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जीवन में जल के महत्व पर निबंध | essay on importance of water in our life in hindi

जीवन में जल के महत्व पर निबंध | essay on importance of water in our life in hindi

प्रिय दोस्तों आज हम जीवन में जल के महत्व पर निबंध पढ़ेगे. प्रत्येक सजीव प्राणी के जीवन में जल का बड़ा महत्व हैं. जल की उपयोगिता एवं जीवन के साथ इसके सम्बन्ध से हम इसके महत्व को समझ सकते हैं आज के इस निबंध में हम जल के महत्व को समझने का प्रयास करेगे. हम आशा करते हैं आपकों यह हिंदी निबंध अच्छा लगेगा तथा मददगार साबित होगा.

हम बचपन से ही पढ़ते आए हैं जल ही जीवन का आधार हैं, जल बचाओं, बिन जल सब सून, जल नहीं तो कल नहीं आदि जल आधारित कहावतों को पढ़ा हैं. आज हम जल के महत्व को देखते हुए इन कहावतों की सच्चाई को समझ सकते हैं. एक दिन भी बिना जल के हमारे जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती हैं. हमारे सवेरे की शुरुआत तथा सोने तक जल का निरंतर उपयोग होता हैं.

हमारी पृथ्वी को नीला ग्रह इसलिए भी कहते है क्योंकि इस पर जल उपलब्ध हैं. अन्य समस्त ग्रहों में किसी पर भी जल उपलब्ध नहीं हैं इस कारण वहां जीवन की कोई सम्भावनाएं नहीं हैं. यदि पृथ्वी पर जल खत्म हो जाए तो एक दिन यह भी जीवन विहीन एवं बंजर बन जाएगी. पीने से लेकर शरीर की साफ़ सफाई तथा फसलो की सिंचाई के रूप में हम जल का दैनिक उपभोग करते हैं.

वैज्ञानिक शोधों ने स्पष्ट किया हैं कि मानव बिना जल के मात्र आठ दिन तक ही जीवित रह सकता हैं. अतः यह स्पष्ट हैं जल प्रकृति द्वारा हमें प्रदान किया गया जीवन रक्षक तत्व हैं. अथवा वरदान हैं जब तक पृथ्वी पर जल उपलब्ध रहेगा, हमारी साँसे चलती रहेगी तथा जिस दिन यह समाप्त हो गया अथवा पीने योग्य नहीं रहा जीवन खत्म हो जाएगा.

पृथ्वी पर भूमि से तीन गुना जल हैं मगर इस जल की 97 प्रतिशत मात्रा सागरीय जल के रूप में हैं जो लवणीय है तथा मानव उपयोग हेतु नहीं हैं. मात्र 3 प्रतिशत से भी कम जल जो वर्षा जल, तालाब, नदी, नहर तथा ग्लेशियर के रूप में विद्यमान हैं. इस प्रकार की भविष्यवाणी भी की गई हैं कि यदि तीसरा विश्व युद्ध लड़ा गया तो वह जल को लेकर लड़ा जाएगा, जिसकी स्थतियाँ हमारे आस पास देख सकते हैं.

यदि हमारी धरा पर जल नहीं होगा तो समस्त पेड़ पौधें व जीव जंतु भी समाप्त हो जाएगे, इससे खाद्य संकट भी उत्पन्न हो जाएगा. हमारे जीवन में जल का इतना अधिक महत्व होने के उपरान्त भी हम इसके सदुपयोग नहीं कर रहे हैं. हम अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए जल का दुरूपयोग करते हैं इसे व्यर्थ में बहा देते हैं तथा जलीय स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं जिससे जल प्रदूषण के रूप में हमारे समक्ष भयंकर समस्या उत्पन्न हो गई हैं

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