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भारत की ऋतुएँ पर निबंध | Essay On Seasons in India in Hindi

भारत की ऋतुएँ पर निबंध | Essay On Seasons in India in Hindi- किसी भी एरिये का मौसम और जलवायु उस क्षेत्र की ऋतुओ को निर्धारित करता है, दोस्तों आज के आर्टिकल में हम भारत में बदलती ऋतुओ उनके प्रकार तथा ऋतुओ के चक्र को विस्तार से इस लेख Seasons in India के माध्यम से पढेंगे.

भारत की ऋतुएँ पर निबंध | Essay On Seasons in India in Hindi

भारत की ऋतुएँ पर निबंध | Essay On Seasons in India in Hindi
हमारे देश में समय-समय पर अनेक प्रकार की ऋतु बदलती रहती है हर 2 महीने के समय अंतराल में ऋतु परिवर्तन होता है जिसका कारण मानसून की हवाओं पर निर्भरता का होना है। भारतीय रितु को छह काल खंडों में बांटा गया है। 

ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर और वसंत

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती जिसके परिणाम स्वरूप हमें ऋतु में परिवर्तन नजर आता है हमें गर्मी सर्दी और वर्षा का अनुभव होता है पर कई सालों से चले आ रहे इस चक्र के कारण ही हम इसे सहन करने में सक्षम होते हैं। यह प्रक्रिया बन चुकी है जो हमारे लिए सहनशील बन चुकी है।


मई और जून में सर्वाधिक गर्मी तथा फरवरी जनवरी के माह में अत्यधिक ठंड रहती है वही अगस्त सितंबर में बारिश होती है। ऋतु में परिवर्तन प्रकृति का नियम है जो कई दशकों से चला आ रहा है। इससे मानव सहित सभी प्रजातियां प्रभावित होती है। 

निबंध 2 

भारत विविधता पूर्ण विश्व का सबसे सुंदर देश है। इसकी सुंदरता की प्रमुख भौगोलिक विविधता तथा प्राकृतिक सौंदर्य के साथ जंतुओं में होने वाला परिवर्तन है। 

पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है और सूर्य की परिक्रमा है जिसके कारण उष्णकटिबंधीय देशों में 1 वर्ष में छह बार ऋतु परिवर्तन की परिघटना प्रदर्शित होती है जो यहां के वातावरण ,जलवायु तथा सुंदरता में चार चांद लगा देती है।

भारत में ऋतु चक्र का वर्णन

ग्रीष्म ऋतु :~ हिंदू धर्म में विक्रम संवत के अनुसार वर्ष का आरंभ  चैत्र माह से होता है। इसी पंचांग के आधार पर भारत में ग्रीष्म ऋतु  का आरंभ  चैत्र प्रतिपदा एकम अर्थात मार्च जून के महीने में हो जाता है। 

शुरुआती दौर में जहां सर्दी के बाद गर्म और तेज हवाओं से आनंद की प्राप्ति होती है परंतु गर्मी बढ़ने के साथ असहनीय हवाएं चलती है। जिसके कारण मई तथा जून माह में विद्यालयों तथा कॉलेज में अवकाश घोषित कर दिए जाते हैं। गर्मी के दिनों में हिमालय ठंडे प्रदेशों तथा राजस्थान में माउंट आबू जैसे ठंडे प्रदेशों में घूमने और पिकनिक का आनंद उठाने लायक होता है।

वर्षा ऋतु

गरम तथा तेज हवाओं की समाप्ति के बाद मानसून के आगमन के साथ ही वर्षा ऋतु का आरंभ हो जाता है। यह विक्रम संवत के अनुसार आषाढ़ तथा श्रावण मास में होता है अर्थात जुलाई माह। 

गर्मियों के मौसम में तालाब जिले तथा अन्य जल स्रोत सूख जाते हैं जिनमें वर्षा होने से जल की प्राप्ति होने लगती है जिससे चारों ओर हरियाली छा जाती है तथा बहुत ही मनोहर से नजर आता है।

शरद ऋतु
        
 इस ऋतु में आसमान नीला और साफ दिखाई देता है यह फल फूलों के पकने की ऋतु मानी जाती है इस ऋतु के साथ ही किसानों की फसल पैदा होने शुरू हो जाती है। इस ऋतु को शरद सुंदरी कहा जाता है  इस ऋतु के दौरान छोटे पौधों और खास पर ओस की बूंदे दिखाई देती है जिनका दृश्य अपने आंखों म मनोहारी और   उत्कृष्ट होता है।

हेमंत ऋतु

हेमंत ऋतु यह वह समय होता है जब बारिश की ऋतु समाप्त हो जाती है तथा सर्दी ऋतु से पूर्व का समय जहां इस समय को पर्यटन की दृष्टि से योग्य मौसम माना जाता है। इसे हेमंत ऋतु नाम दिया जाता है। 

शिशिर ऋतु/ शीत ऋतु

शीत ऋतु यानी ठंड का मौसम यह मौसम जनवरी-फरवरी के माह में अपने चरम पर होता है इस समय अत्यधिक ठंड देखने को मिलती है तथा भारत के उत्तरी राज्यों में इसी समय बर्फ जमने लगती है इस ऋतु के दौरान कई दिनों तक धूप देख नहीं पाती है तथा सुबह के समय धुंध देखने को मिलती है।

ठंड और धुंध का मुख्य कारण सूर्य के द्वारा उत्तरी गोलार्ध से दक्षिणी गोलार्ध की ओर गति होती है। इस मौसम में सामान्य तापमान 10 डिग्री तक चला जाता है वही देश के उत्तरी राज्यों में तापमान जीरो डिग्री से भी नीचे चला जाता है।

वसंत ऋतु

दोनों के चक्र में बसंत रितु को अंतिम ऋतु माना जाता है इसके बाद चक्र पुनः शुरू होता है। इस रितु को रितु का राजा तथा वसंत दूध के नाम से जाना जाता है यह मौसम ना तो ज्यादा गर्मी का होता है और ना ही ज्यादा ठंड का इस मौसम में पत्ते झड़ जाते हैं तथा नए पत्ते पनपने लगते हैं। प्रकृति का सबसे सुंदर दृश्य इसी ऋतु में देखने को मिलता है। इस ऋतु के दौरान पेड़ पौधे नए आवरण ग्रहण करते हैं। 

निष्कर्ष 

हर ऋतु अपने अपने प्रभाव डालती है जो प्रकृति के लिए एक नियम सा बन चुका है एक समय के बाद एक ऋतु का बदलना तथा नई ऋतु का आगमन और उनकी परिस्थितियों को नियंत्रित करते हुए रहने की सहनशीलता सभी जीवो में उत्पन्न हो चुकी है।

निबंध 3

हमारे देश में मानसूनी प्रकार की जलवायु रहती है मानसून एक अरबी भाषा का शब्द मशीन से बना है जिसका अर्थ होता है हवा की दिशा में मौसम का परिवर्तन हमारे यहां मौसम परिवर्तन का मुख्य कारण हवाओं की दिशा है जो समय समय पर बदलती रहती है जिसके कारण मौसम में भी बदलाव देखने को मिलता है.

भारतीय मौसम को अरब सागर से आने वाली हवा और बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवा प्रभावित करती है भारतीय मौसम विज्ञान के द्वारा भारतीय जलवायु को चार प्रकार की ऋतु में बांटा गया है जिसमें शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा तथा शरद ऋतु में बांटा गया है।

शीत ऋतु

शीत ऋतु की भारत में शुरुआत दिसंबर माह के मध्य से होती है जो मार्च महीने तक चलती है शीत ऋतु में तापमान बहुत कम रहता है इस ऋतु में तटीय औसत तापमान 24 डिग्री तक रहता है उत्तरी मैदानों में यह तापमान घटकर 10 से 15 सेल्सियस तक ही रहता है। शीत ऋतु के मौसम में दिन गर्म तथा रातें ठंडी होती है शीत ऋतु में उत्तरी भारत में कोहरा और बर्फबारी होती है। 

इस मौसम में देश में उत्तरी पूर्वी व्यापारिक पवने चलती है यह पानी जमीन स्तर से समुद्र की ओर गति करती है इसलिए देश के ज्यादातर हिस्सों के लिए यह शुष्क मौसम प्रदान करती है इन हवाओं के द्वारा ही भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में शीत ऋतु के मौसम में बरसात होती है। 

शीत ऋतु के मौसम में सामान्य बादल सांप रहते हैं तथा कम तापमान के साथ आर्द हवाएं चलती है। निम्न दाब के द्वारा पश्चिमी एशिया के ऊपर चलने वाली हवाएं भारत के उत्तरी मैदान  मैं शीत ऋतु में वर्षा का कारण बनते हैं। इसी के कारण पहाड़ों पर बर्फबारी होती है वास्तव में भारत के उत्तरी क्षेत्र की तुलना में दक्षिणी प्रायद्वीप में लाखों में शीत ऋतु के दौरान समुद्र से अनेक प्रकार के दुष्प्रभाव सामने आते है।

ग्रीष्म ऋतु

ग्रीष्म ऋतु यानी गर्मी ऋतु यह मार्च माह से जून जुलाई माह तक चलती है इसके दौरान अत्यधिक गर्मी रहती है इस समय ग्रीष्म सक्रांति के कारण संपूर्ण देश भर में तापमान में अत्यधिक बढ़ोतरी देखने को मिलती है.

इस मानसून में भारत के उत्तर और उत्तर पश्चिम क्षेत्रों में बेहद गर्म और तेज हवाएं बहती है जिन्हें हम सामान्य भाषा में लू के नाम से जानते हैं। ग्रीष्म ऋतु के दौरान पश्चिमी क्षेत्रों में 40 डिग्री तक का तापमान रहता है वहीं उत्तरी क्षेत्र कश्मीर लद्दाख क्षेत्रों में तापमान अधिक रहता है तथा इस समय बर्फ पिघलती है। 

मौसम के दौरान अनेक प्रकार के चक्रवात ओं का सामना करना पड़ता है चक्रवात ओं में बेहद तेज हवाएं बहती है तथा कई बार यह हवाएं बारिश का कारण भी बन जाती है। चक्रवात की वजह से भारी बारिश के साथ ही ओलावृष्टि होती है। ग्रीष्म ऋतु में देश में होने वाली बारिश को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से जानते हैं।

भारत की पूर्वी क्षेत्रों में चक्रवात ओं के द्वारा होने वाली वर्षा को नॉर्वेस्टर नाम से जाना जाता है यह वर्षा चाय और चावल की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। यह बारिश भारत के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल बिहार झारखंड उड़ीसा जैसे राज्यों में लाभदायक साबित होती है।

ग्रीष्म ऋतु के दौरान मौसम पूर्व होने वाली चेरी ब्लॉसम वर्षा भारत के दक्षिणी राज्य केरल और कर्नाटक में होती है यह वर्षा कॉफी की फसल के लिए उपयुक्त मानी गई है यह वर्षा भी चक्रवात के द्वारा ही होती है।

दक्षिण भारत में आम की फसल के लिए उपयुक्त माने जाने वाली वर्षा को आम्र वर्षा कहा जाता है जो आम को पकाने के लिए उपयोगी मानी गई है यह फसल भारत के दक्षिणी राज्य गोवा में होती है। 

भारत के पूर्वी राज्य असम में मानसून पूर्व होने वाली वर्षा को बोर्डो चिल्ला नाम से जाना जाता है यह वर्षा को सामान्य भाषा में नॉर्वेस्टर कहा जाता है। 

वर्षा ऋतु 

वर्षा ऋतु हमारे देश में जो जुलाई से लेकर सितंबर के महीने तक रहती है और इस मौसम में होने वाली वर्षा दक्षिण पश्चिम मानसून के द्वारा हमारे देश में प्रवेश करती है इस मौसम के दौरान भारत के उत्तरी इलाकों में निम्न दाब क्षेत्र निर्मित होता है.

जो दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पौधों को अपनी ओर अग्रेषित करता है दक्षिणी गोलार्ध कि दक्षिणी पूर्वी पौधों को भूमध्य रेखा को पार कर देती है और दक्षिण पश्चिम की दिशा में बहती हुई भारतीय उपमहाद्वीप में दक्षिण पश्चिम मानसून के रूप में आती है दक्षिण पश्चिम मानसून आने से देश में मौसम परिवर्तन हो जाता है। 

हमारे देश में वर्षा दो प्रकार के मानसून ओं के द्वारा होती है जिसमें अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा के माध्यम से बारिश होती है। 

अरब सागर की शाखा भारत की उत्तरी पश्चिमी भाग के राज्यों में बारिश करती है जिसमें गुजरात महाराष्ट्र पश्चिमी घाट क्षेत्र तथा मध्य प्रदेश में बारिश करती है यह राजस्थान से होकर भी गुजरती है पर यहां बारिश नहीं होती क्योंकि इसका मुख्य कारण यहां की अरावली श्रंखला की समांतर बैठी हवाएं जो यहां बारिश करने की बीच में बाधा बनती है।

अरब सागर शाखा कई बार जम्मू-कश्मीर में भी बारिश का कारण बनती है जब अरब सागर शाखा की बारिश हिमालय पर्वत से होकर गुजरती है तो यह जब टकराती है तो देश के उत्तरी राज्य जम्मू-कश्मीर हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में बारिश का कारण बनती है।

बंगाल की खाड़ी भारत के उत्तरी पूर्वी क्षेत्र में बारिश का कारण बनती है और यह वर्षा एक चक्र के रूप में देश के पूर्वी राज्य बिहार उत्तर प्रदेश हरियाणा पंजाब और राजस्थान में बरसते हुए अरब सागर में मिल जाती है।

वसंत ऋतु

भारत में वसंत ऋतु को सुहावना मौसम माना जाता है प्रकृति में यह मौसम सबसे सक्रिय मौसम माना जाता है इस मौसम के दौरान पेड़ पौधे अपनी पुरानी पतियों को छोड़कर नई पत्तियां धारण कर देते हैं। वसंत ऋतु का समय फरवरी से मई के महा तक माना जाता है।

इस मौसम के दौरान प्रकृति में अनेक बदलाव देखने को मिलते है। इस ऋतु को सबसे सुहावनी ऋतु कहा जाता है। वसंत ऋतु का प्राकृतिक दृश्य मनोहर होता है। इस ऋतु के दौरान चारो ओर नए नए फूल लगे होते है। 

Essay on Types of Seasons in India (Hindi)

भारत एक विशाल देश है, यहाँ की जलवायु और मौसम में समय समय पर बदलाव देखने को मिलता रहता है, जिसका मुख्य कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की ओर से बहने वाली मानसूनी पवने तथा देश के गर्म इलाके है. 

हमारे देश में सामान्यतया 6 प्रकार की ऋतुए पायी जाती है, जो हर दो महीने बाद बदल जाती है. यानि दो महीने के बाद मौसम और जलवायु में आपको बदलाव देखने को मिलता है. यहाँ की ऋतुओ में वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, और शीत ऋतु शामिल है, सभी ऋतुओ का अपना अपना महत्व है.

भारत वास्तव में विविधता का ही देश है, यहाँ मौसम भी एक सा नही रहता है. बदलता रहता है. कई ऐसे देश है, जहा अत्यधिक ठण्ड या हमेशा गर्मी का मौसम ही रहता है. पर भारत में ऐसा नही है. यहाँ उष्णकटिबंधीय तथा शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों प्रकार की जलवायु पायी जाती है. 

जहा गर्मी सदी और वर्षा सभी का संगम देखने को भी मिलता है. यहाँ समय पर बारिश हो जाती है, जिससे किसान खेती कर लेते है. तथा सर्दियों में सब्जी की खेती कर ली जाती है. यहाँ की प्रकृति तथा जीव सभी बदलती ऋतुओ को सहन करने में सक्षम है.

भारतीय ऋतुओं के साहित्यिक और पौराणिक नाम Traditional Name of Seasons in India (Hindi)

  1. बसंत ऋतु = चैत, वैशाख
  2. ग्रीष्म ऋतु = ज्येष्ठ, आषाढ़
  3. वर्षा ऋतु = श्रावण, भादों
  4. शरद ऋतु = क्वार, कार्तिक
  5. हेमंत ऋतु = अगहन, पूस
  6. शीत ऋतु = माघ, फाल्गुन

भारत की ऋतुओं के नाम और जानकारी हिन्दी में Indian 6 Types of Seasons Name in Hindi

1. बसंत ऋतु (चैत, वैशाख) Spring Season in Hindi

बंसत ऋतू जिसे हम इंग्लिश भाषा में Spring Season के नाम से जानते है. यह ऋतू सभी ऋतुओ से श्रेष्ठ मानी जाती है. जिस कारण इसे ऋतुओ का राजा का दर्जा दिया जाता है. 

इस ऋतू का मौसम सबसे अच्छा मौसम होता है. क्योकि इस समय ना तो ज्यादा गर्मी पड़ती है, और ना ही ज्यादा ठण्ड इसलिए यह उचित ऋतू मानी गई है. 

इस ऋतू के दौरान प्रकृति सजी धजी दुल्हन की तरह दिखाई पड़ती है. इस ऋतू में चलने वाली सदाबहार ठंडी तथा शुद्ध हवाए मन को शांत कर देती है. यह मनभावन ऋतू है. इस ऋतू की समयावधि में आने वाले मुख्य पर्वो में  मकर संक्रांति, वसंत पंचमी, पोंगल, होली, रामनवमी, आदि है.

2. ग्रीष्म ऋतु (ज्येष्ठ, आषाढ़) Summer Season in Hindi

ग्रीष्म ऋतू यानि गर्मियों का मौसम जिसे इंग्लिश में हम  Summer Season के नाम से जानते है. यह मौसम हमें सबसे अधिक गर्मी और धुप देता है. इस ऋतू के दौरान नदियाँ, तालाब और कुऐ सुख जाते है. 

कई क्षेत्रो में यह वरदान साबित होती है, उत्तरी भारत के राज्यों में इन्ही महीनो में गर्मी से वहा की ठण्ड दूर होती है. वही राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी राज्यों में गर्मी का कहर असहनीय होता है. 

जो लोगो को काफी परेशान करता है. गर्मी से राहत के लिए विद्यालयों में भी बच्चो के लिए छुटिया रखते है. इस ऋतू का अपना महत्व होता है, इस ऋतू में मनाए जाने वाले त्योहारों में महावीर जयंती, बैसाखी, बुद्ध पूर्णिमा, आदि मुख्य त्यौहार शामिल है.

3. वर्षा ऋतु (श्रावण, भादों) Rainy Season in Hindi

वर्षा ऋतू यानी बारिश का मौसम इसे हम इंग्लिश में Rainy Season कहते है. इस मौसम में बारिश ही बारिश होती है. समय समय पर बारिश देखने को मिलती है. किसानो के लिए सबसे प्रिय ऋतू वर्षा ऋतू को ही माना गया है, क्योकि इसी ऋतू में किसान अपनी खेती करते है. 

भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का मुख्य योगदान रहता है, जिस कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को वर्षा ऋतू का जुआ कहते है, क्योकि इसी पर किसान खेती के लिए निर्भर रहते है. तथा अर्थव्यवस्था कृषि पर. इस ऋतू में हमेशा काले बादल मंडराए रहते है. 

हर बारिश किसानो को एक नई उम्मीद देती है. एक नियमित तथा संतुलित बरसात की हमेशा एक किसान चाह रखता है, जो उसकी फसल के लिए उपयोगी साबित हो. 

कई बार प्राकृतिक प्रकोप के कारण अकाल तथा सूखे की स्थिति बनती है, तो कई बार अतिवृष्टि की आपदा भी बनती है. वैसे इस ऋतू का हर दिन किसानो के लिए त्यौहार सा ही होता है, पर ऋतू के दौरान आने वाले त्योहार रक्षाबंधन, गुरु पूर्णिमा, जन्माष्टमी, आदि प्रमुख है. 

4. शरद ऋतु (क्वार, कार्तिक) Autumn Season in Hindi

शरद यानी क्वार, कार्तिक जिसे इंग्लिश में हम Autumn Season कहते है. इस ऋतू में किसानो के लिए चावल की फसल तथा सब्जिया होती है. इस ऋतू के दौरान आने वाले त्योहार  दशहरा, नवरात्री, आदि प्रमुख है.

यह ऋतू वर्षा ऋतू के बाद तथा हेमंत ऋतू से पूर्व की ऋतू है. यह अगस्त सितम्बर माह में आती है. इस दौरान हल्की ठण्ड तथा धूप दिखती है. इस समय कभी कभी वर्षा भी देखने को मिलती है.

5. हेमंत ऋतु (अगहन, पूस) Pre-winter Season in Hindi

हेमंत ऋतू शीत ऋतू से पूर्व का मौसम होता है, इसे हम इंग्लिश में Pre-winter Season के नाम से जानते है. इस मौसम में साफ़ और स्पष्ट बदल दिखाई पड़ते है. हलकी ठंड के साथ ही हल्की धूप भी देखने को मिलती है. यह फलो और सब्जियों का मौसम होता है. 

इस ऋतू का सवेरा मोतियों की तरह उजागर होता है. इस ऋतू को हम किसानो की फसल भण्डारण का समय मानते है. इस ऋतू के दौरान आने वाले त्योहारों में  दिवाली, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा, भैया दूज, गुरु नानक जयंती, आदि प्रमुख है.

6. शीत ऋतु (माघ, फाल्गुन) Winter Season in Hindi

शीत ऋतू यानि सर्दी का मौसम यह ऋतू बारिश के बाद के ठंडे दिनों वाली ऋतू है, जहा तेज ठण्ड पड़ती है, लम्बी रातो में ठंड का अनुभव रोचक होता है. आसमान स्पष्ट दिखाई देता है. कई बार इस मौसम में भी नमी के कारण बारिश हो जाती है, जिसे हम मावट वर्षा के नाम से जानते है. 

यह अपने ठंडेपन के लिए प्रसिद्ध है. दिन छोटे तथा कम तापमान और धूप का लगभग अभाव सा रहता है. कश्मीर, लद्दाख के क्षेत्र में बर्फ जमने लगती है. इस ऋतू के दौरान आने वाले त्योहारों में क्रिसमस और नव वर्ष आदि प्रमुख है.

निष्कर्ष Conclusion

भारत में समय समय पर अनेक ऋतुए आती है, जो सभी को अलग अलग लाभ देती है. कई लोग गर्मी को अच्छी बताते है, तो कई शीत को तो किसान वर्षा ऋतू को अपनी सबसे अच्छी ऋतू मानते है. बदलती ऋतुओ के साथ साथ परस्थितियो में और मौसम में भी बदलाव देखने को मिलता है.

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