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भारतीय किसान पर निबंध | Essay on Indian Farmer in Hindi

भारतीय किसान पर निबंध | Essay on Indian Farmer in Hindi: नमस्कार दोस्तों आज का निबंध किसान पर दिया गया हैं. इस निबंध, अनुच्छेद, भाषण में हम भारतीय किसान के जीवन, उनकी समस्याओं और इतिहास पर संक्षिप्त रूप से समझने का प्रयास करेगे.

Essay on Indian Farmer in Hindi

भारत को कृषि का देश कहा जाता हैं. यहाँ की इकोनोमी का मूल आधार खेतीबाड़ी ही हैं. इस प्रकार कहा जा सकता है भारत की नीव किसान एवं कृषि पर पूरी तरह आश्रित हैं. देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में भारतीय किसान की अहम भूमिका हैं.

किसान देश की इतनी महत्वपूर्ण कड़ी होने के उपरान्त भी बड़े शर्म की बात है कि आज हमारे किसान भाई अभावों का जीवन जीने के लिए मजबूर कर दिए गये हैं. भारत की 60 फीसदी आबादी गाँवों में बसती है जिसका मुख्य कार्य कृषि ही हैं. 

आजादी के बाद उद्योग एवं सेवा के क्षेत्र में जितनी प्रगति हुई है कृषि के क्षेत्र में उतना विकास नहीं हो पाया है जिसके चलते किसान के जीवन में कोई ख़ास बदलाव नहीं आए हैं. देश का किसान वर्ग शिक्षा से पूरी तरह कटा हुआ है उनमें साक्षरता का स्तर बेहद न्यून हैं.

अशिक्षा के चलते वे अपनी स्थिति को ऊपर उठाने में विफल रहे हैं. भारत के किसान की जीवन शैली बेहद सीधी सादी होती है वह साधारण कपड़े पहनता हैं. उनका जीवन निर्वहन ऐसे वातावरण के बीच होता है जहाँ उसकी सेहत का कोई ध्यान रखने की परिस्थतियाँ नहीं होती हैं. परिवेश में साफ़ सफाई का न होना भी किसान के गिरते स्वास्थ्य का एक कारण हैं.

किसान का प्रकृति से गहरा नाता होता हैं. वह गर्मी, बरसात, ठंड खिली धूप और खुशहाल जीवन के बीच अपना जीवन व्यतीत करता हैं. सरल स्वभाव का किसान अपना जीवन निर्वहन कठोर परिश्रम करके करता हैं. उनकी कुशलता, कर्मठता तथा सहनशीलता की तुलना किसी से संभव नहीं हैं. वह जेठ की भरी दुपहरी में खेत में काम करता है जब लोग अपने घरों में दुबक कर बैठे रहते हैं.

ऐसा नहीं है कि किसान अपनी स्थिति को सुधारने के लिए परिश्रम नहीं करता है बल्कि उनके अथक प्रयासों के बावजूद वह निर्धनता की खाई को पाटने में स्वयं को असमर्थ पाता हैं. इनके पिछड़ेपन के अनेक कारण रहे हैं इनमें सबसे बड़ा कारण कृषि क्षेत्र में नवीन पद्धतियों को उपयोग में न लेना भी हैं. आज भी हमारा किसान सदियों पुरानी परम्परागत शैली से ही खेती करता हैं.

अज्ञानता के चलते वह नवीन विज्ञान के आविष्कारों एवं सुविधाओं का उपयोग नहीं कर पाता हैं. यदि किसान को उन्नत बीज, खाद, कृषि तकनीक तथा व्यावसायिक कृषि के बारे में पर्याप्त ज्ञान हो तो निश्चय ही वह अपने जीवन स्तर में बड़ा बदलाव ला सकता हैं.

ऐसा नहीं है कि किसान की दुर्दशा के लिए अशिक्षा एवं निर्धनता ही जिम्मेदार कारण है बल्कि उनकी कृषि विधि तथा प्राकृतिक आपदाएं भी अहम कारण हैं. भारतीय किसान के भविष्य का निर्धारण मानसून पर ही आधारित हैं कई बार सूखा, बाढ़, पाला, बेमौसम की बारिश भी आफत बनकर आती हैं. यदि हम अपने किसानों की स्थिति में सुधार देखना चाहते है तो इसके लिए विभिन्न योजनाओं के जरिये उन्हें लाभान्वित करने के प्रयास किये जाने की आवश्यकता हैं.

हमें किसानों की उन्नति के लिए चाहिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हमारा कृषक साक्षर एवं जागरूक बने सरकार द्वारा संस्थाओं के माध्यम से कृषि से जुडी वैज्ञानिक तकनीकों का ज्ञान दिया जाए. इस दिशा में राज्य एवं केंद्र सरकारों विगत कई वर्षों से लगी हैं. आज इंटरनेट एवं टीवी के माध्यम से भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है इससे किसान आधुनिक कृषि की तकनीक को जान सके.

सरकारे अपने स्तर पर किसानों को सस्ती खाद, बीज, कृषि यंत्र उपलब्ध बनाने का प्रयास कर रही हैं. मोदी सरकार ने किसान सम्मान योजना एवं अन्य सब्सिडी तथा अल्प ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध करवाने की योजनाएं तैयार की हैं. इन प्रयासों से धीरे धीरे किसान साहूकारों के कर्ज से मुक्त होकर स्वावलंबी बनने की दिशा में अपने कदम बढ़ा रहा हैं.

भारत की स्वतन्त्रता के ७ दशक बाद कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों की समीक्षा करे तो आज की स्थिति पहले से कई गुना अच्छी हैं. अब विकास के एजेंडे में गाँव एवं किसान को केंद्र बिंदु बनाया गया हैं ऐसे प्रयास पूर्व में कभी नहीं किये गये थे. फिर भी भारतीय किसान की समृद्धि की दिशा में और अधिक उपाय करने की आवश्यकता है क्योंकि देश के किसान के विकास से ही देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता हैं.

हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि हमारा किसान एक दिन खुशहाली के गीत गाएगा, अब अन्नदाता को खाली पेट सोना नहीं पड़ेगा. वह अपना पेट अच्छे तरीके से भरने के साथ ही देश को धन धान्य से समृद्ध बनाएगा.

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