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रुपए की आत्मकथा Autobiography Of Rupees In Hindi

 रुपए  की आत्मकथा Autobiography Of Rupees In Hindi 

मैं भारत की राष्ट्रीय मुद्रा रुपया हूं देश में सभी लोगों की स्थिति का निर्धारक में ही हूं मैं ही लोगों के पास रहकर उन्हें इज्जत दिलाता हूं. और जिनके पास में नहीं होता उनको गरीब कहा जाता है तो आज मैं आपको मेरी कहानी मेरी जुबानी बताता हूं
रुपए  की आत्मकथा Autobiography of rupees In Hindi

में भारतीय रूपया हूँ. मुझसे लोग बहुत प्यार करते है. मुझे लोग भगवान के नाम से भी पुकारते है. जैसे- धन की देवी लक्ष्मी तथा कुबेर आदि है. मेरे अलग-अलग देशो में अलग-अलग नाम बनाये गए. जिसमे- रुबल, येन, लारा, मार्क, डालर, पौंड, दीनार, रुपया आदि प्रमुख मुद्रा है।

मुद्रा के रूप में देखा जाए तो मेरी उत्पत्ति सिंधु घाटी सभ्यता से भी पहले हो चुकी थी किंतु इस आत्मकथा में मैं भारतीय रुपया की बात करूंगा रुपया शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द रुप्याह से हुई है जिसका अर्थ संधि होता है रुपया शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग अफगान शासक शेरशाह सूरी ने किया उसने जो सिक्का जारी किया वह चांदी का था कालांतर में मुगल शासकों ने मिश्रित सिक्के जारी किए तथा बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान शुद्ध चांदी के सिक्के जारी किए गए साथ ही नोटों के रूप में भी मेरा प्रचलन बढ़ा

वर्तमान में मैं एक रुपए से लेकर 2000 की नोट तक उपलब्ध हूं हालांकि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री मोदी जी ने 500 तथा 1000 के मेरे प्रचलित रूप को बंद कर दिया था

मेरा प्रतीक चिन्ह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त करने वाला पांचवा स्थान है मेरी प्रतीक सेना को डिजाइन करने का काम आईटीआई गुवाहाटी के प्रोफेसर उदय कुमार ने किया 15 जुलाई 2010 को अंग्रेजी में Re तथा हिंदी में रू के स्थान पर अधिकारिक प्रतीक चिन्ह ₹ को अपना लिया गया है

मुझे छापने तथा नियंत्रण का कार्य भारतीय केंद्रीय बैंक द्वारा किया जाता है मेरे कई नाम है मुझे जारी करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक कई मापदंडों को ध्यान में रखता है तथा राष्ट्रीय स्वर्ण भंडार के आधार पर मेरी छफाई की जाती है

अब मैं आपको ले चलता हूं मेरी  खास विशेषताओं पर जिनकी वजह से मैं इतना लोकप्रिय हूं आजकल तो मुझे पाने के लिए लोग ईश्वर को भी भूलने लगे मुझमें एक विशिष्ट आकर्षण की शक्ति है जिससे मैं पुजारी राजनेता महंत प्रशासनिक अधिकारी शिक्षक वकील तथा प्रत्येक व्यक्ति को अपनी और खींच लेता हूं अर्थात में पूरी दुनिया को उंगली पर नचा रहा हूं हर कोई मुझे पाने की तीव्र लालसा में है. 

इस दुनिया का हर इन्सान मेरा दीवाना है. मेरे लिए वह अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार है. मेरी वजह से अपने रिश्तेदारों, दोस्तों, परिवारजनों से भी झगड़ जाते है. मुझे प्राप्त करने के लिए लोग कठोर मेहनत करते है. जब तक में लोगो के पास होता है. तो वहा पर शांति बनी रहती है. मेरी उपस्थिति में लोग बहुत खुशहाल जीवन व्यतीत करते है.  

मेरी उपयोगिता प्रत्येक जगह पर विद्यमान है मैं जहां भी जाता हूं आशा के दीप जल जाते हैं फूल खिल जाते हैं अंधकार में भी उजाला हो जाता है चाहे राजा हो या गरीब विद्यार्थी हो या सेठ साहूकार भोगी हो या योगी हो सबके जीवन में खुशियां मेरे माध्यम से ही पहुंचती है.

मैं सभी के लिए जीवन हूं जीवन का आधार भी हूं और संपूर्ण जीवन भी हकीकत यह है कि मैं एक साधन हूं साधन विनिमय का परंतु लोगों ने मुझे साध्य बना लिया है उनका में सर्वोच्च लक्ष्य बन गया हूं भले ही आप डॉक्टर इंजीनियर वकील शिक्षक राजनेता अभिनेता मजदूर किसान विद्यार्थी लिपिक व्यापारी ड्राइवर उद्योगपति खिलाड़ी किसी से भी एक प्रश्न पूछिए कि आपके जीवन का क्या लक्ष्य है सभी का जवाब एक ही होगा खूब सारा पैसा कमाना क्योंकि पैसों से ही राजनेता दलाली घोटाले इत्यादि होते हैं

लोग मुझे भ्रष्टाचार का आधार मानते हैं परंतु मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि मैं जरूर भ्रष्टाचार का कारण हूं परंतु भ्रष्टाचार के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराना उसी प्रकार गलत है जिस प्रकार दिन में दीपक को जलाकर उससे  सूर्य से ज्यादा रोशनी  की अपेक्षा करना अर्थात भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार मनुष्य स्वयं है वही देता है. 

और वही लेता है मैं तो उनके हाथों की कठपुतली मात्र हूं मेरा प्रयोग शक्तिशाली लोग गलत कामों में भी करते हैं पर इसमें मेरा क्या दोष मैं इसमें क्या कर सकता हूं जब मैं कमजोर लोगों के पास से छीना जाता हूं और शोषक लोगों के पास जाता हूं तो मुझे भी दर्द होता है परंतु मैं व्यक्त नहीं कर पाता और तिजोरिओं में कैद होकर रह जाता हूं और करता भी क्या पैर जो नहीं है

ज्ञान के बारे में उक्ति प्रसिद्ध है बांटे त्यो बढ़तो जाय꫰ परंतु मेरे संदर्भ में यह उक्ति उल्टी प्रतीत होती है क्योंकि मुझे खर्च करने पर मैं वापस नहीं जाता और जो लोग मेरा उपयोग धन को बढ़ाने के लिए करते हैं उनके पास में बढ़ता ही जाता हूं

वर्तमान के दौर में मुझे पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति तरसता है सब के सपनों में मैं आता हूं उनकी नींद को चुराता  हूं उन्हें सहन से सोने नहीं देता हूं मुझे पाने के लिए लोग अवैध कार्य भी करने से नहीं चूकते रिश्वत हो या जमाखोरी या फिर अवैध सामानों की बिक्री हो सबका लक्ष्य मुझे अधिक मात्रा में इकट्ठा करना होता है लोग कर चोरी कर मुझे बचाने का प्रयास करके देश को बड़ी मात्रा में नुकसान तक पहुंचा देते हैं

कहानी के अंत में मैं आपको कुछ नसीहतें दूंगा पहली नसीहत यह दूंगा कि मुझे एकत्र करने के प्रयासों में अंधे होने की कोई आवश्यकता नहीं है अर्थात अवैध मार्ग पर चलकर एकत्र किया हुआ धन सुख की नींद सोने नहीं देगा
दूसरी बात मैं यह कहूंगा कि मेरा उपयोग समझदारी के साथ करने से लाभ होगा थोड़ी सी भी चूक आपको हानि पहुंचाएगी

तीसरी नसीहत यह है कि मुझे बुरे समय के लिए भी बचा कर रखें पता नहीं कब मेरी आवश्यकता पड़ जाए इसलिए व्यर्थ की वस्तुएं खरीदने से बसें अगर संभव हो सके वहां तक मुझे साधन मानकर मेरा उपयोग करें साध्य मानकर नहीं यदि मेरा सुदपयोग किया जाए. तो मै आपका साथी बन जाता हूँ.

आपके पास इतनी मात्रा में एकत्रित हो जाता हूं. कि आपकी बेचैनी की वजह बन जाऊं तो कृपया करके जरूरतमंद लोगों तक मुझे पहुंचाएं. जहा मुझे सम्मान भी मिले तथा उनकी जरुरत पूर्ण हो सकें. 

मानवता से ऊपर मेरा स्थान नहीं हो सकता इसलिए मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर मेरा उपयोग करें. 
अगर मेरा सही ढंग से प्रयोग किया जाए तो प्रत्येक व्यक्ति परिवार समाज तथा देश की उन्नति होगी. मेरे दुरपयोग करके आप अपना ही नुकसान कर रहे . मै उन लोगो  पास नहीं जाना चाहता जो मेरा अपमान करते या दुरपयोग करके किसी को कष्ट पहुचाते है.

मै गरीब तथा निर्धन लोगो के पास रहना चाहता हूँ. गरीब घर में मुझे बहुत ज्यादा प्यार, सम्मान तथा सुरक्षा मिलती है. इनके घरो में ही सबसे ज्यादा मुझे इज्जत मिलती है. जिससे में खुद को गर्वांवित मनाता हूँ.

उम्मीद करता हूँ। दोस्तों आज का हमारा रुपए  की आत्मकथा Autobiography of rupees In Hindi  यह लेख आपकों पसंद आया होगा। यदि आपकों बचपन बारे में निबंध स्पीच पैराग्राफ अनुच्छेद भाषण में दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।