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कारगिल विजय दिवस पर कविता 2022 | Kargil Vijay Diwas Poem In Hindi

कारगिल विजय दिवस पर कविता | Kargil Vijay Diwas Poem In Hindi- नमस्कार दोस्तो आप सब का हमारे आज के Article में स्वागत है। आज हम देश के स्वर्णिम उत्सव कारगिल विजय दिवस पर होने वाले कार्यक्रम में प्रस्तुत करने के झूठ महत्वपूर्ण कविताओ का संग्रह लेकर आए हैं।

कारगिल विजय दिवस पर कविता | Kargil Vijay Diwas Poem

कारगिल विजय दिवस पर कविता 2022 | Kargil Vijay Diwas Poem In Hindi
इतिहास TO उन वीरो का HAI
जो जलती चिता MAI कूद जाते HAI
मौत KO हथेली ME रखकर
दुश्मन को भी परास्त कर देते HAI

ये वो बाज़ीगर HAI
जो अपना लोहा मनवा कर HI मानते HAI
दुश्मन कितना भी ताक़तवर हो
धूल चटा कर HI कफ़न ओढ़ते HAI

तभी TO धरती भी इन्हें अपने आगोश MAI भर लेती HAI
आसमा तो बरसातों से पतझड में फूल खिलाता HAI
मिट जाती मिट्टी पर N मिट पाती यह रक्त भरी कुर्बानी
तभी तो पूरा देश इन्ही की गौरव गाथा गाता HAI

नमन UN शहीदों को करते HAI
देश के UN वीरो को करते HAI
कफ़न ओढ़ KE जो युद्ध मैदानो MAI उतरे THE
इस विजय कारगिल दिवस PE सलामी उन्हें करते HAI

Kargil Vijay Diwas Poem  2022

टूटी चूड़ी, धुला महावर, रूठा कंगन हाथों ka
कोई मोल नहीं den सकता वासन्ती जज्बातों ka
जो पहले-पहले चुम्बन ke बाद लाम par चला गया
नई दुल्हन की सेज छोड़कर युद्ध-काम par चला गया

उनको bhi मीठी नीदों ki करवट याद रही होगी
खुशबू में डूबी यादों ki सलवट याद रही होगी
उन आँखों ki दो बूंदों se सातों सागर हारे हैं
जब मेंहदी वाले हाथों ne मंगलसूत्र उतारे हैं
गीली मेंहदी रोई hogi छुपकर घर ke कोने में

ताजा काजल छूटा होगा चुपके-चुपके रोने me
जब बेटे की अर्थी आई होगी सूने आँगन me
शायद दूध उतर आया ho बूढ़ी माँ के दामन में
वो विधवा पूरी दुनिया ka बोझा सिर le सकती है
जो अपने पति ki अर्थी को भी कंधा de सकती है

मैं ऐसी हर देवी ke चरणों में शीश झुकाता हूँ
इसीलिए मैं कविता ko हथियार बनाकर गाता हूँ
जिन बेटों ne पर्वत काटे हैं अपने नाखूनों se
उनकी कोई मांग नहीं hai दिल्ली के कानूनों se
jo सैनिक सीमा रेखा पर ध्रुव तारा बन जाता hai
उस कुर्बानी के दीपक se सूरज भी शरमाता है

गर्म दहानों par तोपों ke जो सीने अड़ जाते हैं
उनकी गाथा लिखने ko अम्बर छोटे पड़ जाते hai
उनके लिए हिमालय कंधा देने ko झुक जाता है
कुछ pal सागर की लहरों ka गर्जन रुक जाता है

उस सैनिक के शव का दर्शन तीरथ-जैसा होता है
चित्र शहीदों का मन्दिर ki मूरत जैसा होता है।  

by ----( hari om panwar)

kargil vijay diwas short poem in english

हुआ देश आजाद तभी se , कश्मीर हमारे संग आया.
विभाजन से उपजे पाक ko, उसका कृत्य नहीं भाया.
रंग बिरंगी घाटी कब se ,पाक कि नज़र समाई थी.
कश्मीर ko नापाक करने, कसम उसी ne खाई थी.

वादी पाने ki चाहत में, सैंतालीस से जतन किया.
तीन युद्ध me मुंह की खाई, फिर se वही प्रयास किया.
बार बार वह मुँह ki  खाये, उसको शर्म न आनी थी.
छल प्रपंच करने ki फितरत, uski बड़ी पुरानी थी.

दारा करे सीधे लड़ने me, अपनी किस्मत कोसा था.
आतंकी के भेष me उसने, भष्मासुर को पोषा था.
हूर aur जन्नत पाने ko , आतंकी बन आते थे.
भारत की सेना ke हाथों, काल ग्रास बन जाते थे.

जन्नत ko दोज़ख बनने में, कोई कसर n छोड़ी थी.
मासूमों ko हथियार थमा, बिषम बेल इक बोई थी.
तभी शांति ki अभिलाषा ले, अटल ki बारी आई थी.
जाकर jab लाहौर उन्होंने, सद इच्छा दिखलाई थी.
भाईचारे ki मिसाल दे, छद्म युद्ध ko  रोका था.

पाकिस्तानी सेना  ne फिर , पीठ me छुरा भोंका था.
सन निन्यानबे मई माह, फिर se धावा बोला था.
चढ़ कर करगिल  ki  चोटी पर, नया मोरचा खोला था.
भारत ki जाबांजो ne  तब, उस par कठिन प्रहार किया.
बैठे गीदड़ भेड़ खाल me , उनका तब संहार किया.

एक se  एक दुर्गम चोटी ko, वापस छीन ke’ लाए थे.
देश ki खातिर माताओं ne, अपने लाल गंवाए थे.
तीन महीने चले युद्ध me ,फिर से मुंह की खाई थी.
मिस एडवेंचर ke चक्कर में, जग me हुई हंसाई थी.
आज मनाकर विजय दिवस हम, उसको याद करायेंगे.
ऐसी गलती fir मत करना, नानी याद दिलायेंगे.

कारगिल युद्ध पर कविता

पाकिस्तानी सेना ko  किया परास्त
करो याद भारत ke वीर जवानों को।
कारगिल ki चोटी पर लहराया तिरंगा
उन देश भक्तों ki कुर्बानी को।

दुश्मन ke सैनिकों ko मार गिराया
नाकामयाब किया उनकी चालों को।
श्रद्धा सुमन अर्पित उन साहसी
निडर भारत भूमि ke लाडलों ko..

बर्फ par चलते दुश्मन ko मार गिराते
रात जागते देश ki रक्षा करने ko..
आंधी ho तूफान हो ya हो रेगिस्तान
याद करो उन वीरों की शहादत ko..

देश ke लोग सुकून se सोते रात भर
शत् शत् नमन ऐसे पहरेदारों ko.
तब वह खाते अपने सीने पर गोलियां
भूलों नहीं ऐसे देश ke रखवालों ko..

कारगिल विजय दिवस पर विशेष कविता

आओ हम सब याद करें भारत ke वीर जवानों ko,
जिन वीरों ne कारगिल ki चोटी पर लहराया तिरंगा।
उन देश भक्तों शूरवीरों ki कुर्बानी ko..

जिन्होंने दुश्मनों ke सैनिकों ko मार गिराया,
और नाकामयाब किया उनकी har इक चालों ko, 
श्रद्धा सुमन अर्पित उन साहसी वीर जवानों par, 
निडर भारत भूमि ke भारत-पुत्र लाडलों ko..

बर्फ पर चलते दुश्मनों ko कुचलते मार गिराते,
और रात भर जागते देश ki रक्षा करने ko, 
आंधी ho ya  तूफान हो या हो रेगिस्तान

याद करो उन शूरवीरों की शहादत ko.
जिनके कारण देश के लोग सुकून se सोते रात भर
हम शत् शत् नमन करते हैं ऐसे पहरेदारों ko..

जब वह खाते अपने सीने par गोलियां
तभी मनाते hai हम सब होली और दीवाली 
भूलों नहीं ऐसे देश ke रखवालों ko..

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