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भगवान गणेश पर निबंध | Essay on Lord Ganesha in Hindi

भगवान गणेश पर निबंध  Essay on Lord Ganesha in Hindi- नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है, आज के इस आर्टिकल में आज हम भगवान गणेश, गजानंद, गंवरी पुत्र गणेश जी के जीवन के बारे में इस आर्टिकल के द्वारा समस्त जानकारी प्राप्त करेंगे.

भगवान गणेश पर निबंध  Essay on Lord Ganesha in Hindi

भारत एक ऐसा देश है जिसमे सबसे ज्यादा देवताओ ने जन्म लिया था। देवताओ मे सबसे प्रमुख तथा प्रथम पूज्य श्री गणेश को माना जाता है। गणेश जी के कई नाम है। जिसमे-गणपति, विनायक, गौरी नंदन,गजानन्द  आदि है। 

कोई भी नया कार्य करने से पहले श्री गणेश जी को प्रसाद चढ़ाते है तथा गणेश जी को खुश करके अपने काम को शुभ बनाने के लिए गणेश जी का आशीर्वाद लेते है।गणेश जी बुद्धि और सिद्धि के देवता भी माने जाते है। गणेश जी के स्मरण के बिना कोई कार्य सफल नहीं होता है। 

निबंध – 1 (700 शब्द)

परिचय

श्री गणेश का हिन्दु धर्म मे महत्वपूर्ण स्थान है। श्री गणेश जी भगवान शिव तथा पार्वती के पुत्र थे। इन्हे लोग संकट के निवारण के लिए पूजते है। जिन लोगो को अपनी ईच्छा पूरी करनी होती है। वह लोग गणेश जी की सेवा करते है तथा अपनी ईच्छा प्रकट करते है। गणेश जी का सिर हाथी का था। 

बालक गणेश का जन्म 

श्री गणेश का जन्म उनकी माता पार्वती अपने तन मेल से निर्मित किया था।श्री गणेश जी ने नजन शिशु के रुप मे जन्म लिया था। गणेश जी का जन्म अलैंगिक रूप से हुआ था। उनका जन्म बलरूप मे हुआ था। श्री गणेश जी का हाथी का सिर जन्म से नहीं था। माता पार्वती अपने पुत्र से अत्यंत प्यार करते थे। 

 एक समय कि घटना है।माता पार्वती स्नान करने गए उन्होने गणेश जी से कहा कि किसी को भी घर के अंदर नहीं आने देना गणेश जी अपनी माता कि आज्ञा की पालना करते हुए पहरेदरी करने लगे उन्होने सिर्फ माता पार्वती को ही देखा था।वह सिर्फ माता पार्वती की आज्ञा की पालना करते थे।
 
 तभी महादेव जी घर जा रहे थे तभी गणेश जी ने उनका रास्ता रोक दिया तथा अंदर प्रवेश करने से मना कर दिया। महादेव जी इस बात को सहन नहीं कर सके उन्हे गणेश पर बहुत गुस्सा आया महादेव जी ने बालक गणेश को बहुत समझाया की वह माता पार्वती के स्वामी है।

 परंतु गणेश ने इस बात को सुना तक नहीं महादेवजी गुस्से मे आकर बालक गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया माता पार्वती स्नान करके वापस आए तो उन्होने देखा कि उनके वीर गणेश का सिर धड़ से अलग था। माता पार्वती अत्यंत दुखी हुई। 

माता पार्वती ने महादेव जी से बालक गणेश को जीवत करने को कहा भगवान विष्णु ने गज का सिर लाकर महादेव जी को दिया। महादेव जी पार्वती के आगे कुछ नहीं बोले और बालक के धड़ से गज के सिर को जोड़ कर बालक को जीवित कर दिया।

 बालक के प्रति माता का इतना प्यार देखकर सभी देवताओ ने गौरीपुत्र को आशीर्वाद दिया साथ ही महादेवजी ने बालक गणेश को सबसे प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया था। तबसे गणेश जी को सबसे पहले पुजा जाता है। 

शारीरिक संरचना

श्री गणेश की शारीरिक संरचना बाकी देवताओ से कही अलग थी। गणेश जी सबके मन मोहने वाले थे। गणेश जी का सिर गज का होने के कारण गणेश जी को गजानन्द कहते है।  वह सबके साथ अच्छा व्यवहार करते थे। उनका शरीर प्रतिकात्मक है।

 उनके प्रत्येक अंग पर प्रतीक है।श्री गणेश जी के हाथ मे अंकुश था। जिसका अर्थ है-नियंत्रण । इसका अर्थ है। जागृति के साथ नियंत्रण का होना जरूरी है।  इससे हमे शिक्षा मिलती है।

गणेश जी का पेट बड़ा है जिसका अर्थ है कि हमे छोटी-बड़ी, अच्छी-बुरी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्हे अपने उदर मे पचा लेना चाहिए। गणेश जी के दाँतो से सीख मिलती है कि बुद्धि भले ही भ्रमित हो जाए। किन्तु श्र्द्धा कभी खंडित नहीं होनी चाहिए। गणेश जी के शरीर के हर भाग से हमे सीखने को मिलता है। 

गणेश-चतुर्थी (विनायक चतुर्थी) का महा उत्सव

गणेश जी के नाम पर कई उत्सव मनाये जाते है। जिसमे गणेश चतुर्थी सबसे प्रमुख माना जाता है।गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास की चतुर्थी को मनाया जाता है। इसी दिन गणेश जी का जन्म हुआ था।
 यह त्योहार दस दिन तक मनाया जाता है। यह भाद्रपद चौथ से लेकर भाद्रपद चतर्दर्शी तक मनाया जाता है

 यह पर्व पूरे देश मे बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। इस पर्व पर गणेश जी की पुजा बड़े स्तर पर किया जाता है। यह उत्सव दस दिन मनाये जाने के पीछे बड़ा राज है। 

माना जाता है कि एक समय गणेश जी वेदव्यास के मुख द्वारा महाभारत की कथा को पूर्ण श्रद्धा के साथ महाभारत सुनने लगे महाभारत मे इतने लग्न थे कि दस दिन बीत गए पता हा नहीं लगा। उनका शरीर जल गया था। भगवान गणेश हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं।

निष्कर्ष

श्री गणेश के गानो के देवता माने जाते है इसलिए उन्हे गणपती कहा जाता है। गणेश जी सभी के बाधाओ को दूर करते सभी का मंगल करते है। इसलिए उन्हे मंगल मूर्ति के नाम से भी जाना जाता है।  

गणेश जी का सिर हाथी का होने के कारण उन्हे गजानन्द के नाम से भी जाना जाता है। भगवान गणेश हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। श्री गणेश जी हर कार्य को शुभ बना देते है। 

इसी कारण किसी भी शुभ अवसरों जैसे शादी,नया बंगले मे प्रवेश,नई गाड़ी खरीदने तथा यहां तक कि यात्रा को भी शुरू करने पहले, श्रीगणेश का नाम लिया जाता है, वे बहुत बुद्धिमान है लोग गणेश जी के चमत्कार देखकर लोग उन्हे अलग-अलग नामो सुशोभित किया जाता हैं। 

भगवान गणेश पर निबंध

परिचय

भगवान गणेश हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता हैं। वे आमतौर पर बाधाओं के निवारण के रूप में पूजे जाते हैं और उन्हें सभी विधाओं में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। गणेश जी को पूजने की सलाह वो लोग पाते हैं जो अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की इच्छा रखते हैं और कृतज्ञ हैं।

किसी भी धार्मिक आयोजन की शुरुआत आमतौर पर भगवान गणेश की पूजा से होती है। वे सभी देवताओं में से प्रिय हैं और उनके प्रति विशेष स्नेह होता है। उनकी पत्नियाँ रिद्धि और सिद्धि होती हैं, और उनकी पूजा आधिकारिक आरंभ होती है। भगवान गणेश की चरण-पूजा द्वारा ही किसी भी कार्य की शुभ आरंभ की जाती है।

कैसे बने भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य

एक बार, जब भगवान गणेश को प्रथम पूज्य होने का दर्जा मिला, तब सभी देवता नाराज हो गए। सभी क्रोधित देवता भगवान विष्णु के पास गए और उन्होंने समस्या का समाधान पूछा। 

इसके बाद, वे सभी मिलकर भगवान महादेव के पास पहुंचे और उन्होंने यह निर्णय लिया कि प्रथम पूज्य उसका होगा जो पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करेगा।

कुमार कार्तिकेय, देवराज सहित सभी देवता पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करने चले गए, लेकिन भगवान गणेश ने अपने माता-पिता के साथ बैठकर परिक्रमा की। 

उनके इस व्यवहार ने सबको हैरान कर दिया, लेकिन उन्होंने यह समझाया कि उनके लिए माता-पिता ही सब कुछ हैं और उनके प्रति उनका सर्वोत्तम समर्पण चाहिए। इसके बाद, सभी देवता गणेश जी को प्रथम पूज्य मानकर स्वीकार कर लिया।

गणेश जी को हाथी का ही सिर क्यों लगा?

हाथी के बड़े सिर में ज्ञान, समझ, और विवेक की प्रतीकबद्धि होती है, जो जीवन में पूर्णता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। बड़े कान उस व्यक्ति की ओर इंगीत करते हैं जो दूसरों की सुनता है और उनके विचारों को महत्वपूर्ण मानता है।

हाथी के दांत

हाथी के दो दांत होते हैं, एक टूटा हुआ और एक पूरा। यह दो दांत हमें यह सिखाते हैं कि पूर्णता प्राप्त करने के लिए हमें ज्ञान के साथ भावनाओं को भी संतुलित रूप से जीतना चाहिए। 

दायी दांत ज्ञान की प्रतीकबद्धि करता है और बाईं दांत भावनाओं की प्रतीकबद्धि करता है। टूटी हुई बाईं दांत हमें यह सिखाती है कि पूर्णता प्राप्त करने के लिए हमें ज्ञान के साथ भावनाओं को भी जीतना जरुरी है।

हाथी का सूढ़

हाथी का सूढ़ जहाँ एक तरफ एक पेड़ को उखाड़ सकता है तो वहीं दूसरी तरफ जमीन से एक सुई भी उठा सकता है। 

इसी तरह, बाहरी दुनिया के उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए मानव मन को पर्याप्त रूप से मजबूत होना चाहिए और आंतरिक दुनिया के सूक्ष्म लोकों का पता लगाने के लिए भी प्रस्तुत होना चाहिए।

हाथी की आंखें

हाथी की आंखें बहुत छोटी होती हैं, लेकिन उनकी छोटाई हमें यह सिखाती है कि हमें दूसरों के साथ विनम्र और सहज होना चाहिए, भले ही हम कितने भी धनी और ज्ञानी क्यों न हों।

यह हमें यह सिखाता है कि हमें हमारे आसपास के लोगों को महत्वपूर्ण बनाना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए।

सहजता का प्रतीक

हाथी 'ज्ञान शक्ति' और 'कर्म शक्ति', दोनों का ही प्रतीक है। वे सब कुछ सहजता के साथ करते हैं और कभी भी अवरोधों से नहीं रुकते हैं। 

यह हमें सीख देता है कि हमें जीवन की चुनौतियों का सामना सहजता के साथ करना चाहिए और समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए सहज होना चाहिए।

निष्कर्ष

भगवान गणेश हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण देवता हैं और उनके भक्ति में लाखों लोग विश्वास करते हैं। वे बुद्धि, समझ, और सहजता के प्रतीक हैं और उनकी पूजा से हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं में सफलता प्राप्त करने के उपाय सिखने का अवसर मिलता है। 

इन गुणों के साथ, वे बाधाओं के निवारण के रूप में भी जाने जाते हैं और भक्तों को सफलता की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।