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चंद्रयान-3 पर निबंध | Essay on Chandrayaan 3 in Hindi

चंद्रयान-3 पर निबंध | Essay on Chandrayaan 3 in Hindi- नमस्कार दोस्तों हाल ही में इसरो द्वारा 14 जुलाई को चंद्रयान 3 को लॉन्च कर दिया गया, जो चंद्रमा के लिए भारत का तीसरा मिशन था. यह कई दिनों तक पृथ्वी तथा चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के चक्कर लगाने के बाद चंद्रमा की सतह पर उतरेगा.

आज के इस आर्टिकल में हम आपके समक्ष भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान के वैज्ञानिको द्वारा कम समय और कम बजट में तैयार किये गए इस मिशन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी का विस्तार से जानने का प्रयास करेंगे.

चंद्रयान-3 पर निबंध | Essay on Chandrayaan 3 in Hindi

चंद्रयान-3 पर निबंध | Essay on Chandrayaan 3 in Hindi

चंद्रयान 3 भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा तैयार की गई एक योजना है। इसमें चंद्रयान-2 की तरह ही एक कैलेंडर और एक रोवर होगा इसमें ऑर्बिटल को शामिल नहीं किया गया है यह मिशन 4 साल पहले चंद्रयान-2 की असफलता का विकसित किया गया नया रूप है। 

2019 में भेजा गया चंद्रयान-2 मिशन असफल हो जाने के कारण चांद की कक्षा में प्रवेश करवाने के लिए और सक्षम रहा चंद्रयान-2 में मोडिफिकेशन के द्वारा इस बार चंद्रयान-3 बनाया गया है जिसको महज 4 साल की अल्प अवधि में तैयार किया गया है। 

चंद्रयान 3 की लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश राज्य के श्रीहरिकोटा शहर के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। इस मिशन को 14 जुलाई 2023 को शुक्रवार के दिन 2:35 पर सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया गया।

तय समयानुसार चंद्रयान ने चंद्रमा पर लैंडिंग कर दी इसके साथ ही भारत दुनिया का पहला देश बना जिसने चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग की भारतीय चंद्रयान ने वहां अपना रोवर भी उतारकर अपने मिशन को सफल बनाया.

इस यान के प्रेक्षण के साथ ही भारत ने अपने सूर्ययान के मिशन पर जोर दिया है. अब भारत चंद्रमा के साथ ही सूर्य पर भी अपना यान प्रेक्षित करेगा.

चंद्रयान-3 पर 10 पंक्तियाँ (10 Lines on Chandrayaan-3 in Hindi)

1) भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन द्वारा चंद्रमा के लिए शुरू किये गए मिशन का तीसरा प्रक्षेपण किया गया. यह तीसरी यात्रा होगी.

2) इसके पहले चंद्रयान-2 (2019) और चंद्रयान-1 (2008) के बाद चंद्रयान-3 तीसरा चरण  है।

3) चंद्रयान 3 के सफलतापूर्वक चाँद पर उतरते ही भारत दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. जिसने चंद्रमा पर लैंडिंग करने का कार्य किया है. इससे पहले चीन, अमेरिका व रूस इस सूचि में शामिल है.

4) चंद्रयान-3 मिशन को 14 जुलाई 2023 निर्धरित समयनुसार दोपहर 2:35 बजे प्रक्षेपित किया गया है।

5) चंद्रयान-3 मिशन को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा के (SDSC SHAR) से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया ।

6) अल्टीमीटर, वेलोसीमीटर, जड़त्वीय मापन, प्रणोदन प्रणाली, नौवहन, गाइडेंस एंड कंट्रोल, रोवर नीतभार, लैंडर नीतभार, विद्युत उत्पादन तथा प्रोपल्शन मॉड्यूल जैसी सामग्रियों को शामिल किया गया है, जो हर परस्थिति में यान को सुरक्षा प्रदान करेंगे.

7) चंद्रयान ३ को बनाने में कुल लागत करीब 619 करोड़ है।

8) इस मिशन को प्रक्षेपित करने वाला वाहन मार्क 3 (LVM 3) रॉकेट है. जो सफल प्रक्षेपण करेगा. 

9) चंद्रयान-3 मिशन के मुख्य उद्देश्य सतह पर सुरक्षित लैंडिंग करना , रोवर की क्रियाविधि को दिखाना तथा चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिक परीक्षण करना इसके मुख्य उद्देश्य है।

10) चंद्रयान-3 40 दिन के बाद चंद्रमा पर लैंडिंग करेगा, वैज्ञानिको की संभावित दिनांक के अनुसार यह 23 अगस्त या 24 अगस्त को पहुंचेगा.

चंद्रयान का इतिहास 

भारतीय अन्तरिक्ष एजेंसी ने चंद्रमा पर लैंडिंग करने के लिए चंद्रयान कार्यक्रम शुरू किया जिसके दुसरे चरण में एजेंसी को सफलता भी मिली. भारत ने सितम्बर 2019 में अपना दूसरा मिशन  चंद्रयान-2 को प्रक्षेपित किया. जो काफी हद तक सफल रहा. पर सॉफ्ट लैंडिंग नही कर सका.

चंद्रयान के लिए पहला मिशन 22 अगस्त 2008 को भेजा गया. जो (PSLV-C11) यान के द्वारा भेजा गया. जिसने अंतरिक्ष में एक वर्ष तक कार्य करने के बाद टेक्निकल समस्या के कारण संचार खो दिया.

दुसरे मिशन में लॉन्च वाहन मार्क -3 (एलवीएम 3) था, जो एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर से लेस था. इसी मिशन को मॉडिफाई करके मिशन 3 चंद्रयान ३ बनाया गया है. तथा इसे प्रक्षेपित किया गया. इस मिशन की सफलता की आशा हम सब को है.

यह मिशन सफल होने के साथ ही देश  अमेरिका, चीन, और पूर्व सोवियत संघ के बाद दुनिया का चौथा देश तथा एशिया का दूसरा देश बनेगा, जिसने चन्द्रमा पर लैंडिंग करने में सफलता पायी है. 

भारत का मिशन 3 LVM3 M4 रॉकेट से अन्तरिक्ष में भेजा गया है. चंद्रयान 3 को तैयार करने में महज 619 करोड़ की लागत लगी है, जो आज के समय में बहुत कम है. इससे भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी की मेहनत और लग्न का अनुभव लगाया जा सकता है.

यह चंद्रयान अपने गंतव्य तक पहुँचने में 40 दिन का समय लेगा. यह यहाँ से 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया तथा अनुमानित आंकड़ो के अनुसार यह 23 अगस्त को चंद्रमा पर लैंडिंग करेगा. चंद्रयान ३ के द्वारा लिए गए इस समय का कारण पृथ्वी तथा चंद्रमा के चक्कर लगाते हुए जाना है.

चंद्रयान अपने शुरूआती दिनों में पृथ्वी के चक्कर लगाएगा. तथा धीरे धीरे पृथ्वी से दूर जाता हुआ अपने पथ को बढाता हुआ चंद्रमा की ओर गमन करेगा. उसके बाद कई दिनों तक चंद्रमा के चक्कर लगाएगा. तथा फिर अपनी गति को कम कर चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा.

पिछली बार हमारे मिशन के लिए बाधा बनने वाली सभी समस्याओ का सही ढंग से अध्ययन कर उसमे सुधार की गई है. इस बार सफलता के साँस बहुत ज्यादा है. तथा हम सभी यही दुआ करते है. कि हमारा देश इस मिशन में सफल हो.

इस चंद्रयान का मिशन दक्षिणी ध्रुव रहेगा. जहा पिछली बार लैंडिंग से कुछ ही क्षण पहले यान को असफलता का सामान करना पड़ा था. जहा जल की सम्भावना भी है. तथा जीवन्तता की संभवना है. दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करने वाला भारत पहला देश बनेगा. 

सामग्री 

प्रोपल्शन मॉड्यूल :- इस मिशन में काफी बदलाब किये गए है. जिसमे इसका वजन इस बार प्रोपल्शन मॉड्यूल: 2148 किग्रा, लैंडर मॉड्यूल (विक्रम): 26 किग्रा के (प्रज्ञान),रोवर सहित 1752 किग्रा तथा कुल: 3900 किलोग्राम वजन से बना हुआ है. 

विद्युत उत्पादन :- चंद्रयान को नियमित कार्य करने के लिए उर्जा देने के लिए इसके साथ कई प्रकार के मोड्यूल को साथ में शामिल किया गया है, जो इसे बेहतर ढंग से आवश्यकता के अनुसार उर्जा की पूर्ति कर सकें. प्रोपल्शन मॉड्यूल: 758 Wलैंडर मॉड्यूल: 738 W तथा रोवर: 50 W को शामिल किया गया है.

लैंडर नीतभार:-  चंद्रमा पर मौसम और वहां की परिस्थितियों को समझने के लिए कई प्रकार के यंत्रो का इसमें उपयोग किया गया है. परस्थिति के अनुसार इसमे बदलाव संभव है. तापीय चालकता और तापमान का मापन करने के लिएचंद्र सतह तापभौतिकीय प्रयोग (चेस्ट) किया गया है.

भूकम्प जैसे आपदाओं का पता लगाने के लिए लैंडिंग साइट में भूकंपीयता का मापन करने के लिए भूकंपीय गतिविधि सूचक (आईएलएसए) शामिल किया गया है. इसके साथ ही साधनभूत; प्लाज्मा घनत्व तथा विविधताओं को जानने के लिए लैंगमुइर जांच (एलपी) का प्रयोग किया गया है । 

रोवर नीतभार: लैंडिंग साइट के नजदीक मौलिक संरचना की जानकारी को इकठ्ठा करने के लिए अल्फा कण एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) और लेजर प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (एलआईबीएस) को भी शामिल किया गया है । सभी संभवनाओ के अनुसार इस मिशन को तैयार किया गया है.

उद्देश्य

चंद्रयान-3 मिशन के मुख्य उद्देश्य निम्न है-
  • सर्वप्रथम लैंडर की चंद्रमा सतह के सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग करना।
  • यान के द्वारा चंद्रमा पर रोवर की विचरण क्षमताओं का अवलोकन और प्रदर्शन करना ।
  • चंद्रमा का बेहतर ढंग से गहन अध्ययन करना तथा अधिक से अधिक जानकारी जुटाना. जल की खोज करना.
  • चंद्रमा की धरती पर स्थित रासायनिक और प्राकृतिक तत्वों, मिट्टी, पानी आदि पर वैज्ञानिक प्रयोग करना।
चंद्रयान के मिशन में विभिन्न प्रकार के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लैंडर उन्नत प्रौद्योगिकियां स्थित है-
  • अल्टीमीटर: - लेजर तथा आरएफ आधारित अल्टीमीटर शामिल किया गया है. 
  • वेलोसीमीटर :-  लेजर डॉपलर वेलोसीमीटर व लैंडर हॉरिजॉन्टल वेलोसिटी कैमरा जोड़ा गया है.
  • जड़त्वीय मापन:-  लेजर गायरो आधारित जड़त्वीय संदर्भ तथा एक्सेलेरोमीटर पैकेज सम्मलित है.
  • प्रणोदन प्रणाली:-  800N थ्रॉटलेबल लिक्विड इंजन, 58N एटिट्यूड थ्रस्टर्स तथा थ्रॉटलेबल इंजन कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणालियों को शामिल किया गया.
  • नौवहन, गाइडेंस एंड कंट्रोल : - पावर्ड डिसेंट ट्रैजेक्टरी डिजाइन तथा उसके सहयोगी सॉफ्टवेयर तत्व जोड़े गए है.
  • हर परस्थिति का पता लगाकर बचाव के उपाय  :- लैंडर के लिए खतरे की जांच करके पता लगाना और बचाव कैमरा तथा प्रसंस्करण एल्गोरिथम आदि शामिल है. इनके अलावा  लैंडिंग लेग तंत्र भी सम्मलित किया गया है.
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