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भगत सिंह पर निबंध Essay on Bhagat Singh in Hindi

भगत सिंह पर निबंध Essay on Bhagat Singh in Hindi-हमारे देश की आजादी में न जाने कितने वीरो ने बलिदान किया. जिस कारण हमें आजादी मिली. भगत सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी थे. जिन्होंने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया.
भगत सिंह पर निबंध Essay on Bhagat Singh in Hindi
भगत सिंह पर निबंध Essay on Bhagat Singh in Hindi
हमारे देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने के लिए भारत के अनेक वीर जवानों ने अपने बलिदान देकर देश को आज आज बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब भी स्वतंत्रता सेनानियों की बात की जाती है तो उनमें भगत सिंह का नाम सबसे अग्रणी रहता है। 

भगत सिंह पर 10 पंक्तिया 10 Line On Bhagat Singh In Hindi

  1. वीर सपूत भगत सिंह भारत के महान क्रान्तिकारी स्वतंत्रता  सेनानी  थे।
  2. 28 सितंबर 1907 को पंजाब राज्य में भगत सिंह का जन्म हुआ था.
  3. भगत सिंह माता विद्यावती कौरतथा पिता सरदार किशन सिंह थे.
  4. भगत सिंह जाट परिवार से थे.
  5. भगत सिंह ने बिना किसी की हत्या किये 1929 में बमबारी कर सभी को डराया और खुद को अपराधी साबित किया.
  6. भगत सिंह कई भाषाओ के ज्ञाता थे.जिसके-हिंदी,बंगला,उर्दू तथा पंजाबी प्रमुख थी.
  7.  “इंकलाब जिंदाबाद”का नारा भगत सिंह ने दिया था.
  8. नौजवान सभा की स्थापना भगत सिंह ने की थी.
  9. भगत सिंह के समकालीन तथा स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद,राजगुरु तथा सुखदेव थे.
  10. 23 मार्च को भगत सिंह सहित राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई.इस दिन को हमारे देश में शहीद दिवस के रूप में हर साल मनाते है.
भगत सिंह शहीद भगत सिंह के नाम से जानते हैं। वह एक ईमानदार और उत्कृष्ट स्वतंत्रता सेनानी थे देश को स्वतंत्र बनाना उसका प्रमुख लक्ष्य था.

भगत सिंह नए प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद को अपना गुरु बनाया  और अपने गुरु के साथ मिलकर अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध संघर्ष किया था।

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1960 को पंजाब जो कि वर्तमान में पाकिस्तान में है राज्य के दोआब जिले में जाट परिवार में हुआ था। भगत सिंह के पिता का नाम सरदार किशन सिंह तथा माता का नाम विद्यावती था।

भगत सिंह के गुरु का नाम करतार सिंह सराभा पर उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी बनने पर चंद्रशेखर आजाद को अपना गुरु बनाया और उनके समक्ष रहकर देश को आजाद बनाने के लिए लड़ाई लड़ी और अपना बलिदान दिया।

भगत सिंह बचपन से ही देश के स्वतंत्रता सेनानी बनना चाहते थे क्योंकि उनके परिवार में उनके पिताजी उनके चाचा जी देश के महान स्वतंत्रता सेनानी थे.

इसलिए उन्होंने बचपन से भी देश का स्वतंत्रता सेनानी बनने की विचारधारा को अपने जीवन में ठान लिया था। उन्होंने बचपन से ही अंग्रेजों का विरोध एवं संघर्ष करने के लिए सभी को प्रेरित करना शुरू किया.

जिससे काफी लोग प्रभावित भी हुए पर भगत सिंह ने अपने पिता और चाचा की तरह ही देश के स्वतंत्रता सेनानी बनकर देश के लिए आजादी की लड़ाई लड़ी।

भगत सिंह बचपन से ही गांधी जी को पसंद करते थे क्योंकि उनके पिताजी भी गांधी जी के समर्थक थे और उन्हें गांधीजी बहुत अच्छे लगते थे.

इसलिए उन्होंने गांधी जी का साथ देने का फैसला किया भगत सिंह को यूरोपीय राष्ट्रवादी आंदोलन के बारे में पढ़ने के बाद उन्हें देश की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी हुई और भविष्य में देश के साथ क्या होने वाला है.

उसके बारे में उन्हें अनुभव हुआ और इसे समझ कर उन्होंने देश को आजाद कराने के लिए खुद को अग्रसर किया उन्होंने 1925 में खुद को देश  आजादी के लिए झोंक दिया.

और इसके बाद हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में चंद्रशेखर आजाद और महात्मा गांधी का साथ दिया इस सभा में  भगत सिंह को चंद्रशेखर राजगुरु और सुखदेव जैसे महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता से मिलने का मौका मिला। महान क्रांतिकारियों का जुनून देखकर भगत सिंह भी प्रेरित हुए।

भगत सिंह ने देशभक्ति के लिए मात्र 13 वर्ष की आयु में विद्यालय को छोड़ दिया और लाहौर के कॉलेज में दाखिला लिया और वहां यूरोपियन क्रांतिकारी आंदोलन  के बारे में अध्ययन किया।

भगत सिंह अपने जीवन को देश के लिए अर्पित करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने उनके पिता द्वारा दिए गए शादी के प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया था।

भगत सिंह के प्रभाव को देखते हुए और अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध संघर्ष के चलते अंग्रेजी सरकार ने भगत सिंह को गिरफ्तार कर दिया और 1927 में पहली बार भगत सिंह को गिरफ्तार किया गया था।

इस गिरफ्तारी में भगत सिंह को कुछ महीनों के लिए जेल में बंद रखा गया था। ब्रिटिश सरकार ने भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के विरोध 1928 में साइमन कमीशन नामक आयोजन की शुरुआत  की पर भारतीय सेना ने ने इसका बहिष्कार  किया।

साइमन कमीशन आयोजन के विरुद्ध लाला लाजपत राय ने विरोध करते हुए जुलूस का नेतृत्व किया पर पुलिस ने इसका विरोध करते हुए सभी को मारा और जिसमें लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए और कुछ दिनों बाद शहीद हो गए।

इस घटना से भगत सिंह  प्रभावित हुए इसके बाद भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ एक के बाद एक हमले और बमबारी करना शुरू कर दी और इसमें कई पुलिसवालों को भी मौत के घाट उतार दिया.

और कई जगह पर बमबारी कर हल्ला बोला  इसके बाद अंग्रेजी सरकार ने इन्हें अपने दोस्तों सहित राजगुरु सुखदेव को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। भगत सिंह सुखदेव और 1931 को फांसी दे दी गई और इससे हमारे देश में आज भी शहीद दिवस के रूप में मनाते है।

भगत सिंह ने अपने जीवन में देश के लिए अपना बलिदान तक दे दिया था भगत सिंह आज भी हमारे लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण साधन बने हुए हैं। भगत सिंह देश भक्ति हमें गौरवान्वित करती है।

Essay on bhagat singh in hindi

हमारे देश में अनेक देशभक्त हुए हैं जिन्होंने अपनी देशभक्ति के लिए अपना बलिदान तक दे दिया। मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले देशभक्तों में भगत सिंह का नाम सर्वोपरि आता है।

भगत सिंह का नाम सुनते ही दिल में गर्व और जोश भर जाता है देशभक्ति की लहर इंकलाब जिंदाबाद के नारे याद आते हैं। भगत सिंह ने देश की स्वतंत्रता के लिए खुद को कुर्बान कर दिया।

भगत सिंह ने अंतिम सांस तक देशभक्ति की राह पर चलकर देश के युवाओं और नव युवकों को देशभक्ति के लिए प्रेरित किया। महान देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1960 को पंजाब जिले के लायलपुर बंगा नामक गांव में हुआ था।

जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है। भगत सिंह का पूरा परिवार देशभक्ति की राह पर था भगत सिंह के पिता जी तथा चाचा जी अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष करने के कारण जेल में बंदी बना लिए गए थे।

लेकिन जिस दिन भगत सिंह का जन्म हुआ उस दिन अंग्रेजी सरकार ने भगत सिंह के पिता जी और चाचा जी को जेल से छोड़ दिया। इस प्रकार भगत सिंह के जन्म से ही अंग्रेजी सरकार के दुश्मन थे।

उनका जन्म होते ही पिता और चाचा को जेल से रिहाई मिली जिस कारण भगत सिंह की दादी जी ने भगत सिंह को भाग्यवान समझकर इनका नाम भगत सिंह को भाग्यवान समझकर इनका नाम भगत सिंह दिया।

भगत सिंह के परिवार में एक से बढ़कर एक देशभक्त थे जिस कारण बचपन से ही इन्हें देश भक्ति की प्रेरणा मिली। भगत सिंह ने अपनी शुरुआती शिक्षा अपने निजी विद्यालय से ही की अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद लाहौर के विद्यालय में प्रवेश किया।

यह वह समय था जब भारतीय सेनानियों द्वारा रॉलेक्ट एक्ट के आगमन का विरोध किया जा भारतीय सेनानियों द्वारा रॉलेक्ट एक्ट के आगमन का विरोध किया जा रहा था।

इसी साल 1919 में अमृतसर में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड मैं अनेक मैं अनेक भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए बलिदान दे दिया.

अंग्रेजी सरकार के इस क्रूर व्यवहार का बदला लेने के लिए भगत सिंह ने कसम खाई थी कि वह स्वतंत्रता सेनानियों का बदला लेंगे।

अगले ही साल जब महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन की शुरुआत की गई इस आंदोलन में महात्मा गांधी ने सभी विद्यार्थियों को विद्यालय ना जाने के लिए कहा महात्मा गांधी के भाषण से प्रेरित होकर भगत सिंह ने विद्यालय छोड़ दिया.

और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया। असहयोग आंदोलन के बाद जब लाहौर में नेशनल कॉलेज बनाया गया उस कॉलेज में अधिकांश विद्यार्थी देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी थे.

जिसमें भगत सिंह मैं भी प्रवेश किया। इस कॉलेज में भगत सिंह के अलावा यशपाल सुखदेव तीर्थ राम झंडा सिंह जैसे अनेक स्वतंत्रता सेनानी थे। जो पूर्ण रूप से देश भक्ति में लीन थे।

भगत सिंह को लाला लाजपत राय तथा महात्मा गांधी से प्रेरणा मिली। भगत सिंह प्रत्येक स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होकर अंग्रेजों के विरोध में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे।

इसी कड़ी में 1928 में लाला लाजपत राय द्वारा साइमन कमीशन का विरोध किया गया। इस आंदोलन में ब्रिटिश सरकार द्वारा लाला लाजपत राय को बुरी तरह से पीटा गया जिस कारण कुछ समय बाद इनकी मृत्यु हो गई।

इस घटना के पश्चात भगत सिंह तथा उनके साथियों ने मिलकर अंग्रेजी पुलिस अधिकारियों पर आक्रमण किया भगत सिंह ने पुलिसकर्मी को गोलियों से भून दिया जिस कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

इस महान देशभक्त की देशभक्ति के देश के अनेक युवा प्रेरित हुए। अंग्रेजी सरकार ने पुलिसकर्मी की हत्या के आरोप में भगत सिंह को फांसी की सजा सुना दी गई.

सजा की तारीख 24 मार्च 1931 थी, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों के आंदोलनों के चलते अंग्रेजी सरकार ने 1 दिन पूर्व ही 23 मार्च को भगत सिंह को अपने तीन साथी सुखदेव एंड राजगुरू साहित्य फांसी के फंदे पर लटका दिया गया।

अपनी अंतिम सांस तक तीनों देश भक्तों ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाकर अंग्रेजी सरकार का विरोध किया। जिसके परिणाम स्वरुप देश के अनेक युवा प्रेरित हुए और देश के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने लगे। 

आखिरकार भगत सिंह जैसे अनेक देशभक्तों के बलिदान के परिणाम स्वरूप 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ हमें गर्व है भगत सिंह जैसे वीरों पर आज भी भगत सिंह का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

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