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indian village culture in hindi | भारतीय गाँव की संस्कृति व जीवन

indian village culture in hindi | भारतीय गाँव की संस्कृति व जीवन : हेलो दोस्तों आपका स्वागत है आज हम indian village culture in hindi का छोटा सा निबंध बता रहे हैं. 

indian village culture in hindi | भारतीय गाँव की संस्कृति व जीवन

भारत को गाँवों का देश भी कहा जाता हैं. अधिकतर देश की आबादी कृषि कर्म पर आश्रित है जो गाँवों में निवास करती हैं. कई विद्वानों ने कहा है यदि आपकों भारत के असली स्वरूप का दर्शन करना है तो भारत के गाँव का दर्शन करना चाहिए वही असली भारत बसता हैं.

गाँव का जीवन और संस्कृति शहरी अथवा महानगरीय भीडभाड और भागम भाग की जिदगी की तुलना में बेहद मंद गति से शांत वातावरण में यहाँ का जीवन आगे बढ़ता हैं. गाँव के लोगों की भाषा रहन सहन, वस्त्र वेशभूषा आचार व्यवहार में देशीपन नजर आता है जो शहरी जीवन के लोगों से पूरी तरह हटकर होता हैं.

अक्सर शहरों के लोगों की गाँव में बसने वाले लोगों के बारे में निम्न स्तरीय धारणा होती हैं. मगर असल में वे शहर की दुनियां से दूर एक शांत स्थान बेहद ठाठ के साथ जीते है जो नगरीय जीवन में कही नहीं दीखता हैं. एक दुसरे के यहाँ आना जाना, लहलहाते खेत, गाँव की चोपाल, लोगों की धार्मिक आस्था जीवन मूल्यों का कठोरता से पालन, बड़े बूढों के प्रति सम्मान केवल गाँवों में ही देखा जा सकता हैं.

तभी भारत के गाँवों को देश की आत्मा भी कहा जाता हैं. यह बात जरुर है कि ग्रामीण जीवन में कई बुरी चीजे भी हैं जिनमें आस्तिकता की अधिकता, अंधभक्ति, भेदभाव, सामाजिक कुरीतियाँ लोगों का निम्न स्तरीय जीवन अथवा यूँ कहे गाँव में रोजगार के साधन अल्प होते हैं जिनके कारण अधिकतर आबादी निर्धनता के छाये में ही जीती हैं मगर गरीबी के उपरान्त भी जीवन में संतोष तथा उसे पूर्व जन्म का फल मानकर स्वीकार कर लेने की बात गाँवों में आम बात हैं.

गाँव में अथवा मोहल्ले में किसी के बीमार हो जाने अथवा किसी को परेशानी होने पर लोग अपना पराया भूलकर उनकी मदद के लिए कदम बढ़ाते हैं. एक दुसरे के सुख दुःख में शामिल होकर भाईचारे की परम्परा का निर्वहन अच्छी तरह से किया जाता हैं. स्त्री को सर्वाधिक सुरक्षा का भाव गाँवों में ही मिलता हैं. यहाँ लोगों को समाज तथा संस्कृति के अनुसार व्यवहार में बांध दिया जाता हैं. यही वजह है कि स्त्रियों का यहाँ सम्मान किया जाता हैं.

शिक्षा के क्षेत्र में गाँवों की स्थिति कुछ पिछड़ी सी लगती हैं हालांकि शिक्षा प्रसार के चलते आज हार गाँव में स्कूली शिक्षा का प्रबंध तो सरकारे कर रही हैं. मगर यहाँ के नवयुवकों तथा युवतियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर दराज के शहर का सफर तय करना पड़ता हैं. 

शांत चित्त वाले भारतीय गाँव धीरे धीरे शहरी आबो हवा से प्रभावित होने लगे हैं. गाँवों में अपराध प्रवृत्ति को तेजी से बढ़ावा मिल रहा हैं. गाँव की पंचायतों का अस्तित्व समाप्त होने के कारण कई बार असामाजिक तत्वों द्वारा किसी छोटी बड़ी बात पर किसी की हत्या तक कर देने की खबरे सुनने पढ़ने को मिल ही जाती हैं. 

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