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कुतुब मीनार पर निबंध | Essay On Qutub Minar in Hindi

कुतुब मीनार पर निबंध | Essay On Qutub Minar in Hindi- नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है, आज के आर्टिकल में हम भारत के एक और सुन्दर और आकर्षण के केंद्र कुतुबमीनार के बारे में निबंध, भाषण, स्पीच, आर्टिकल के माध्यम से विस्तृत में जानकारी प्राप्त करेंगे.

कुतुब मीनार पर निबंध | Essay On Qutub Minar in Hindi

कुतुब मीनार पर निबंध | Essay On Qutub Minar in Hindi

भारत अपने आकर्षित कला कृतियों और अदभुत इमारतो के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहाँ हर साल लाखो सैलानी यात्रा के लिए आते है. कुतुबमीनार भारत में स्थित एक बहुत ही आकर्षित और सुंदर मीनार है. जो हमारे मन को मोहित करने वाला है.

यह देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थित है, जो दिल्ली के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित महरोली में बना हुआ है. इसका निर्माण गुलाम वंश के शासक कुतुब्ब्दीन ऐबक द्वारा १२ वी शताब्दी में शुरू किया गया था.

इस मीनार का कार्य लम्बे समय तक चलता रहा ऐबक इसे पूरा नहीं कर सका इस मीनार के निर्माण का कार्य उसके पोते तथा उतराधिकारी इल्तुतमिश ने पूरा किया था.

यह भारत का सबसे बड़ा ईंटो से बना मीनार है. जिसकी लम्बाई 72 मीटर है. तथा दूसरा सबसे बड़ा मीनार है, जिसमे सबसे बड़ा भारत का मीनार फतेह्बुर्ज है, जो १०० मीटर लम्बा है.

भारत में अनेक ऐतिहासिक धरोहर और स्मारक है, जिसमे से कुतुबमीनार प्रमुख स्थान रखता है. यह दुनिया के सबसे सुंदर मीनारों में गिना जाता है. इसका नाम कुतुबद्दीन ऐबक के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इसका निर्माण शुरू किया था.

इसका नाम कुतुबमीनार है, जिसका अर्थ न्याय का स्तम्भ है. यह भारत के बड़े स्तम्भों में भी गिना जाता है. जिसमे दिल्ली का आयरन स्तम्भ भी शामिल है.

इसकी सुन्दरता और लोकप्रियता के आधार पर इसे यूनिस्को विश्व धरोहर स्थलों में प्रमुख स्थान दिया गया है. यह मुग़ल कलाकृति का एक नमूना है. जो इंडो-इस्लामिक वास्तुकला द्वारा बनाया गया है. 

यह मीनार सबसे बड़ी मीनार है, जिस पर गुबंद बनाया गया है. यह मीनार ईंटो से निर्मित की गई थी, जिसमे लाल बलुआ पत्थरों का प्रयोग किया गया है. 

इसका निर्माण मुहम्मद गौरी की जीत के जश्न में करवाया गया था, ऐबक ने इसे जीत का प्रतीक बनाया. इस्लाम शक्ति के रूप में उभर रहे शासको के लिए प्रेरणा का स्रोत था.

बात इसके आकर की करें, तो यह शंक्वाकार आकार में 14.3 मीटर तथा  2.7 मीटर के शीर्ष व्यास वाली मीनार है, इसके ऊपर जाने के लिए सीढिया बनाई गई है, जिनकी संख्या 379 है, जो गोलाकार आकृति में बनाई गई है.

यह पांच महलो से बना हुआ है. इसकी मंजिलो में लाल बलुआ पत्थर, संगमरमर, लाल ईंटो तथा मार्बल का उपयोग किया गया है, जो इसे सुन्दरता तथा मजबूती प्रदान करते है.

कुतुब मीनार के बारे में 10 लाइन | 10 Lines Essay on Qutub Minar in Hindi

  • कुतुबमीनार भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीनार है. यह घुंटी वाली सबसे बड़ी मीनार है.
  • यह भारत की राजधानी नई दिल्ली के महरौली में स्थित एक बहुत सुंदर पर्यटन स्थल है.
  • इस मीनार का नाम मुगल सम्राट कुतुबुद्दीन ऐबक के नाम पर रखा गया है, इसका निर्माण कार्य शुरू इन्ही के द्वारा किया गया था.
  • कुतुब मीनार ऊंचाई के आधार पर दूसरी सबसे बड़ी मीनार है, इसकी ऊंचाई 73 मीटर यानि 237.86 फीट है. तथा इसका व्यास 14.3 मीटर यानि 46 फीट का है.
  • इस मीनार का निर्माण कार्य 1199 में ऐबक द्वारा शुरू किया गया था.
  • इसके निर्माण में लाल बलुआ पत्थर तथा संगमरमर का उपयोग किया गया है.
  • इस मीनार का निर्माण ३ मंजिलो में किया गया है, जिसमे कुल 379 सीढ़िया है. जो घोलाकर है.
  • इसकी लोकप्रियता के आधार पर इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया है.
  • इसका निर्माण इंडो-इस्लामिक वास्तुकला शैली में किया गया है.
  • हर सालो लाखो की संख्या में देशी-विदेशी सैलानी यहाँ पर्यटनहेतु आते है. तथा इसके सुंदर दृश्य का लुप्त उठाते है.

निबंध 2 (400 शब्द)

प्रस्तावना

कुतुब मीनार भारत की सबसे ऊँची मीनारों में से एक है, जो अपनी कला कृति और बनावट के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. कुतुबमीनार भारत की राजधानी दिल्ली में अरबिन्द मार्ग, महरौली में स्थित है.

यह भारत की सबसे बड़ी ईंटो से बनी मीनार और दूसरी सबसे बड़ी फेतेह्बुर्ज के बाद सबसे बड़ी मीनार है. जो वर्तमान में विश्व हेरिटेज साईट में भी शामिल है. यह आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है.

कुतुबमीनार का निर्माण कार्य कुतुबद्दीन ऐबक द्वारा 12 शताब्दी के आस पास शुरू किया गया था, उनके कार्यकाल में कार्य पूरा नही हो सका इसलिए उनके बाद दो मंजिल का निर्माण उनके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने करवाया. तथा इसका कार्य पूर्ण किया.

इस मीनार में कला कृति का बहुत अच्छा नमूना पेश किया गया है, जो इस्लामिक कलाओ को प्रदर्शित करता है. इसे शंक्वाकार इंडो-इस्लामिक अफगान स्थापित्व शैली के द्वारा बनाया गया है. 

इस मीनार की लम्बाई 239 फीट है. जो पांच मंजिलो में बना हुआ है. इसके उपरी शीर्ष तक जाने के लिए गोलाकार 379 सीढ़ियों है. इसके शीर्ष पर एक सुंदर गुबंद बनाया गया है.

क़ुतुब मीनार की शोभा

कुतुब मीनार की कॉपी के रूप में इसके पास एक ओर मीनार बनाया गया था, जिसका नाम अलाई मीनार था, जिसका निर्माण खिलजी करवाना चाह रहे थे, पर उनकी मृत्यु के बाद उनकी यह ख्वाइश अधूरी रह गई.

कुतुबमीनार के पास में सुंदर और हरा भरा गार्डन है. जो अपनी सुन्दरता और महकता से पर्यटकों को विसरण करने के लिए आकर्षित करता है. मीनार के आगंतुको को यह अपनी ओर आकर्षित करता है.

इसकी ऊंचाई तथा बलुआ पत्थर और ईंटो संगमरमर से बना यह स्मारक और इस्लामिक कलाकृति इसे बहुत बेहतर ढंग से प्रदर्शित करते है. इसके चारो ओर का वातावरण भी शोभनीय है.

यह मीनार इस्लामिक विजय की स्मृति के रूप में बनाया गया है. जब गौरी ने राजपूतो पर विजय प्राप्त की थी, उस समय इसका निर्माण किया गया था. यहाँ सबसे ज्यादा बच्चे यात्रा करते है. जो इसके बारे में इत्सुक होते है.

निष्कर्ष

हिन्दू धर्म के लोग इसे चंद्र गुप्त द्वारा निर्मित बताते है. जिसका नाम पहले विष्णु ध्वज हुआ करता था. यह समय के साथ ही अपनी मजबूती को खो रही है. यह अब टेढ़ी हो चुकी है. पर आज भी सुरक्षित है.

यहाँ दुनिया के लाखो सैलानी हर साल यात्रा के लिए आते है. तथा यहाँ केसुंदर दृश्य को देखते है. इसे इस्लामी लोग शक्ति का प्रतीक मानते है. यहाँ एक मकबरा भी है. यह भारत के सुंदर पर्यटन स्थलों में से एक है.

निबंध 3 (500 शब्द)

भारत की अद्भत स्थापत्य कला में इंडों इस्लामिक शैली का आरम्भ सल्तनत की स्थापना के साथ स्थापत्यकला में एक नवीन अध्याय का आरम्भ होता है. यह भारत की राजधानी के नोर्थ में माहौली में स्थित है.

इसका निर्माण बलुआ पत्थर द्वारा किया गया है. यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीनार है. जो 1000 साल पुरानी है. इसका निर्माण कुतुब-उद्दीन-ऐबक द्वारा किया गया था. यह राजपूतो की हार की ख़ुशी में किया गया.

इसका निर्माण कार्य इल्तुतमिश द्वारा पूरा किया गया. यह लाल पत्थरों से बना है. जिसमे कुरान की आयते और गौरी जिसकी जीत की ख़ुशी में यह मीनार बनाया होगा, उनके बखान किये गए है. 

बात इस मीनार की संरचना की जाए तो इसका आधार का व्यास 14.3 मीट तथा शीर्ष का व्यास 2.7 मीटर है. यह 5 मंजिले से निर्मित है. जिसमे ऊपर जाने के लिए घुमावदार सीढिया बनाई गई है. जिनकी संख्या 379 है. 

इसका निर्माण अफगानिस्तान में स्थित जाम की मीनार को देखकर उसी के अनुसार किया गया है. यहाँ आपको बगीचा देखने को भी मिलता है. इसके साथ ही यहाँ कई खंडहर तथा हमारे देश की पहली मज्जिद कुव्वत उल इस्लाम भी यहाँ पर स्थित है.

माना जाता है, कि यहाँ पहले 27 हिंदू और जैन मंदिर हुआ करते थे, जिसे कुतुबद्दीन ऐबक ने ध्वस्त करके वहा पर कुतुबमीनार का निर्माण किया गया. कहा जाता है, कि ऐबक ने इसका निर्माण नमाज पढने के लिए किया था.

पहले मीनार का निर्माण ऐबक ने लाल बलुआ पत्थर द्वारा किया जिसमे ३ मंजिल तक निर्माण किया गया. प्राकृतिक घटना से मीनार ध्वस्त हो गई.

उसका दुबारा निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने 1368 में किया तथा उन्होंने पहले की तरह ही संगमरमर और बलुआ पत्थर का प्रयोग किया.

तथा इन्होने मीनार के साथ गुबंद को भी स्थापित कर दिया. इसके बाद 1802 में भूकंप के झटके के कारण मीनार का गुबंद गिर गया. 

जिसके बाद ब्रिटिश इंजीनयर ने इसके गुबंद को बंगाली शैली के साथ छतरी को सबसे ऊपर रखा. जिसके बाद इसकी शोभा ओर भी बढ़ गई. 1993 में इस मीनार को युनोस्को विश्व धरोहर सूचि में जगह दी गई.

मीनार शुरुआत में एक मंजिला थी, जो नमाज पढने के लिए बनाई गई थी. इसके बाद इसमे मंजिलो को जोड़ा गया. इसका निर्माण इस्मलिम स्थापत्य के किया गया है, 

जो बेहद सुंदर बनाता है. इसके साथ ही अलाई-दरवाजा, इल्तुतमिश का मकबरा, दो मस्जिदें और बगीचा इसके परिसर को शुभोषित करता है. 

इस मीनार पर बहुत सी कला कृतिया भी बनाई गई है, जिसमे कुरान की आयते तथा फुल पत्तियों के छवि इसे सुंदर बनाती है. यह वर्तमान में यूनेस्को विश्व धरोहर में अपना प्रमुख स्थान बनाए हुए है.

निबंध 4 (600 शब्द)

कुतुब मीनार का दूसरा नाम क्या है? कुतुबमीनार का दूसरा नाम ध्रुव स्तम्भ था. क़ुतुब एक अरबी शब्द है. जिसका अर्थ नक्षत्रिय या खगोलीय वेधशाला है. यह हिन्दुओ के प्रमुख देवता विष्णु जी के नाम से इसका नाम विष्णु स्तम्भ भी माना जाता है.

यह एक अद्धुत इमारत है. जो दिल्ली में स्थित है. यह राजधानी के दक्षिण में महरौली क्षेत्र में है. यह इंडो मुस्लिम शैली में बनाई गई भव्य और सुंदर मीनार है. 

यह हमारे देश की दूसरी विशालतम मीनार है, जिसका आकार ७३ मीटर है. इससे बड़ी मीनार पंजाब में स्थित फतेह्बुर्ज मीनार है.

कुतुबमीनार दिल्ली की सबसे भव्य और आकर्षित पर्यटन स्थलों में से एक है. इसी कारण इसे 1993 में विश्व धरोहर में शामिल किया गया है. यह यात्रियों द्वारा यात्रा किया जाने वाला सबसे अच्छा पर्यटन स्थल है.

प्राचीन काल के समय में राजा महाराजा अपनी जीत के जश्न को मानाने के लिए तथा विजय प्रतीक के रूप में स्मारक का निर्माण करते थे. उसी श्रेणी में कुतुबद्दीन ऐबक ने इस मीनार का निर्माण करवाया.

जब राजपूतो से उनकी विजय हुई. मीनार का कार्य शुरू करने के बाद ऐबक की मृत्यु हो गई बचा हुआ कार्य इल्तुतमिश द्वारा पूरा किया गया. इसका निर्माण कार्य १२०० ईस्वी तक सम्पन्न हुआ.यह मीनार सुन्दर नक्काशी और 5 मंजिलो में बना हुआ है..

जिसे बनाने में लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर का उपयोग किया गया है. इसकी कलाकृति इसे सुन्दरता तथा भव्यता दिलाती है. दुनियाभर से लाखो सैलानी हर साल इसके दर्शन के लिए आते है. तथा यहाँ आकर इस मीनार के सुंदर दृश्य का लुफ्त उठाते है.

शुरुआत में बनाया गया मीनार एक कमरे की तरह ही था, जिसे बाद में पुननिर्मित किया गया तथा ५ मजिला बनाया गया. प्राकृतिक झटको से यह ढह भी गई थी.

जिसके बाद फिरोजशाह द्वारा इसका दुबारा निर्माण करवाया गया. इसके बाद एक बार फिर इसे सिकंदर द्वारा सही किया गया. भूकंप के कारण मीनार फिर नष्ट हो गया मेजर स्मिथ के द्वारा 1794 ईस्वी में इसकी मरम्मत की गई.

उसके बाद यह अपनी मजबूत स्थिति में बना हुआ है. पर आज यह मीनार अपनी प्राकृतिक स्थिति में नहीं है, लम्बाई ज्यादा होने के कारण थोडा सा बैंड हो चूका है. पर आज भी यह सुरक्षित है. तथा हमारे देश के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में से एक है. यहाँ का दृश्य दर्शनीय है.