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बाल अधिकार पर निबंध | Essay on Child Rights in Hindi

 बाल अधिकार पर निबंध Essay on Child Rights in Hindi- नमस्कार दोस्तों आज के आर्टिकल में हम बच्चो के अधिकारों के बारे में पढेंगे. आज के इस समाज में बच्चो को अपराधो से बचाने के लिए उनके कुछ विशेष अधिकार है, जो उन्हें दिए गए है.

बाल अधिकार पर निबंध Essay on Child Rights in Hindi


आज के समाज में बच्चो के साथ हो रहे शोषण तथा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भेदभाव किया जा रहा है. जिस कारण बालको को कुछ विशेष अधिकार देने जरुरी है.

बच्चे के लिए सबसे सुनहरा जीवन बचपन होता है. पर आज की स्वार्थी दुनिया बच्चो के बचपन को छिनकर अपने कार्यो में लगा देती है. इसलिए बच्चो को अपने जीवन में स्वतंत्रता देने के लिए बाल अधिकार बनाए गए है.

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1989 को बाल अधिकार दिवस की शुरुआत की गई. हर साल 20 नवंबर को बाल अधिकार दिवस मनाया जाता है. इस दिवस पर बालको को विशेष अधिकार दिए जाते है.

1989 की सभा में बाल अधिकार बनाए गए तथा बाल अधिकारों में ये अधिकार उन बच्चो को दिए गए जिनकी आयु 18 वर्ष से कम हो. तथा व्यस्क न हो.

भारत में बाल संरक्षण ओर भी महत्वपूर्ण है, क्योकि यहाँ गरीबी के कारण बच्चो से अपने अधिकार छीने जा रहे है. पर भारत में बाल अधिकार के लिए एन.सी.पी.सी.आर आयोग का गठन किया गया है.

बाल अधिकार बच्चो के विकास के लिए महत्वपूर्ण है. बच्चो को आजादी मिलना ही उनके विकास का पहला रास्ता है. जिन बच्चो के पास कोई अधिकार नहीं है, 

वे खुद से आत्मनिर्भर नहीं हो सकते है. बच्चो की शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक विकास के लिए बाल अधिकार महत्वपूर्ण है.

बाल सुरक्षा और बाल अधिकार पर निबंध

बच्चो के जीवन का बुनियादी समय होता है, उनका बचपन. यदि अपने स्वार्थ में बच्चो के इस बुनियादी समय का दुरूपयोग किया जाए तो उनका भविष्य अन्धकार में चला जाएगा.

बालको के साथ हो रहे अत्याचार और बालश्रम के बढ़ते आंकड़े को देखते हुए 1989 में एक सभा में बालक को परिभाषित किया गया जो बच्चा 18 वर्ष की आयु से कम है. अर्थात व्यस्क नहीं है. वह बालक है.

बालक के लिए अलग से अधिकार बनाए गए तथा उन्हें शिक्षा और अपने जीवन जीने के लिए अधिकार दिए. जिन्हें हम बाल अधिकार कहते है. इन्ही अधिकारों से बालको के जीवन के बुनियादी समय का बेहतर प्रयोग किया जा सकता है. 

बाल संरक्षण क्या है?

बालको के बचपन में जोखिम भरे कार्य से सुरक्षा करना तथा उन्हें बच्चों की हिंसा, शोषण, दुर्व्यवहार से सुरक्षा प्रदान करना बाल संरक्षण कहलाता है. इसके लिए सरकार ने कई कानून बनाए है.

गरीबी के कारण लोग अपने बच्चो को छोटी सी आयु में जोखिम भरे काम के लिए भेजते है. इसलिए सरकार ने 6 से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चो को जोखिम भरे कार्य करवाना गैरकानूनी बताया गया है.

इस आयु के बच्चो से भारी कार्य करवाने वालो पर सरकार क़ानूनी करवाई करती है. तथा दोषी को सजा भी देती है. भारतीय सविंधान में 39 घ अनुच्छेद में इसकी पुष्टि की गई है.

बाल अधिकार कितने होते हैं?

बाल सुरक्षा के लिए बालको को विशेष रूप से भारतीय सविंधान अधिकार देती है. जिसे बाल अधिकार कहा जाता है. जिसमे आर्थिक,सामाजिक एवम राजनीतिक अधिकार भी शामिल है.

भारतीय सविंधान के 54 अनुच्छेद में 41 बाल अधिकार दिए गए है. जिन्हें 11 दिसंबर 1992 को भारत द्वारा घोषित किया गया था. बालको के इन अधिकारों से आज के बालक सुरक्षित और शिक्षित हो रहे है.

बच्चों के कौन कौन से अधिकार है?

वैसे पहले हम आपको बता चुके है, कि बालको को सविंधान के द्वारा 41 अधिकार प्राप्त है. जिनमे से प्रमुख अधिकार निम्न है-
  • शिक्षा का अधिकार 14 वर्ष तक निशुल्क शिक्षा का प्रावधान
  • प्रारंभिक बाल्यावस्था में देखभाल एवं विकास हेतु सहायता का अधिकार
  • सामाजिक सुरक्षा का अधिकार
  • अवकाश, मनोरंजन एवं सांस्कृतिक क्रियाकलापों का अधिकार
  • सुरक्षा के अधिकार में सभी प्रकार की स्वतंत्रता सम्मिलित है -
  • शोषण से सुरक्षा का अधिकार
  • अपमान व दुर्व्यवहार से सुरक्षा का अधिकार
  • निर्णय लेने का अधिकार
  • राष्ट्रीयता का अधिकार
  • संगठन बनाने का अधिकार
  • आपदा के समय मदद माँगने का अधिकार
बाल अधिकार की आवश्यकता

भारत एक लोकतंत्र देश है, जहा सभी नागरिको को स्वतंत्रता से रहने का अधिकार है. पर क्या वजह है? जिस कारण भारत के लोगो के लिए बनाए गए मानवाधिकार भी बालको के लिए कम पड़ रहे है. और हमें बाल अधिकार की आवश्यकता पड़ती है.

मानवाधिकार में अधिकतर कानून व्यस्क लोगो के लिए बनाए गए है. पर बच्चो के लिए भी कानून है. लेकिन बच्चो को अपने अधिकार का प्रयोग करने से बाधित किया जा रहा है. जिस कारण भारतीय सविंधान बालको को विशेष अधिकार देती है.

बाल मजदूरी, बाल तस्करी और बाल हिंसा जैसे मामलो की बढती संख्या ने बालको के लिए विशेष कानून के लिए बाध्य कर दिया. आज देश के बालक इन अधिकारों के कारण खुद को सुरक्षित महसूस करते है.

बाल अधिकारों के उद्देश्य
  • अवयस्क बच्चो के समुचित विकास और उनके सामने आ रही बाधाओं से मुक्ति.
  • बच्चो के जीवन की आवश्यकता को अभिभावकों तक पहुँचाना.
  • बालश्रम से हटकर अपने सुनहरे जीवन की नीव रखना.
  • निम्न आर्थिक स्तर के बाआर्थिक रूप से कमजोर लोगो को भी निशुल्क शिक्षा के माध्यम से शिक्षा से जोड़ना.
  • बढ़ते अपराधो से सजग करना. तथा बुराईयों का विरोध करना.
  • बालको के साथ हो रहे अपराधो को रोकना तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान करना.
  • बालको को एक जिम्मेदार नागरिक बनाना.
बालको के साथ हो रहे अपराधो पर मुहीम लगाने के लिए बनाए गए बाल अधिकार नियम से बालको को काफी सुरक्षा मिली है. और बालको को इस सुरक्षा के माध्यम से आज देश का हर बच्चा शिक्षित हो रहा है. तथा अपनी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रहा है.

आज हम सभी को सरकार के द्वारा बनाए गए नियमो के माध्यम से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए. तथा हमें उच्च स्तर की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए. जिससे हम देश के लिए अपना योगदान दें सकें.

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