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होली पर निबंध - रंगों का त्योहार- मेरा प्रिय त्योहार - Essay on Holi in Hindi Language

होली पर निबंध - रंगों का त्योहार- मेरा प्रिय त्योहार - Essay on Holi in Hindi Language

होली पर निबंध - रंगों का त्योहार- मेरा प्रिय त्योहार - Essay on Holi in Hindi Language: भारतवर्ष में बहुत से त्योहार मनाए जाते हैं. प्रत्येक धर्म को मानने वाले अपने अपने त्योहारों को बड़ी उमंग और प्रसन्नता के साथ मनाते हैं. यों तो हिन्दुओं में बहुत से त्योहार हैं. परन्तु रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली और होली उनके चार प्रमुख त्योहार हैं. कहते है कि ये चारों त्योहार चारो वर्णों के आधार पर ही हैं. रक्षाबंधन ब्राह्मणों का त्योहार हैं. दशहरा क्षत्रियों का त्योहार हैं. दीपावली वैश्यों का त्योहार हैं और होली शूद्रों का त्योहार हैं. प्रारम्भ में जो कुछ भी स्थिति रही हो परन्तु आज भारत में सभी जातियों और चार वर्णों के लोग इन सभी त्योहारों को समान रूप से हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं.

विशिष्ट त्योहार-वसंत ऋतु का सर्वप्रथम त्योहार वसंत पंचमी हैं. उसके पश्चात होली आती हैं. माघ की पूर्णिमा को होलिकारोपण होता हैं. तथा फाल्गुन मॉस की पूर्णिमा को होली मनाई जाती हैं. उसी रात को अथवा दूसरे दिन अत्यंत शीघ्र प्रातकाल प्रत्येक गाँव तथा नगर में स्थान स्थान पर होलिका जलाई जाती हैं. इसकी आग से प्रत्येक सनातनधर्मी के घर में होलियाँ प्रज्वलित हो जाती हैं.

मनाने का तरीका-इस अवसर पर नयें पके हुए अन्न को होली की आग में भूनते हैं. और इस भूने हुए अन्न अर्थात आखतों को आपस में वितरित करते हैं. संस्कृत भाषा में भूने हुए अधपके अन्न को होलक कहते हैं. इसी कारण इस त्योहार को होलिकाउत्सव या होली कहते हैं. कुछ लोग इस त्योहार का सम्बन्ध प्रहलाद बुआ होलिका से स्थापित करते हैं. कुछ लोग कहते है कि इस पर्व पर आर्य लोग सामूहिक रूप से बड़े बड़े यज्ञ किया करते थे. आज जो होली जलाई जाती हैं वह इन्ही यज्ञों का रूपांतरण है. कुछ भी हो यह त्योहार बहुत प्राचीन काल से मनाया जाता हैं.

होली खेलना-होलिका दहन के उपरांत लोग धूल मिट्टी से होली खेलते हैं. यह कुप्रथा न जाने क्यों और किस प्रकार से चल पड़ी. उसके पश्चात दोपहर को रंग की होली खेली जाती हैं. अपराह्न में स्नान, भोजन इत्यादि के पश्चात सभी लोग नवीन वस्त्र धारण करके एक दूसरे के यहाँ जाते हैं. और प्रेम से एक दूसरे से शत्रुता भुलाकर मिलते हैं और शुभकामना व्यक्त करते हैं.

उपसंहार- देश और स्थान के भेद के अनुसार भारत में इस पर्व को मनाने की विधियों में थोड़ा बहुत अंतर भी पाया जाता हैं. ब्रज में कई दिनों तक रंग की होली होती हैं. ब्रज की होली प्रसिद्ध हैं. परन्तु किसी किसी प्रदेश में पंचमी के दिन होली खेली जाती हैं. कहीं कहीं होली के अवसर पर नहीं वरन दशहरे पर परस्पर स्नेह आलिंगन किया जाता हैं.

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