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Letter to my motherland in Hindi- मेरे देश के नाम पत्र

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Letter to my motherland in Hindi- मेरे देश के नाम पत्र

मेरे प्रिय देश,
आर्यावर्त
अगस्त 2019

सप्रेम नमस्कार ,

आज कुछ पढ़ रहा था आपका प्रसंग आते ही आपकी बड़ी याद आई, तो सोचा क्यों न आज पत्र के जरिये ही आपके समाचार जान लू. कैसे हो मेरे प्रिय भारत, मैं उम्मीद करता हूँ आप हष्ट पुष्ट एवं प्रसन्नचित्त होंगे. तथा नित्य नई कामयाबी के झंडे गाड़ रहे होंगे. जब हमारी पिछली मुलाकात हुई तो आप बेहद खुश लग रहे थे. वातावरण खुशनुमा था, झरनों का सरगम, पक्षियों की चहचहाहट, नदियों की लहरों के साथ आप बेहद खुश थे. जिस तरह विगत 73 वर्षों में आपने प्रत्येक क्षेत्र में जो उन्नति की हैं वह दुनियां के लिए मिसाल बनी हैं. आजादी के बाद की इस यात्रा में तमाम विपरीत हालातों को झेलते, विभाजन के कष्ट को सहकर भी जिस दृढ इच्छा शक्ति से प्रगति की हैं उसी का ही नतीजा हैं कि आज आपकी संताने सम्रद्धि के गीत गा रही हैं.

आपका व्यक्तित्व इतना विकराल है कि आपके जन्म से अब तक की यात्रा को जानते समझते एक जीवन भी पर्याप्त नहीं हैं. आपने बहुत कुछ पाया और खोया भी. कई गलतियाँ भी की. कई गद्दारों को पनाह भी दी और आज भी ऐसा लगता हैं कि आपका खाने वाले आपकी ही थाली में छेद कर रहे हैं. मगर आप निश्चित रहे एक मित्र पुत्र होने के नाते जीवन की अंतिम सांस तक आपके साथ दुबारा वह कभी गलती नहीं होगी, जो अतीत के पन्नों में हमनें पढ़ी हैं.

मुझे भारतीय कहने पर बड़ा गर्व होता हैं इस पत्र के माध्यम से मैं अपनी भावनाएं आपके साथ साझा करना चाहता हूँ, साथ ही आपकों तमाम तत्कालीन उपलब्धियों की सराहना करना चाहता हूँ. जिस तरह से अपनी संतानों को आपने शिक्षित कर साक्षरता दर को 74 प्रतिशत, जीडीपी को 7 प्रतिशत, खुले में शौच मुक्त भारत का निर्माण किया तथा मंगल यान व अन्तरिक्ष में जो उपलब्धियाँ अर्जित की हैं वह सराहनीय है अद्वितीय हैं.

आपके यहाँ से निकले प्रतिभावान लोग आप पूरी दुनियां को चला रहे हैं. आपका ध्वज आप माउंट एवरेस्ट से लेकर चन्द्रमा तथा अब मंगल पर फहरा रहा हैं जिन्हे देखकर आपको भी अपार प्रसन्नता मिली होगी. जिस तरह से आजादी के बाद अपने एक अभिन्न भाग को आपने मुख्यधारा से अलग रखकर गलती की तथा दुश्मनों को आँख उठाने का अवसर दिया, आपके पुत्र ने वह गलती सुधार ली है.

आपने एक ऐसा नेतृत्व दिया है जो न केवल भारतवासियों को भ्रष्टाचार, आतंकवाद, कन्या भ्रूण हत्या, बेरोजगारी, महंगाई से निकालने की क्षमता रखता हैं इसके लिए एक बार फिर आपकों साधुवाद देना चाहूँगा. आपने अब तक कई बार उत्क्रष्ट मार्गदर्शन दिया हैं मगर कई मामलों में आपकी लापरवाही चिंता का विषय हैं तेजी से बढ़ रही आबादी तथा आपके ही घर में पल रहे दुश्मन के प्रति आपकों गम्भीरता से अमल करना चाहिए.

तुम्हारा शुभ चिंतक
राम चौधरी 

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