100- 200 Words Hindi Essays, Notes, Articles, Debates, Paragraphs & Speech

भारतीय ग्रामीण जीवन पर निबंध | Essay on Indian Rural Life in Hindi

भारतीय ग्रामीण जीवन पर निबंध | Essay on Indian Rural Life in Hindi: नमस्कार आपका स्वागत है आज के निबंध में हम ग्रामीण जीवन के बारे में बता रहे हैं. इस निबंध, भाषण, अनुच्छेद में हम भारत के गाँवों के जीवन की स्थिति पर प्रकाश डालेगे.


Essay on Indian Rural Life in Hindi

भारत की गिनती दुनिया के बड़े देशों में की जाती हैं. इसकी आबादी विश्व की दूसरी सबसे बड़ी हैं. भारत की कुल जनसंख्या का एक बड़ा भाग आज भी गाँवों में निवास करता हैं जिसकी आजीविका के मुख्य साधन कृषि और पशुपालन ही हैं. खेतीबाड़ी ही भारत की इकोनोमी का मूल आधार हैं.

जब भी बात भारत के ग्राम्य जीवन की आती है तो एक छवि अनायास ही मस्तिष्क में बैठ जाती हैं. सीधे सादे जीवन व्यतीत करने वाले लोग, जो अधिकतर किसान एवं पशुपालक होते हैं. दूर दूर तक लहलहाते खेतों के सुंदर नजारे, कच्चे मिट्टी के घर बाहर बाड़े में बंधे पशु, खाट पर सुस्ताते वृद्ध एवं घर का कामकाज सभालती गाँव की महिलाएं और गाँव का छोटा सा हाट बाजार.

ग्रामीण जीवन शैली की मुख्य विशेषताओं में मिलजुलकर रहना, हर वक्त अपने पड़ोसी की मदद करना उनके सुख दुःख का साथी बनने की होती हैं. गाँवों का वातावरण बेहद प्राकृतिक एवं प्रदूषण से मुक्त रहता है जहाँ के लोगों को स्वच्छ वायु, जल के उपभोग का सौभाग्य प्राप्त हैं.

यदि हम ग्रामीण जीवन एवं शहरी जीवन की तुलना करे तो यह सभी मायनों में एक दुसरे से भिन्न नजर आएगे, एक तरफ दोनों की जीवन शैली पूर्णतया अलग हैं. वही लोगों के मनोरंजन के साधन, व्यवसाय आदि भी भिन्न भिन्न हैं. आमतौर पर लोग शाम को गाँव की चौपाल में इकट्ठे बैठकर सभी के हालचाल, कहानियों आदि से मनोरंजन करते हैं.

गाँव के लोग अधिक धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं. उनकी महापुरुषों एवं भगवान के चरित्र के प्रति गहरी निष्ठां होती हैं. गाँव के मुख्य मन्दिर अथवा घरों में बने मन्दिरों में नित्य पूजा पाठ आदि होते हैं. लोग अक्सर ढोल मंजीरे और संगीत के साथ जागरण के धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं.

भारत के महत्वपूर्ण पर्व यथा होली, दीपावली, दशहरे की पारम्परिक ढंग तथा हर्ष और उल्लास से भरा जो नजारा गाँव में दीखता है उसकी झलक शहर में मिलना कठिन हैं. ग्राम्य जीवन का त्योहारों के प्रति गहरा आकर्षण रहता हैं. लोग मिलजुलकर एक दूसरे के संग इन उत्सवो में शामिल होते हैं. भारत की सजीव संस्कृति के दर्शन गाँव के मेलों में देखे जा सकते हैं.

देहात का व्यक्ति सरल एवं मिलनसार स्वभाव का होता हैं. उनका जीवन तथा पहनावा फैशन की दुनिया से बहुत दूर सादा जीवन होता हैं. भारतीय संस्कृति के आदर्श एवं संस्कारों की परम्परा का निर्वहन तो ग्रामीण जीवन में ही देखने को मिलता हैं. बड़ो का सम्मान करना उनकी आज्ञा का पालन करना जैसे गुण ग्रामवासियों में अधिक होता हैं.

आजादी के उपरान्त जिस तेज गति से शहरी जीवन में विकास की बहार आई है गाँव इससे अछूते ही रहे हैं. आज भी गाँव के लोगों के लिए गरीबी के दंश से पार पाना मुश्किल हो रहा हैं. यही वजह है कि गाँव की बड़ी आबादी को गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करना पड़ता हैं उनके लिए न तो रोजगार के अधिक अवसर है न अच्छी शिक्षा पाने के सुलभ साधन. गाँवों के पिछड़ेपन की एक वजह अशिक्षा एवं अंधविश्वास भी हैं. जिसके चलते लोग आज भी आधुनिक जीवन शैली को अभिशाप मानते हैं.

एक तरफ विकास के पैमाने पर ग्रामीण एवं शहरी जीवन के बीच की खाई अधिक चौड़ी हुई है तो वही गाँव का प्राचीन स्वरूप भी अब तेजी से विकृत हो रहा हैं. एक आदर्श गाँव जो हरा भरा एवं सुख सम्पन्न हुआ करता था अब वहां पेड़ों की कटाई के चलते पशुओं के चारे तथा हरियाली की कमी नजर आती हैं. भूतल का जल समाप्त होने की कगार पर हैं छोटे कुटीर उद्योग अब नाममात्र के रह गये हैं.

भारत की 65 प्रतिशत से अधिक जनता आज भी गाँवों में बसर करती है. इतने बड़े जनसमुदाय की अवहेलना करके भारत के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती हैं. जब तक ग्रामीण जीवन सुखमय नहीं बनेगा तब तक देश के हालातों में व्यापक सुधार की आशा करना बेमानी ही होगी. 

आज के दौर में जब दुनिया भर में लोग अपनी सभ्यता एवं संस्कृति के आदर्शों को भुलाते जा रहे हैं. ऐसे में भारतीय ग्रामीण जीवन इनकों प्रश्रय दे रहा हैं. हमें चाहिए कि हम अपनी इस विरासत की समस्याओं को दूर करे तथा गाँव के लोगों के लिए विकास की योजनाओं पर अधिक ध्यान देकर भारत को सर्वशक्तिशाली राष्ट्र बना सकते हैं.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अपनी मूल्यवान राय दे