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गाँव का मेला पर निबंध | Essay on Village fair in Hindi

नमस्कार साथियों, गाँव का मेला पर निबंध Essay on Village fair in Hindi का शोर्ट निबंध यहाँ विभिन्न शब्द सीमा में स्कूल स्टूडेंट्स के लिए तैयार किया गया हैं. हम उम्मीद करते हैं. ये लेख आपको पसंद आएगा तथा आपकों गाँव के मेले का वर्णन दृश्य मेले की यात्रा भ्रमण आदि के विषय में लिखने में मदद मिलेगी.

गाँव का मेला पर निबंध Essay on Village fair in Hindi

गाँव का मेला पर निबंध Essay on Village fair in Hindi


गाँव का मेला पर निबंध 250 शब्दों में

मेरे गाँव का नाम रामपुर है. यहाँ हर साल बहुत बड़ा मेला लगता हैं. आज मैं मेला देखने जा रहा हूँ. मैं आज बहुत खुश था क्योंकि मेले में बहुत कुछ देखने को मिलता है. तरह तरह के खिलौने, रंग बिरंगी गाड़ियाँ, मिठाईयां कपड़े, पुस्तके और खाने पीने पीने की चीजे मेले में मिलती हैं.

खेलने के लिए मैंने ढेर सारे खिलौने लिए. मेले में जादूगर भी था, जो तरह तरह के जादू करके हम बच्चों को हंसाता था. मेले में एक बड़ा सा झूला था उसे उड़नखटोला कहते हैं. उसमें मुझे बड़ा मजा आया, चकरी गाड़ी में बैठकर तो मुझे चक्कर आने लगा और सब लोग हंसने लगे.

मौत के कुँए में गाड़ी चलाने वाला कलाबाज अपनी करतबों को दिखा रहा था. मदारी बंदर को नचा रहा था. हमारा हंस हंसकर बुरा हाल हुआ. इस तरह कब शाम हो गई पता ही नहीं चला और हम सब ख़ुशी ख़ुशी घर की ओर चल पड़े.

गाँव मेला निबंध 300 शब्दों में

प्रस्तावना

मेले का भारत में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है. मेला एक ऐसी जगह है. जहाँ पर मनोरंजन के साधन उपलब्ध होते हैं. यह व्यावसायिक तौर पर भी महत्वपूर्ण होता है. प्रत्येक मेला विशेष प्रयोजन से लगता है. मेला अपनों को साथ में समय गुजारने का मौका देता हैं.

मेले के प्रकार

अगर भारत को मेलो का देश बोला जाये तो गलत नहीं होगा. क्योंकि भारत में पूरे साल कोई न कोई मेला लगता हैं. जब किसी एक स्थान पर बहुत से लोग किसी सामाजिक, धार्मिक एवं व्यावसायिक या अन्य कारणों से एकत्र होते है, तो उसे मेला कहते हैं. मेले कई प्रकार के होते है जैसे धार्मिक मेला, कुम्भ का मेला, पशु मेला, पुस्तक मेला आदि.

मेले का आकर्षण

मेला बच्चों के लिए सबसे मजेदार जगह हैं. मेले का नाम सुनते ही बच्चे खुशी से झूम उठते हैं. मेले में काफी भीड़ होती हैं, मेले में मिठाई की दूकान, और अन्य कई खाने पीने की दुकाने लगती हैं.

मेले में तरह तरह की दुकाने ही नहीं बल्कि मजेदार झूले भी लगते हैं. मेले में बच्चों को खिलोने खरीदना और झुला झुलना बहुत पसंद होता हैं. हम मेले में घूम कर तरह तरह के स्वादिष्ट पकवानों का आनन्द लेते हैं. मेले की वजह से हम अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बीता पाते हैं.

कई मेलों में सर्कस लगता है जहाँ हमे जादू के खेल देखने को मिलता हैं. जो हम सबकों पसंद हैं. मेले में जाते समय हमें जरूरत के हिसाब से ही पैसे ले जाने चाहिए और जरूरत के हिसाब से ही खर्च करने चाहिए, फिजूल चीजों में पैसे खर्च नहीं करने चाहिए.

मेले में माता पिता को अपने बच्चों का ख़ास ख्याल रखना चाहिए. क्योंकि भीड़ में बच्चे खो जाते है और मेले जैसे जगहों पर चोरी और अपहरण जैसे अपराध होते हैं. इसलिए मेले में जाते समय सावधान रहे ताकि आप बिना किसी चिंता के मेले का भरपूर आनंद लेते रहे.

उपसंहार

मेले में मनोरंजन के साथ बहुत भीड़ होती हैं. जहाँ वस्तुएं खरीदी और बेचीं जाती हैं. यहाँ हमें ख़ुशी के दो पल बिताने का मौका मिलता हैं.

गाँव का खेल मेला निबंध 

भारतीय संस्कृति में खेलों का विशेष महत्व हैं. प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारे गाँव में दो दिनों के खेल मेले का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया गया. इस अवसर पर गाँव को सुंदर लाइटों और फूलों से सजाया गया. खेल मैदान में मुख्य अतिथि के बैठने के लिए मंच सजाया गया तथा दर्शकों के बैठने के लिए भी प्रबंध किया गया.

इस मेले का प्रारम्भ राज्य खेल मंत्री के कर कमलों द्वारा किया गया. खेल प्रारम्भ होने से पूर्व खेल मंत्री ने सभी टीमों से मुलाक़ात की तथा उन्हें सम्बोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को खेल भावना से खेलना चाहिए.

प्रथम दिवस सौ, दो सौ, पांच सौ मीटर दौड़ तथा क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया. दूसरे दिन खो खो, कबड्डी, साइकिल दौड़ तथा बैलगाड़ी दौड़ का आयोजन किया गया. 

इस मेले के अवसर पर सभी प्रतिभागियों तथा दर्शको ने इस महा कुम्भ का आनंद लिया तथा इसमे हुई गतिविधियों को देखने का लुप्त उठाया. यह मेरे गाँव के लिए गौरव का विषय है.

खेल मेले के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा हर वर्ग में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पर रहे सभी खिलाड़ियों को ट्राफी प्रदान की गई. वास्तव में हमारे गाँव का खेल मेला अत्यंत मनोरंजक पूर्ण एवं सभी के लिए प्रेरणादायी भी रहा.