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अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर निबंध Essay on International Literacy Day in Hindi

अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस-आज के इस वैज्ञानिक युग में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है.शिक्षा के आभाव में व्यक्ति का कोई महत्व नहीं है.हमारे जीवन को सुखी बनाने तथा देश की तरक्की के लिए सर्व शिक्षा का होना जरुरी है.आज के इस आर्टिकल में हम अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस/विश्व साक्षरता दिवस पर निबंध,लेख,पैराग्राफ तथा स्पीच लेकर आए है.इस आर्टिकल में साक्षरता दिवस के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे.

 अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर निबंध Essay on International Literacy Day in Hindi

अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर निबंध Essay on International Literacy Day in Hindi
हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग शिक्षा है.शिक्षा हमारे जीवन का बेहतर ढंग से संचालन करती है.सरकार शिक्षा के लिए अनेक प्रयास कर रही है.जब तक देश नागरिक शिक्षित नहीं होंगे देश उन्नति नहीं कर सकता है.

देश के विकाश में शिक्षा एक महत्वपूर्ण साधन है.इसलिए सरकार कई प्रयास कर रही है.पर लोग आज भी शिक्षा के प्रति जागरूक नहीं है. शिक्षा के महत्व तथा इसके लिए जागरूकता फ़ैलाने के लिए 8 सितम्बर को अन्तराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है.

प्रथम बार साक्षरता दिवस 8 सितम्बर 1965 को मनाया गया था.जिसके बाद से हम हर साल इसे मनाते आ रहे है. इस दिवस का मुख्य उद्देश्य देश के सभी नागरिको को साक्षर बनाना है.

वैसे शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना तथा शिक्षा प्राप्त करना आवश्यक है.पर साक्षरता दिवस के रूप में के विशेष दिवस मनाया जाता है.इसलिए हमें इस दिवस का सम्मान करते हुए.

शिक्षा के इस हथियार को अपनाकर अपने जीवन को संवारा जा सकता है. साक्षरता दिवस को वैश्विक स्तर पर पर मनाया जाता है.इस दिवस की पुरे विश्व को जरुरत है.एक आंकड़ा देखा जाए तो हमारे पुरे विश्व में 20 प्रतिशत लोग अनपढ़ है.

इससे हम अनुमान लगा सकते है.कि हमें साक्षर होना कितना आवश्यक है.तथा महिलाओ की साक्षरता पर नजर डाली जाए तो दो तिहाई महिलाए अनपढ़ है.इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य युवा तथा नवजागृति को शिक्षित बनाना है.

तात्पर्य- साक्षरता का मतलब सिर्फ ज्ञान की प्राप्ति कर नौकरी लगना नहीं है.साक्षरता का तात्पर्य हमारे जीवन में समान अवसर प्राप्त करने तथा जीवन में विकास से जुड़ा हुआ है.

शिक्षा जीवन को अच्छे ढंग से जीने का सलीका होती है.शिक्षा प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति सरकारी कर्मचारी बने या नौकर बने ये जरुरी नहीं है.पर जो व्यक्ति शिक्षा से निपुण है.वह आज के समय में सबसे महान व्यक्ति है.

शिक्षित व्यक्ति शिक्षा के महत्व के बारे में समझता है.तथा आज के अनपढ़ लोग देश के नियम कानून कायदों तथा जागरूक होने के बारे में समझते ही नहीं है.

इसी कारण आज हमारा देश पिछड़ा हुआ देश है.कनाडा अमेरिका तथा जापान जैसे देश अपनी शिक्षा के बल पर दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश है.आज हमारे देश को भी शिक्षा की जरुरत है.

देश की आर्थिक स्थिति तथा देश के विकास के लिए सबसे बड़ी समस्या अशिक्षित लोग बन रहे है.अशिक्षित लोग शिक्षा से ही वंचित नहीं रहते बल्कि वे अपने जीवन की हर उपलब्धि से पीछे रह जाते है.हमारे देश में गरीबी का कारण शिक्षा का अभाव ही है गरीबी देश के विकास में भी बाधा बन रही है.

उद्देश्य- हमारे देश में अधिकांश युवा तथा युवतिया ऐसी है.जो शिक्षा से वंचित है.इस दिवस का मुख्य उद्देश्य देश के युवा तथा नव पीढ़ी को शिक्षा से अवागत करवाना है.

शिक्षा के महत्व को दर्शाने तथा शिक्षा की जागरूकता फ़ैलाने के लिए विश्व साक्षरता दिवस प्रमुख दिवस है.इस दिवस से हमारे देश को काफी फायदा भी हुआ है.

पर महिला शिक्षा को आज भी महत्व नहीं दिया जा रहा है.इसलिए 50 फीसदी महिलाए अनपढ़ है.यही हमारे देश की गरीबी का कारण है.अशिक्षित महिला आज हमारे लिए एक चिंता का विषय है.

इस पर हमें अम्ल करना होगा.तथा महिलाओ के शिक्षा स्तर को मजबूत बनाना होगा.एक महिला शिक्षित होकर तीन घरो को शिक्षित बना सकती है.जबकि पुरुष खुद के एक ही परिवार को इसलिए महिला शिक्षा बेहद जरुरी है.

साक्षरता दिवस के दिन हमें संकल्प लेना होगा.कि हम देश से निरक्षता को भागकर ही संतुष्ट होंगे.तथा सभी को शिक्षा के प्रति जागरूक करना होगा.देश के हर नागरिक को खुद पर जिम्मेदारी लेकर इस कार्य को संपन्न करना होगा.जन-जन की जागरूकता ही निरक्षता को भगाने का प्रमुख साधन है.

शिक्षा का इतिहास

 हमारे देश में शिक्षा प्राचीन काल से चली आ रही है प्राचीन काल में शिक्षा व्यवस्था आज की तरह नहीं थी प्राचीन समय में शिक्षा ऋषि मुनियों द्वारा दी जाती थी तथा वह शिक्षा मौखिक रूप से दी जाती थी क्योंकि उस समय लिखित रूप से शिक्षा प्राप्त करने के संसाधन उपलब्ध नहीं थे।

हमारे देश में शिक्षा का विकास वर्णमाला प्रचलित होने के बाद हुआ वर्णमाला के बाद लोगों ने शिक्षा की ओर अपना ध्यान केंद्रित किया और इसके बाद लोगों ने शिक्षा को मौखिक रूप के साथ-साथ लिखित रूप में भी  प्राप्त करने के लिए प्रावधान किए.

प्राचीन समय में लेखन का कार्य पेड़ के छालों पर लिखा जाता था तथा कई साहित्यकारों ने इस कला से बड़े-बड़े साहित्य उपन्यास लिखने में सफलता प्राप्त की।

शिक्षा का उन्हें ज्यादा प्राचीन नहीं है हमारे देश में शिक्षा का उदय बौद्ध धर्म के उदय के साथ हुआ जैसे-जैसे शिक्षा का प्रचार प्रसार हुआ लोग शिक्षा के लिए प्रेरित हुए।

शिक्षा प्राप्त करने के लिए नालंदा विक्रमशिला तथा तक्षशिला जैसी विश्व प्रसिद्ध संस्थाओं को बनाकर शिक्षा प्रदान की जाती थी इन संस्थाओं के कारण अधिकतर लोग शिक्षा के लिए आते थे। इस प्रकार शिक्षा के उदय तथा विकास में प्राचीन संस्थाओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

शिक्षा का प्रसार

हमारे देश में शिक्षा का प्रचार प्रसार अंग्रेजों के शासनकाल से शुरू हुआ इससे पूर्व में ऋषि मुनियों द्वारा वनों में मौखिक रूप से ज्ञान प्राप्त किया जाता था पर अंग्रेजों के बाद से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव हुआ.

और शिक्षा लिखित रूप से होने लगी। प्राचीन समय में पूरे भारत में नालंदा तक्षशिला तथा विक्रमासिला मात्र तीन ही संस्थाएं थी जहां ज्ञान की प्राप्ति की जाती थी.

आज हमारे देश में हजारों की तादाद में विद्यालय महाविद्यालय का निर्माण किया गया है तथा उच्च शिक्षा दी जाती है। पर लोग शिक्षा की इतनी बेहतर व्यवस्था होने के बाद भी शिक्षा की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

हमारे देश हमारे देश में आज उच्च स्तरीय शिक्षा दी जाती है जिसे प्राप्त कर अपने जीवन को आसान बनाया जा सकता है तथा सभी नागरिक शिक्षा की ओर ध्यान दें तो हमारे देश का विकास संभव है।

आज हमारे देश में गरीबी के कारण कई परिवार ऐसे हैं जो अपने बच्चों कोविद्यालय की शिक्षा प्राप्त कराने के लिए अनुकूल नहीं होते हैं वे अपने परिवार का भरण पोषण भी मुश्किल से कर पाते हैं.

वे अपने परिवार का भरण पोषण भी मुश्किल से कर पाते हैं ऐसे गरीब विद्यार्थियों के लिए भी कई आश्रम तथा निशुल्क शिक्षा के विद्यालयों को खोला गया जहां पर आप निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

हमारे देश में आजादी के बाद से महिला साक्षरता में काफी वृद्धि हुई है पर अभी भी हमें महिला साक्षरता में काफी वृद्धि हुई है पर अभी भी हमें जरूरत है।

आंकड़ों के मुताबिक 1950 में हमारे देश की साक्षरता दर 18% थी जो आज 60 के आंकड़े को पार कर चुके हैं और इस प्रकार अगले कुछ ही सालों में हमारा देश दुनिया का सबसे सेक्सी देश बन जाएगा हमारे देश में केरल एक राज्य जो शत प्रतिशत शिक्षित है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का इतिहास

हर व्यक्ति  अपने जीवन  को सफल बनाने के लिए तैयार रहता है।  पर आज के लोग शिक्षा को समय की बर्बादी मानते  हुए अपने बच्चों को बचपन में शिक्षा से वंचित कर श्रम के लिए भेज देते हैं।

शिक्षा के महत्व तथा शिक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए यू एन ए की संयुक्त राष्ट्र संघ यूनेस्को द्वारा 17 नवंबर 1965 को विश्व साक्षरता दिवस मनाने के लिए प्रयत्न किया इस वर्ष के बाद से हर साल 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। 

इस दिवस का मुख्य जागरूकता को बढ़ाना है। शिक्षित लोग शिक्षा के महत्व को समझते हैं पर जो लोग अशिक्षित होते हैं फोन में शिक्षा के महत्व के बारे में जानकारी का अभाव होता इसलिए वे शिक्षा को ज्यादा महत्व नहीं देते है। इसलिए हमें अशिक्षित लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाकर शिक्षा के प्रति जागरूक करना होगा।

हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की महिलाओ की साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के दिन''साक्षर भारत दिवस'' की शुरुआत की मनमोहन सिंह जी ने महिलाओ की शिक्षा के लिए अहम कदम उठाया जिससे काफी महिलाओ को फायदा भी हुआ.

जब हमारे देश एक तिहाई महिलाए ही शिक्षित थी.तथा आज हमारे देश से ये संख्या 50 के आंकड़े को भी पार कर चुकी है.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का लक्ष्य

साक्षरता दिवस मानाने का प्रमुख लक्ष्य सभी नागरिको को शिक्षा प्रदान कराना है.बच्चो से लेकर बड़ो तक सभी को समान रूप से शिक्षा प्रदान की जाए.देश के प्रत्येक नगरिक को शिक्षा का अधिकार है

तथा सभी को इसका प्रयोग करना चाहिए.सभी को शिक्षित बनाकर अपने-अपने अधिकारों का लाभ प्राप्त किया जाए.तथा अपने कर्तव्यो की पालना की जाए.

इस दिवस से देश के सभी नागरिको को शिक्षित बनाकर उनके जीवन को सम्मान जनक बनाने तथा उनके जीवन की तथा देश की प्रगति के लिए शिक्षा प्राप्त करवाना.

शिक्षा प्राप्त कर लोगो को संस्कारवान बनाया जाए तथा देश की गरीबी और होने वाले सामाजिक अपराधो को कम किया जाए.सभी को शिक्षा प्राप्त करवाकर जीवन को सफल तथा खुशहाल बनाया जाए.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कैसे मनाते है?

साक्षरता दिवस के दिन विद्यालयों तथा कोलेजो में अनेक कार्यक्रम किये जाते है.तथा प्रतियोगिताओ का आयोजन किया जाता है.और लोगो ओ शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाता है.

इस दिन अनेक नई शिक्षा संसधानो की शुरुआत की जाती है.तथा सबसे श्रेष्ठ कार्य करने वाली संस्थाओ को सम्मानित किया जाता है.

इस अवसर पर विद्यालय में बच्चे अपनी-अपनी प्रस्तुति देते है.तथा गुरुजन भाषण देकर इस दिवस की सभी को बधाईयाँ देते है.और शिक्षा के लिए सभी को संकल्प दिलवाते है.

इस अवसर पर सभी अभिभावकों को विद्यालय में बुलाया जाता है.तथा एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है.इस दिन बच्चो द्वारा पुरे गाँव में रैलिय निकाली जाती है.तथा शिक्षा के लिए प्रेरणा देने वाले नारे बोलो जाते है.

इस दिवस के दिन कई समूह में बंटकर लोग घर-घर जाकर सभी को शिक्षा के बारे में बताते है.तथा शिक्षा के लिए प्रेरित करते है.तथा गरीब लोगो को निशुल्क शिक्षा के संस्थाओ में प्रवेश करने के लिए कहते है.

इस प्रकार साक्षरता दिवस को पुरे विश्व में मनाया जाता है.तथा सभी को जिम्मेदारी दी जाती है.कि सभी मिलकर इस वैश्विक समस्या का समाधान करने के लिए आगे आएंगे.तथा सभी को शिक्षा दिलाएँगे.

भारत में साक्षरता के बढ़ते कदम 

आज शिक्षा के बिना व्यक्ति को आसितत्व नहीं है.अशिक्षित व्यक्ति का इस जीवन में कोई महत्व नहीं है.हमारा देश पिछले कई सालो से साक्षरता दर में वृद्धि कर रहा है.

हमारा देश साक्षरता में पुरे विश्व में 168 वें स्थान पर है.हमारे देश में साक्षरता दर में तेजी से वृदि हो रही है.इसके लिए सरकार अनेक योजनाओ का आयोजन कर रही है.भारत सरकार द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चलाए गए अभियान निम्न है.
  • राजीव गांधी साक्षरता मिशन
  • मिड डे मील योजना
  • सर्व शिक्षा अभियान
  • साक्षर भारत अभियान
  • कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना
  • प्रौढ़ शिक्षा योजना
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना
इन योजनाओ के चलते तथा सरकार के नियमित प्रयासों और नागरिको की जागरूकता के चलते हमारे देश में साक्षरता दर में काफी वृदि हुई है.

एक आंकड़े के मुताबिक हमारे देश में 2001 की जनगणना के अनुसार पुरूष साक्षरता 75% पाई गई जो कि 2011 में लम्बी छलांग लगाकर 73% तक पहुँच गई. तथा महिला साक्षरता दर 53% से बढ़कर 60% के आंकड़े को पार कर चूका है.

हम यही उम्मीद करते है.कि इसी प्रकार हमारे देश में साक्षरता दर बढ़ती रहे और इसी के परिणामस्वरूप साक्षरता दर में हमारा देश सबसे श्रेष्ठ देश बनें.साक्षर लोगो की संख्या बढ़ने से ही हमारे देश का विकास संभव है.

पिछले परिणामो में हमें काफी फायदा हुआ है.हमारे देश में कई राज्यों में साक्षर दर शत प्रतिशत रही जिसमे केरल (94%) तथा मिजोरम (91%) दर के साथ श्रेष्ठ साक्षर राज्य रहें.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के दिन हमें सभी लोगो को शिक्षा के लिए प्रेरित करें.तथा जल्द से जल्द देश को इस अन्धकार से दूर भगाए और देश को पूर्ण रूप से शिक्षित बनाकर विकास के पथ पर अग्रसर करें. शिक्षा से हमें सम्मानजनक जीवन जीने को मिलता है इसलिए सभी को पढाएं.और जीवन में उन्नति करें.

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प्रिय दर्शको आज का हमारा लेख  अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर निबंध Essay on International Literacy Day in Hindi आपको पसंद आया होगा.यदि लेख पसंद आया तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें. तथा सभी को शिक्षा से अवागत करवाएं.यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है.