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विज्ञापन पर निबंध Essay on Advertisement in Hindi

विज्ञापन पर निबंध Essay on Advertisement in Hindi: आज के आर्टिकल में हम विज्ञापन की दुनिया युग के बारें में जानेगे, इस निबंध, भाषण, स्पीच, अनुच्छेद के जरिये समझने का प्रयास करेगे कि हमारे जीवन में इन विज्ञापनों का क्या महत्व और प्रभाव हैं.

Essay on Advertisement in Hindi

आज हम जिस दुनिया में जी रहे है वह विज्ञापन की दुनिया में रसी बसी हैं. आए दिन एक नयें स्वरूप और रोचक अंदाज में विज्ञापन हमारे समक्ष प्रस्तुत करते हैं. आम आदमी के जीवन को इन्होने प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रही हैं. अब तो ऐसे विज्ञापन बैंक भी देने लगे है जब अविवाहित बेटे को भी उसकी माँ से दूर रहने के संदेश दे रहे हैं.

विज्ञापन का सरल सा अर्थ हैं. किसी वस्तु उत्पाद या सेवा के लिए ग्राहकों तक प्रसार करना. सम्बन्धित वस्तु को लोगों के दिलोदिमाग में आकर्षण पैदा करना विज्ञापनो का मूल उद्देश्य होता हैं. आज के दौर में किसी कम्पनी या उत्पाद की गुणवत्ता कितनी ही बेहतर क्यों न हो उसके विक्रय के लिए विज्ञापनों का सहारा लेना ही पड़ता हैं.

हम चाहकर भी विज्ञापनों से मुक्ति नहीं पा सकते हैं. न ही इसके प्रभाव से बच सकते हैं. घर से निकलने के बाद चाहे हम किसी सड़क पर चल रहे हो या भवन में बैठे हो अथवा अपना मोबाइल देख रहे हो, ये विज्ञापन निरंतर हमें घूरते रहते हैं. रात में तो निआन की रोशनी में इनकी चमक दमक हर किसी का ध्यान अपने और आकर्षित कर लेती हैं.

आमतौर पर एक विज्ञापन निर्माण में रचनात्मकता का बड़ा महत्व होता हैं. ऐड में इस तरह के स्लोगन एवं शब्दों का चयन किया जाता हैं, जो मानव मस्तिष्क को आसानी से अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं. पत्र पत्रिकाओं को जब हम खोलते है तो उसके हर पेज के ऊपर नीचे रंगीन और आकर्षक विज्ञापन भरे पड़े होते हैं.

विज्ञापन को हम लुभाने वाली मायावी दुनिया या विधा का उपनाम दे सकते हैं. ये एक आम आदमी की आँख, कान और मस्तिष्क को प्रभावित करते ही हैं साथ ही इसका सबसे व्यापक असर आम आदमी की जेब पर पड़ता हैं. असल में यही उनका उद्देश्य भी होता हैं. एक अनुमान के मुताबिक़ भारत की कुल आय का २ से ३ प्रतिशत भाग केवल इन विज्ञापनों पर खर्च होता हैं. इससे आप अनुमान लगा सकते है कि किसी वस्तु के मूल्य में इजाफा करने वाले कितने कारक हो सकते हैं.

इन विज्ञापन के युग में तेजी से बढ़ती कीमतों पर लगाम लगानी है तो इसके लिए जरुरी हैं हम विज्ञापनों पर होने वाले खर्च को कम करे. उदाहरण के लिए यदि आप कोई ड्रिंक १०० रूपये में खरीदते है तो इसके २०-३० रूपये की अदायगी सीधे तौर पर विज्ञापन दाता कम्पनी को जाती हैं. इस अनुमान के साथ गणित बिठा लीजिए कि विज्ञापन का असर आम आदमी के जीवन पर पड़ रहा है अथवा इसका मूल्य उत्पादक निर्माता चुकाते हैं.

एक तरफ विज्ञापन के खर्च के कारण कई वस्तुओं के दाम कई गुना तक बढ़ जाते हैं इसकी प्रत्यक्ष हानि नागरिकों की होती हैं तो इसका एक बड़ा लाभ भी हैं. प्रतिस्पर्धा बढने से बाजार में एक से अधिक ब्रांड अपनी गुणवत्ता में वृद्धि एवं लागत में कमी भी करते हैं. साथ ही पत्र पत्रिकाएँ, टीवी, इन्टरनेट आदि पर जहाँ विज्ञापन प्रसारित होते हैं. यह उनके कमाई का मुख्य स्रोत होता हैं जिससे वे बेहद अल्प कीमत में भी अपनी सेवाएं देने में समर्थ हो पाते हैं. 

उदाहरण के लिए हमारे घरों में १५ से २० पन्ने का नित्य जो समाचार पत्र आता हैं इसकी एक प्रति के मुद्रित होने में ७ से १० रूपये का खर्च आता हैं. मगर इनकी विज्ञापनों से बड़ी कमाई होने के बाद ये २-३ रूपये में ही इन्हें बेच देते हैं. इस तरह हम कह सकते हैं विज्ञापन से एक तरफ हानि होती हैं तो इसके फायदे भी मिलते हैं.

विज्ञापनों का एक अन्य लाभ यह भी हैं कि अक्सर बड़ी हस्तियाँ जैसे अभिताब बच्चन किसी उत्पाद का विज्ञापन करते है तो उसकी विश्वसनीयता उस उत्पाद से जुड़ जाती हैं. ऐसे में उन्हें अपनी गुणवत्ता को बनाए रखने का दबाव निरंतर बना रहता हैं. क्योंकि यदि किसी अभिनेता अथवा प्रसिद्ध व्यक्ति द्वारा सुझाई वस्तु से किसी को हानि पहुचती है तो उन्हें बड़े अपयश का सामना भी करना पड़ता हैं.

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