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क्रोध प्रबंधन पर निबंध Essay on anger management in hindi

क्रोध प्रबंधन पर निबंध Essay on anger management in hindi: नमस्कार दोस्तों आज के निबंध में हम क्रोध पर काबू पाने के विषय पर बता रहे हैं. इस निबंध, स्पीच, अनुच्छेद को आप क्रोध प्रबंधन के रूप में हिंदी में पढ़ सकते हैं. चलिए इस निबंध को आरम्भ करते हैं.

Essay on anger management in hindi

क्रोध का अर्थ - क्रोध या गुस्सा मानव मन की एक भावना हैं. जिन्हें अक्सर अच्छा नहीं माना जाता हैं. जब व्यक्ति क्रोधित होता है तो उस दौरान कई शारीरिक लक्षण प्रतीत होते है यथा ह्रदय गति का बढ़ना, रक्त चाप में वृद्धि, अमूमन क्रोध का जनक भय माना जाता हैं. जब मानव भय पर नियंत्रण करने की कोशिश करता हैं तो वह क्रोध के रूप में प्रकट होता हैं.

क्रोध को कायरता की निशानी भी कहा जाता है, इसे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक भी माना गया हैं. जिन्हें विभिन्न परिस्थितियों में धैर्य एवं साहस की कमी होती है वे क्रोधित होते हैं. यह संताप विकलता की दशा हैं. 

एक क्रुद्ध व्यक्ति के सोचने समझने और विचारने की शक्ति शून्य हो जाती हैं. समाज और दोस्तों के मध्य उसका सम्मान गिर जाता हैं. क्रोध करने का सामान्य सा अर्थ है समाज या परिवार की अवमानना. उनके निर्देश को स्वीकार नहीं करना होता हैं. 

जिन्हें तिरस्कृत एवं हेय माना जाता हैं वे क्रोध को अपना हथियार बना लेते हैं. अपने वजूद को खतरे में पाकर वह समाज तथा अन्य लोगों को यह दिखाना चाहता हैं कि अभी भी उसका अस्तित्व हैं. क्रोध का एक अन्य कारण किसी से अथाह लगाव रखना भी होता हैं.

क्रोध पर नियंत्रण की आवश्यकता: घर ऑफिस अथवा जीवन के किसी भी क्षेत्र में तनाव को नियंत्रित कर अपने धैर्य को बढ़ाने की आवश्यकता होती हैं. अमूमन जब कोई आपके कार्य अथवा योगदान को बौना कर स्वयं उसका श्रेय लेना चाहे ऐसे में क्रोध के भाव आना स्वाभाविक हैं. मगर यह एक सामान्य स्तर से अधिक हो जाए इससे पूर्व उसके प्रबंधन अथवा नियन्त्रण की आवश्यकता हैं.

हमें अपने गुस्से पर काबू पाने के लिए यह समझना जरुरी है कि यह किन कारणों से आता हैं. इस विषय पर हम अपने प्रिय मित्र से अधिक गहनता से समझ सकते हैं. अपने स्वभाव में धैर्य के गुण को अधिक बलवत कर हम गुस्से पर काबू कर सकते हैं. 

क्रोध करने से नुकसान या दुष्प्रभाव: गुस्से को मानव का सबसे बड़ा दुश्मन अथवा शत्रु माना गया हैं. इसे लाभ की बजाय नुकसान सर्वाधिक हैं. क्रोध करने से न केवल सामने वाले के नुकसान की सम्भावना होती है बल्कि इससे आप अपना भी बड़ा नुकसान कर लेते हैं. 

जब शरीर क्रोध के आवेग में काबू हो जाता है तो मनुष्य विचार शून्य हो जाता हैं. उसे कुछ भी सूझता नहीं है जैसे मुह में आया बोल दिया अथवा जो हाथ में आया उसे चला दिया जाता हैं. ऐसे करने से बाद में पछताने के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं लगता हैं. यदि आप क्रोध को नियंत्रित नहीं कर पाते है तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है, यह आपके ब्लड प्रेशर को अधिक करने के साथ ही कई व्याधियों को जन्म भी दे सकता हैं.

कई शोध में यह स्पष्ट हो चूका है कि गुस्सैल स्वभाव के अधिकतर लोगों की म्रत्यु ह्रदय घात के चलते ही होती हैं. जिसका जनक क्रोध ही हैं. व्यक्ति का सिर हमेशा दर्द में रहता हैं. पूरे परिवार के मानसिक स्वास्थ्य पर यह बड़ा असर करता हैं. परिवार में झगड़े तथा अनबन का कारण बनता हैं. लोगों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता हैं. 

क्रोध के कारण: यदि हम इसे गहनता से समझने का प्रयास करे तो क्रोध मनुष्य के भाव की चरम सीमा हैं जब कभी उनकी आवश्यकता पूरी नहीं होती, विश्वास टूटता है अथवा अहंकार को धक्का मिलता है या अपेक्षाओं पर खरा न उतरने के कारण क्रोध का जन्म होता हैं.

इसका कोई भी चरण सहज नहीं हो सकता, क्योंकि यह व्यक्ति के असहज भाव की ही प्रस्तुती हैं, जब उन्हें अपनी अपेक्षाओं के मुताबिक़ परिणाम प्राप्त नहीं होते है तो वह क्रोध के आवेश में आ जाता हैं. यह ज्वालामुखी की तरह अग्नि प्रवाहित करता हैं जिनमें बहुपक्षीय हानियाँ होती हैं.

क्रोध पर नियंत्रण कैसे करें: जैसा कि पूर्व में बताया गया है जहाँ धैर्य का अभाव होता हैं वही क्रोध का निवास होता हैं.  इसलिए अपने स्वभाव में प्रत्येक हालात में धैर्य बनाए रखने का प्रयास करे तो बड़ी आसानी से गुस्से पर काबू पा सकते हैं. इसके अतिरिक्त कुछ अन्य उपाय भी है जिससे हम क्रोध पर नियन्त्रण कर सकते हैं.

गुस्से की स्थिति की आरम्भिक चरण में ही कुछ गहरी साँसे ले और छोड़े अथवा थोडा पानी पीए तो तत्कालीन स्थिति में स्वयं के गुस्से को रोक सकते हैं. रात को पूरी नींद ले. कई बार नींद में खलल या कम नींद के कारण भी स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है और हम छोटी बड़ी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं.

यदि हम पूर्वानुमान के साथ परिस्थतियों के साथ व्यवहार करे तो हम जान सकते है कि अब गुस्सा आने वाला है ऐसे में स्वयं को शांत बनाए अपने मस्तिष्क को कार्यशील रखे तथा मन को यह समझाए कि जो तू सोच रहा है इससे मेरा बड़ा नुकसान होने वाला हैं. मैं तुझे ऐसा नहीं करने दूंगा इसके लिए आपकों हम वक्त अपने गुस्से को चुनौती पेश करनी होगी, तभी हम कारगर रूप से उस पर नियंत्रण पा सकते हैं.

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