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महाशिवरात्रि पर निबंध Essay on Maha Shivratri in Hindi

आज महा शिव रात्रि अर्थात हमारे भोले बाबा का जन्मोत्सव हैं. सभी भक्तों को ॐ नमः शिवाय जय भोले शंकर, आज का आर्टिकल महाशिवरात्रि पर निबंध Essay on Maha Shivratri in Hindi में  शिवजी के जन्म उत्सव पर हिंदी निबंध, भाषण, अनुच्छेद आदि लेकर आए हैं.

महा शिवरात्रि पर निबंध Essay on Maha Shivratri in Hindi

महा शिवरात्रि पर निबंध Essay on Maha Shivratri in Hindi

महा शिवरात्रि पर निबंध Essay on Maha Shivratri in Hindi

हिन्दु समुदाय के मुख्य पर्वों में शिवरात्रि का अहम स्थान है । अधिकतर उत्सव वर्ष में एक बार आते हैं, परन्तु यह शिवरात्रि का पर्व फाल्गुन माह व श्रावण मास में साल में दो-बार आता है ।

सनातन  के तीन मुख्य ईश्वर में शिव तीसरे स्थान पर आते हैं । मान्यता के अनुसार ब्रह्मा सृष्टि की रचना करते है, विष्णु सृष्टि का पालन एवं भोले शिव सृष्टि का संहार करते हैं।

इस कारण इन्हें शिव यानी कल्याणकारी और दुखों के संहार करने वाले महादेव माना जाता हैं । हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार शिवजी सबसे प्राचीन देवता हैं और आज भी इनकी सर्वाधिक पूजा भी होती है।

गाँव गाँव, घर-घर में शिवालयों में शंकर के प्रतीकशिवलिंग के साथ वाहन-नंदी पत्नी-पार्वती, पुत्र गणेश कार्तिकेय आदि की मूर्तियाँ बनी होती है । महाशिव रात्रि के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर भक्त विशेष पूजा अर्चना कर उपवास रखते है।

देश के कुछ इलाकों में इस दिन श्रद्धालु हरिद्वार से गंगा, नर्मदा आदि पवित्र नदियों का जल लेकर कावड़ यात्रा शुरु करते हैं और उसे नजदीक के शिव मंदिर में जलाभिषेक कर भोलेनाथ को प्रसन्न करते हैं ।

फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए थे, कहते है कि सृष्टि की शुरुआत भी इसी दिन से हुई थी अनेक कथाओं में प्रसंग के अनुसार अग्निलिंग के रूप में शिवजी पृथ्वी लोक पर अवतरित हुए थे. 

भारत का चाहे कोई कोना हो इस दिन भोले की भक्ति में झूमता दिखाई पड़ता हैं. महाशिवरात्रि का पर्व न केवल भारत में बल्कि देश के बाहर रहने वाले भारतीय भी हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं. भक्त उपवास रखकर मन्त्रोच्चार के साथ शिवजी को प्रसन्न करते हैं.

Short Mahashivratri Par Nibandh Maha Shivratri Essay In Hindi

प्रस्तावना : हिन्दुओं में वैसे तो 33 करोड़ देवी देवताओं की अवधारणा है परन्तु सभी में शिव को कल्याणकारी माना गया हैं, शिव शब्द का अर्थ भी कल्याणकारी होता हैं.

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन शिवजी मृत्यु लोक में अवतरित हुए थे, इसी कारण इस दिन को भोलेनाथ के जन्मोत्सव के रूप में महाशिवरात्रि के उत्सव के रूप में मनाया जाता हैं.

भक्तों द्वारा इस दिन अपने आराध्य शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत उपवास रखकर सच्चे मन से उनकी उपासना करते हैं. 

कैसे पड़ा महाशिवरात्रि का नाम? : पुराणों की संख्या 18 मानी गई है जिनमें एक शिव पुराण भी है जिसमें शिवजी के बारें में वर्णन मिलता हैं. शिव पुराण में कहा गया हैं. सृष्टि पर सभी जीवित जीवों के अधिनायक स्वामी शिव ही है.

उन्ही की इच्छा से सभी प्रकार के कार्य व व्यवहार सम्पन्न होते हैं. पुराण में शिवजी की कैलास पर्वत पर कठोर तपस्या के बारे में भी लिखा गया है. कई वर्षों की कठोर तपस्या में कीड़े मकोड़े शिवजी के कानों में बिल बना जाते थे.

अगले छः माह शिव जी पर्वत से उतरकर श्मशान में वास करते हैं. इनका यह अवतरण फाल्गुन माह की त्रयोदशी तिथि को होता हैं. इस कारण भक्त इस अवतरण दिवस को महाशिवरात्रि के रूप में धूमधाम से मनाते हैं.

यूँ तो हर माह में शिवरात्रि होती है, मगर महाशिवरात्रि का महत्व उन सबसे बढ़कर हैं. साधक इस दिन विधि विधान से शिव बाबा की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

इस दिन बिल्वपत्र, धतूरा, अबीर, गुलाल, बेर, उम्बी अर्पित कर पूजा सम्पन्न होती हैं. कुछ भक्त प्रभु को सर्वाधिक प्रिय भांग का भी भोग लगाते है तथा प्रसाद के रूप में स्वयं भी सेवन करते हैं.

पौराणिक मान्यताएं
महाशिवरात्र‍ि  मानाने का कोई एक ठोस कारण नहीं है. इसके मनाने की लोगो की कई मान्यताए प्रचलित है.इसका कोई एक कारण साफ नहीं है. जिसमे कई लोगो का मानना है. कि इसी दिन भगवान शिव  ने ब्रह्मा के रुद्र रूप में जन्म लिया था.

कई लोगो की मान्यता के अनुसार कहा जाता है. कि इस दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य कर अपनी तीसरी आँख खोली थी. जिससे सम्पूर्ण में हाहाकार मच गया था.

और शिव की तीसरी आँख की ज्वाला इतनी तेज थी. कि सम्पूर्ण पृथ्वी आँख की ज्वाला से समाप्त हो गई. कई लोगो इस पर्व को भगवान  शिव तथा माता पार्वती के विवाह से भी जोड़ते है. कहते है. कि इस दिन शिव ने अपनी दूसरी शादी माता पार्वती से की थी. 

महत्व : हमारे देश में हर माह शिवरात्रि का आयोजन होता है. परंतु फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को हम अत्यंत महत्त्व देते है. तथा अन्य माह को हम शिवरात्रि मनाते परन्तु इस दिन हम महाशिवरात्रि के रूप में इसे मानते है. 

इसे बहुत महत्व दिया जाता है. ये दिन भगवान शिव से जुड़ा हुआ है. इस दिन को लोग व्रत करते है. भगवान शिव की पूजा अर्चना करते है. तथा शिव को दूध चढाते है.

इस दिन भगवान शिव के मंदिर में लाखो की तादात में लोग आते है. तथा भगवान शिव की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते है. इस दिन भगवान शिव के मदिर में जाकर पूजा करने सौभाग्य की बात है.

इस पर्व को सभी जाती के लोग मानते है. खासकर इसे हिन्दू धर्म के लोग मानते है. हिन्दुओ के लिए ये पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण है. 

महाशिवरात्र‍ि के दिन भगवान शिव की पूजा करते है. उन्हें दूध,मेवा,मिठाइयाँ, धतुरा बेर गुलाल,उम्बी तथा मुख्य रूप से भगवान की प्रिय भांग भगवान को चढाते है.इससे भगवान शिव भी प्रसन्न होते है.  इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति की मुक्ति होती है.
उपसंहार : कहा जाता है. कि इस दिन जो भगवान शिव की पूजा,अर्चना तथा उनकी  दयाभाव से सेवा करते है. उनका जीवन सफल हो जाता है.

भगवान् शिव सबसे आसानी से प्रसन्न होने वाले देवता है. अपने जीवन को सफल बनाने तथा भगवान के दर्शन के लिए व्यक्ति भगवान की सेवा करते है. तथा पुण्य करते है. 

यदि  भगवान पर विश्वास रखे तो भगवान जरुर दर्शन देंगे इसलिए हमें भगवान की सेवा करनी चाहिए. जिसे हमारे देश में बड़े बखूबी रूप से निभाया जाता है. और हर साल महाशिवरात्रि तथा अन्य पर्व पर भी भगवान की सेवा बड़ी धूम-धाम के साथ करते है.
महाशिवरात्रि का महत्व पर निबंध Essay on Maha Shivratri in Hindi

शिवरात्रि भगवान् शिव का एक पर्व है. ये पर्व पुरे भारतवर्ष में बड़ी धूम के साथ मनाया जाता है. इस पर्व पर भगवान् शिव की पूजा अर्चना की जाती है. तथा इनके मंदिरों को दुल्हन की तरह सजाया जाता है.

शिवजी को इस सृष्टि का रचयिता माना जाता है. देवो के देव है. महादेव जिन्हें हम त्रिनेत्र,शम्बू,शंकर,उमापति तथा भोलेनाथ आदि अनेक नामो से जानते है.

वैसे हमारे देश में शिवजी को समर्पित अनेक पर्व है. जिसमे महाशिवतरात्रि सबसे प्रमुख है. क्योकि इस दिन भगवन शिव का जन्म माना जाता है. शिव रात्रि का शाब्दिक अर्थ शिव की रात होता है.

साल में शिवरात्रि का आयोजन कई बार होता है, पर महाशिवरात्रि साल में एक बार ही आती है. ये पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दर्शी को मनाया जाता है. इस पर्व को सभी धर्म के लोग मनाते है.

इस पर्व के अवसर पर भक्त उपवास रखते है. तथा भगवान् शिव से आशीर्वाद प्राप्त करते है. भगवान् शिव के भक्तो को विशेष रूप से शैव कहा जाता है. यानी सभी शिवभक्त शैव कहलाते है.

प्राचीन मान्यताओ के अनुसार इस पर्व पर जो कुंवारी बालिकाए व्रत रखती है. तो उन्हें योग्य वर प्राप्त होता है. माना जाता है. कि इस पर्व की शुरुआत माता पार्वती ने की थी. जिससे उन्हें भगवन शिव वर के रूप मिले थे.

इस पर्व पर पूजा की शुरुआत के लिए लोग सुबह से ही तैयारिया शुरू कर देते है. कई लोग इस दिन गंगा नदी में स्नान करते है. और बाद में भगवान् शिव की पूजा करते है. जिससे भगवान् शिव खुश होते है.

महाशिवरात्रि भगवान् शिव को समर्पित पर्व है. इस पर्व पर शिव-पार्वती की पूजा बड़ी श्रीद्धा के साथ की जाती है. तथा शाम को शिव के मंदिर से विशाल यात्रा आरम्भ की जाती है.

माना जाता है. कि इस दिन भगवान् शिव ने इस संसार की रक्षा के लिए नील जहर को पिया था. जिस कारण शिव को नीलकंठ कहते है. इस रात्री को जागरण और अनेक उत्सव का आयोजन किया जाता है.

इस पर्व पर व् की पूजा में दूध दही घी तथा भांग जैसे अनेक पदार्थ चढाते है. तथा उपवास रखकर शिव की पूजा करते है. इस दिन शैव केवल फलहार ही कर सकते है.

पूजा के साथ शिव के 108 मंत्रो का लगातर जप किया जाता है. तथा शिव को तुलसी के पत्ते चन्दन चढाते है. और अगरबत्ती धूम बत्ती मोमबत्ती तथा दीपक जालाकर शिव के मंदिर को उजागर करते है.

शिवजी को इस संसार का सबसे महान देव माना जाता है. शिवजी को सबसे जल्द खुश होने वाले देवताओ में माना जाता है. जो भगवान् में विश्वास रखता है. भगवान् उसे अवश्य दर्शन देते है. आस्था भगवान की पूजा से बढ़कर है.

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