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सत्यनिष्ठा पर निबंध - Essay on integrity In Hindi

आज के लेख में हम सत्यनिष्ठा पर निबंध - Essay on integrity In Hindi आपके साथ साझा कर रहे हैं, जीवन में ईमानदारी और Satyanishtha व्यक्ति के जीवन को बदल देने की क्षमता रखती हैं. सत्य के साथ सत्य के लिए लड़ने की स्प्रिट को हम सत्य निष्ठा के रूप में जानते हैं. आज का निबंध में जानते है कि सत्यनिष्ठा का अर्थ क्या है प्रशासन, दार्शनिक आधार में महत्व को जानेगे.

Essay on integrity In Hindi

सत्यनिष्ठा के अंग्रेजी पर्याय integrity का तात्पर्य किसी चीज के सम्पूर्ण रूप से जुड़े होने ओर आंतरिक सुसंगति से हैं. सत्यनिष्ठा के अंतर्गत नैतिक सिद्धांतों के बीच में आंतरिक सुसंगति और नैतिक सिद्धांतों तथा व्यवहार में सुसंगति दोनों आते हैं. सत्यनिष्ठा सम्पन्न व्यक्ति का आचरण लगभग हर स्थिति में उसके नैतिक सिद्धांत के अनुरूप होना चाहिए और नैतिक सिद्धांत वस्तुनिष्ठ आधार पर नैतिक होना चाहिए.

सुसबद्धता में निहित है कि नैतिक सिद्धांतों का अधिक्रम या सोपान क्रम भी सुनिश्चित होना चाहिए ताकि अगर दो सिद्धांतों का टकराव हो तो भी कर्ता को इस बात का संशय न हो कि उसे किस सिद्धांत को वरीयता देनी हैं अगर किसी नैतिक सिद्धांत से विचलन होता है तो उस विचलन को न्यायसंगत ठहराने के लिए पर्याप्त आधार होना चाहिए. प्रसिद्ध दार्शनिक कांट की भाषा में कहे तो मुझे किसी नियम के उल्लंघन का हक तभी है जब मैं यह कहूँ कि जैसी स्थिति में मैं हूँ वैसी स्थिति में नियम का उल्लंघन करना भी नियम माना जा सकता हैं.

सत्यनिष्ठा के प्रकार (types Of Integrity)

सत्यनिष्ठा बहुत व्यापक शब्द है इसे और अधिक सुपरिभाषित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार देखा जा सकता हैं जैसे 
  • बौद्धिक सत्यनिष्ठा (Intellectual integrity)
  • व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा (Personal integrity)
  • व्यावसायिक सत्यनिष्ठा (Business Professional integrity)
  • कलाकार की सत्यनिष्ठा (Integrity of the artist)
  • ब्रांड की सत्यनिष्ठा (Brand integrity)
बौद्धिक सत्यनिष्ठा (Intellectual integrity)- 
  1. अपना मूल्यांकन उन्ही प्रतिमानों पर तथा उतनी ही कठोरता से करना जिन पर हम किसी और का मूल्यांकन करते हैं. अगर कोई व्यक्ति पीठ पीछे किसी और के बारे में गलत बोलता है तो उसे किसी ऐसे व्यक्ति पर नाराज नहीं होना चाहिए जो उसके बारे में पीछे से गलत बोलता हो.
  2. अपने सिद्धांतों और व्यवहारों पर गहराई से विचार करके उन असंगतियों और अंतविरोधों की खोज करना जो हमारी सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाते हैं और जहाँ तक संभव हो ऐसी असंगतियों को समाप्त करने की कोशिश करना.
बौद्धिक पाखंड- इसका अर्थ है अपने लिए अलग तथा दूसरों के लिए अलग नैतिक मानदंड रखना तथा अपने अंतविरोधों के प्रति लापरवाह रहना या उन्हें जान बूझकर नजरअंदाज करना.

व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा (Personal integrity)- वैयक्तिक नैतिक सिद्धांतों व आचरण के बीच सुसंगति बनाए, इसका सम्बन्ध सम्पूर्ण जीवन से है किसी क्षेत्र विशेष से नहीं.

व्यावसायिक सत्यनिष्ठा (Business Professional integrity)- अपने व्यवसाय से जुड़े उन नैतिक सिद्धांतों का पालन करना जो उस व्यवसाय की आचार संहिता में शामिल हैं. जैसे वकील द्वारा अपने मुवक्किल की पूरी सहायता करना नैतिक है और दूसरे पक्ष के वकील से सांठ गाँठ कर लेना अनैतिक हैं.

अगर व्यावसायिक नैतिकता व सामाजिक नैतिकता में गहरा अन्तर्विरोध हो तो नैतिक संकट उत्पन्न होता हैं. ऐसे में सामाजिक नैतिकता का पालन करना चाहिए. यदि अस्पताल चिकित्सक से अनावश्यक तौर पर किसी मरीज की सर्जरी करने को कहे तो उसे आचरण संहिता के इस नियम का पालन नहीं करना चाहिए कि कनिष्ठ चिकित्सक, वरिष्ठ चिकित्सक के निर्देशों के पालन करेगे.

कलाकार की सत्यनिष्ठा (Integrity of the artist)- कलाकार को वही बात कहनी चाहिए जो वह सचमुच सोचता हैं. किसी आर्थिक लाभ या अन्य प्रकार के दवाब में आकर कोई गलत बात व्यक्त नहीं करनी चाहिए. कलाकार की बातों से समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है इसलिए उसकी नैतिक जिम्मेदारी हैं कि झूठ का प्रचार प्रसार न करे.

ब्रांड की सत्यनिष्ठा (Brand integrity)- किसी ब्रांड का अपनी छवि को सुसंगत रखना जैसे विज्ञापनों का प्रायः एक जैसा होना बाजार सम्बन्धी नीतियों में समरूपता आदि ब्रांड सत्यनिष्ठा के अंतर्गत आते हैं.

व्यक्तिगत जीवन में सत्यनिष्ठा के लाभ (Benefits of integrity in personal life)

  1. इससे व्यक्ति की विश्वसनीयता बढ़ती है. विश्वसनीयता बढ़ने से बाजार, राजनीति या प्रशासन में उसकी सफलता की सम्भावना बढ़ती हैं.
  2. सम्मान बढ़ने से उसे आत्मसंतोष प्राप्त होता है इससे निष्पादन और बेहतर होता हैं.
  3. अगर ऐसे व्यक्ति से कोई गलती हो भी जाती है तो उसे अपवाद समझा जाता है या ये माना जाता है कि उसका इरादा गलत नहीं रहा होगा.

प्रशासन में लाभ (Benefits in administration)

  1. कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों का विश्वास प्राप्त हो जाता हैं.
  2. जनता का विश्वास भी प्राप्त हो जाता है और अगर जनता को अधिकारियों पर विश्वास हो तो सामाजिक परिवर्तन तथा अन्य मामलों में उसका सक्रिय सहयोग मिलता हैं.
  3. कल्याणकारी राज्य में सत्यनिष्ठा रखने वाले लोकसेवकों की उपस्थिति से इस बात की गारंटी होती है कि राज्य जिन वर्गों को लाभान्वित करना चाहता है वे लाभ सचमुच उन्हें प्राप्त होंगे.

सत्यनिष्ठा के उदाहरण (Examples of integrity)

  1. मतदाताओं या उपभोक्ताओं या नागरिकों के सामने कोई झूठा दावा न करना.
  2. सफलता में उतना ही श्रेय लेना जितना योगदान वास्तव में उस व्यक्ति का हैं. अधिक श्रेय मिल रहा हो तो विनम्रता से अस्वीकार कर देना.
  3. विफलता की स्थिति में आगे बढ़कर उसकी जिम्मेदारी को स्वीकार करना चाहिए उसमें उसके अधीन स्थों की भूमिका प्रमुख रही हो.
  4. व्यक्तिगत लाभ के लिए झूठ बोलने दूसरों की बुराई या तारीफ़ करने जैसे प्रवृत्तियों से बचना जैसे 12 साल के बच्चे की पूरी टिकिट लेना.
  5. अपनी प्रतिबद्धताओं और वायदों को निश्चित समय पर पूरा करना चाहे उसके लिए कितना भी त्याग करना पड़े.
  6. किसी व्यक्ति से उतनी ही अपेक्षा करना जितना आप स्वयं उसके लिए करते हैं.
  7. किसी ऐसे उत्पाद का विज्ञापन या समर्थन न करना जिससे आप स्वयं सचमुच संतुष्ट न हो और समाज के लिए अच्छा न मानते हो.
सत्यनिष्ठा पर निबंध Satyanishtha essay in hindi

सत्यनिष्ठा एक व्यापक अर्थों वाला शब्द हैं यह मानव जीवन को बदलने का सामर्थ्य रखता हैं. आमतौर पर हम सत्यनिष्ठा का प्रयोग सच्चाई के लिए ही करते हैं. जो इन्सान जीवन में सत्य के पथ पर अग्रसर होता हैं उसे कभी बड़ी पराजय का सामना नहीं करना पड़ता हैं.

सत्य के बल पर वह जीवन में नित्य आंशिक सफलताओं के मुकाम हासिल करता जाता हैं. कठिन हालातों में भी सत्य की राह को थामे मानव को कोई विपदा परास्त नहीं कर पाती हैं तथा उसकी यह अट्टल सोच उन्हें शेष समाज में सम्मानीय व आदर्श का पद दिलाती हैं.

महात्मा गांधी, बुद्ध, महावीर स्वामी, विवेकानंद जी जैसे चिर परिचित नामों के महान बनने में सत्य का बड़ा योगदान था. इन्होने अपने ह्रदय में सच को बसाया तथा उसी पर अमल किया. आज हर कोई अपने थोड़े से फायदे के लिए झूठ, प्रपंच का सहारा लेने से नहीं चूकता तो हम उनके अंजाम भी कई बार देखते हैं.

जो इन्सान धन के लिए अपना चरित्र डिगा सकता हैं अथवा अपने मूल्यों को छोड़ सकता हैं. उसके ये कर्म स्वयं के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाले साबित होते हैं. क्योंकि मानव का सबसे बड़ा धन एवं सहयोगी उसका चरित्र हैं. एक अच्छे चरित्र का एक गुण सत्यनिष्ठा हैं.

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