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यदि मैं पक्षी होता पर निबंध If I Was A Bird Essay In Hindi

 यदि मैं पक्षी होता पर निबंध If I Was A Bird Essay In Hindi

मै एक पक्षी के जीवन को बहुत पसंद करता हूँ. एक पक्षी के जीवन के पड़ाव पक्षी की खुशिया तथा पक्षी के आनंद आदि को देखकर मेरा मन पक्षी की और आकर्षित हो गया. इस लेख के माध्यम से हम यदि मैं पक्षी होता पर निबंध If I Was A Bird Essay In Hindi के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे. 


प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन मे कुछ इच्छाए रखता है। पर पक्षी का जीवन सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। पक्षियो को न तो चिंता होती है। और न ही कोई तमन्ना होती है। पक्षी अपनी धुन मे ही मस्त रहते है। पक्षियो को उड़ता देख मनुष्य भी सोचता है। 

यदि मे भी पक्षी होता तो बादल मे ऊंची-ऊंची उड़ान भरता सभी के मन को मोहित करता इन्ही इच्छाओ के साथ हर व्यक्ति एक पक्षी बनाना चाहता है। इसी प्रकार मे भी एक पक्षी बनने की जिज्ञासा रखता हूँ। स्वच्छ आसमा मे उड़ते पक्षियो को देखकर मुझे लगता है। यदि मे भी एक पक्षी होता तो आज इनके साथ उड़ता और अपने जीवन का मज्जा लेता।


यदि में पक्षी होता तो मेरे पास एक छोटा शरीर होता जिस पर छोटे-छोटे पंख लगे होते जिनकी सहायता से में उड़ पाता मेरे पास दो नन्हे पैर होते जिस की सहायता से में जमीन पर चल पाता मेरे पास एक मुंह एक पूंछ तथा दो छोटी-छोटी आँखे होती तथा मेरी एक नुकीली चोंच होती ये सब देखकर मै बहुत खुश रहती और हर समय अपने पंखो को हिलाती रहती. 


यदि मे पक्षी होता तो आसमान मे सभी पक्षियो के झुंड के साथ उड़ता तथा ठंडे वातावरण का आनंद लेता। पक्षियो मे न तो भेदभाव होता है। और न ही जातिवाद होता है। अभी एक साथ उड़ते एक साथ बैठते है। तथा एक साथ पानी पीते है। यदि मे भी पक्षी होता तो इन्ही पक्षियो की तरह ही साथ मे मिलजुलकर रहता तथा सभी को एकता का संदेश देता। पक्षी को हर जगह घूमने की आजादी होती है। पक्षियो को देखकर मन चाहता है। हम भी पक्षी बन जाए। 


यदि मै पक्षी होता तो मेरी मनचाही स्थान पर जाती अपने दोस्तो के साथ बैठा रहता तथा न किसी प्रकार के वाहनो का इंतजार करना पड़ता है। और न ही किसी प्रकार की रोकटोक अपना जीवन अपनी आजादी जहा मन किया वहा जाता। दूर-दूर तक लंबी-लंबी उड़ान भरता तथा एक शहर से दूसरे शहर तक बिना किराये पहुंचता। न किसी प्रकर का बंधन और न ही किसी प्रकर की गुलामी जहा मन किया चल पड़े। न पढ़ाई की जरूरत और न ही मेहनत की जो अच्छा लगा वह किया और जब मर्जी उठे तब मर्जी सो गए। न कोई मजदूरी की जरूरत और न घर की।


आज के ज़माने में मानव बहुत स्वार्थी हो गया है. मानव अपने स्वार्थ में आकर मानवता को भूल ही जाता है. पर मानव को पक्षियों से सीख लेनी चाहिए. जो कि किसी अनजान पक्षी को भी संकट में देखकर उसकी सहायता करते है. यदि मै एक पक्षी होता तो जरुर हर पक्षी की तरह में भी पक्षियों की सहायता करता तथा सभी को मानवता का सन्देश देता. यदि में पक्षी होता तो मेरी सुन्दर आवाज तथा सुन्दर रंगों को देखने मानव बहुत प्रेरित होता. मै लोगो को गीत सुनकर नाचकर लोगो को खूब मनोरंजन करता तथा दुविधा आने पर सभी की सहायता करता.


यदि में पक्षी होता तो हर समय सुन्दर गीत गाकर आकाश को गूंजता तथा सभी के मन को मोहित करता रहता. यदि में पक्षी होता तो लोगो की तरह अपने दोस्तों के घर जाता तथा उनसे बाते करता. मै यदि पक्षी होता तो उड़ने का पूरा आनंद लेता मै मीठे बोल सुनकर अपना नाम इतिहास के पन्नो में दर्जा करवाता जिस प्रकार आज कोयल अपनी मीठी वाली के लिए प्रसिद्द है. इसी प्रकार में भी अपनी किसी न किसी तरह से अपना नाम इतिहास में दर्ज करवाता. जिससे आने वाले पक्षी भी खुद पर गर्व करें.


पक्षी एक स्वतंत्र जीव होता है. मै पक्षी होता तो सभी पक्षियों के साथ मित्रता बनाये रखता तथा सभी को संगठन में रहने को प्रेरित करता. यदि में पक्षी होता तो किसी पर निर्भर नहीं रहता ,मै कीड़े-मकोडो तथा पेड़-पौधों से फल पत्तिया खाकर अपना जीवन व्यतीत करता. मुझे एक स्वतंत्र पक्षी बनाना अच्छा लगता है. जो कि कही भी जा सकता है. कही से आ सकता है. कुछ भी कर सकता है.


मनचाहे उड़ सकता है. मनचाहे बैठ सकता है. पर पिंजरे में बंद पक्षी का जीवन बहुत दुखी जीवन होता है. वह अपना जीवन स्वतन्त्र होकर जीना चाहता है. पर उसे बंद ही रखा जाता है. वह मनचाहे उड़ भी नहीं सकता है. इसलिए में लोगो से हर समय प्रार्थना करता हूँ. कि पक्षियों को पिंजरे में बंद मत करो. जिस प्रकार जेल में केद व्यक्ति अपना जीवन जीता है. उसी प्रकार पक्षियों को पिंजरे में बंद उनके लिए जेल के बराबर होता है.


यदि पक्षी और मानव की दोस्ती की जाए तो पक्षी मानव के लिए सबकुछ करता है. वह उनसे डेन लेता है. बदले में वह उसके खेत की रखवाली करता है. मै भी यदि पक्षी होता तो इसी प्रकार लोगो की सेवा करता. मै पक्षी होता और मुझे पिंजरे में बाद कर दिया होता तो मै बहुत निराश होता चाहे  मुझे पिंजरे में खाने को कुछ भी  मिले में एक स्वतंत्र पक्षी होना चाहता हूँ.


पक्षी स्वतंत्र होते है. पर वे अनुशासित होते है. उनके कौन अनुशासन का अध्याय पढ़ता है. पर वे हर समय अनुशासन में रहते है. वे हर कार्य को समय पर पूरा करते है. आज के मानव से भी ज्यादा एक पक्षी में मानवता पाई जाती है. एक पक्षी भोजन की तलास में जाता है. उसे कुछ दाने मिलते है. उसे वह खुद चाहता तो खा सकता था. तथा अपना पेट भर सकता था. पर वह उसे वापस लाकर अपने छोटे से बच्चे को खिलाता है.और कई बार मेने देखा है. कि कोई एक पक्षी संकट में होने पर सभी पक्षी एकत्रित हो जाते है.


यदि में पक्षी होता तो लोगो के साथ ही रहता तथा उनकी सहायता करता और मै लोगो के सन्देश को एक स्थान से दुसरे स्थान तक पहुंचाकर मै मोबाइल का काम करता तथा खुद को डाकिया समझकर लोगो की सेवा करता यदि मुझे मालिक मरने को कहते तो भी हर पल तैयार रहता जो कार्य मुझे सौपते में उसे पलभर में करता.


मै पक्षी होता तो किसी न किसी देवता का में वाहन होता जैसे हंस माता सरस्वती का वाहन है, कबूतर शनिदेव जी का वाहन है. इसी प्रकार में भी किसी देवता को अपने ऊपर सवार कर भ्रमण करवाता. और अपना नाम इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए लिखा देता. मै पक्षी होता तो सभी पक्षियों से भिन्न होता क्योकि मेरा स्वभाव ही कुछ ऐसा ही है.


 मै चाहता हूँ. कि मुझे भगवान पक्षी बनादे. पर ये मेरे वस् की बात नहीं है. जो भगवन ने मुझे बनाया है. वही मेरे लिए श्रेष्ठ है. हर कहानी में ट्विस्ट होता है. उसी प्रकार यदि में पक्षी होता तो शायद स्वतंत्र होता क्या पता कोई मुझे पिंजरे में ही बंद रखे जो मुझे हरगिज पसंद नहीं है. 


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