्री एम एल मेहता का कार्यकाल 31 दिसंबर 1996 को समाप्त हो गया था. परंतु श्री भैरों सिंह शेखावत ने दो बार 6-6 माह के लिए मेहता का कार्यकाल बढ़ाया था.

 मुख्य सचिव के कार्य Functions of Chief Secretary

  • राज्य में प्रशासन के सफलतापूर्वक संचालन के लिए मुख्यमंत्री को परामर्श देना तथा स्वयं प्रशासन को नेतृत्व प्रदान करते हैं.
  • राज्य की शासकीय नीतियों के निरूपण में सहयोग करना तथा मंत्रिमंडल की उप समितियों के कार्य में सहयोग करना.
  • मंत्रिमंडल की जो बैठके होती है उसकी सूचना मंत्री गण तक पहुंचाना बैठक  मे जो निर्णय लिए जाते हैं. उनको प्रशासनिक इकाइयों तक पहुंचाना तथा उनकी क्रियान्वित सुनिश्चित करना.
  • केंद्र राज्य के संबंधों क्षेत्रीय परिषदों  में पत्र व्यवहार एवं समन्वय करना.
  •  राज्य की विकास के लिए कार्यक्रम तथा योजनाओं का निर्माण  करना उस में सहयोग करना इन योजनाओं को नीति आयोग से स्वीकृति प्रदान करवाना साथ-साथ आपदा से संबंधित कार्यों को संपन्न करना समन्वित करना.
  •  राज्य प्रशासन से संबंधित विधि निर्माण में परामर्श प्रदान करना.
  • संसद या राज्य विधानमंडल में मंत्रियों द्वारा दिए जाने वाले प्रश्नों के उत्तरों के लिए तथ्यों का संकलन करना तथा उन्हें उपलब्ध कराना.
  •  राज्य कर्मचारियों से संबंधित सेवा शर्तों का निर्माण करना.
  •  केंद्रीय मंत्रालय और राज्य सरकार के विभागों  के मध्य विवाद होने पर उनमें समन्वय स्थापित करवाना.