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Essay On Reform Movement in Hindi - सुधार आंदोलन पर निबंध

Essay On Reform Movement in Hindi - सुधार आंदोलन पर निबंध: 19 वीं सदी में भारत में पुनर्जागरण में भारतीय समाज के सोशल रिलिजस रिफार्म का आंदोलन चला, जिसे सुधार आंदोलन का नाम दिया गया था, आज के निबंध में हम सुधार आंदोलन क्या था अर्थ कारण प्रभाव व परिणाम को यहाँ समझेगे.

Essay On Reform Movement in Hindi - सुधार आंदोलन पर निबंध

Essay On Reform Movement in Hindi - सुधार आंदोलन पर निबंध
उक्त समाज सुधार आंदोलन का प्रभाव जनमानस पर अत्यधिक हुआ. इन आंदोलनों ने समाज में एक नई चेतना को जन्म दिया. समाज के सामने नया मार्ग प्रशस्त किया. इन आंदोलनों के प्रभाव को निम्नलिखित बिन्दुओं से प्रस्तुत किया जा सकता हैं.

नवीन युग का शुभारम्भ- इन सुधार आंदोलनों के प्रभाव से भारत के प्रत्येक क्षेत्र में सुधार की प्रवृत्ति आरंभ हुई तथा एक नवीन युग का शुभारम्भ हुआ. पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव धीरे धीरे भारतीयों पर होने लगा. भारतीयों में जागृति उत्पन्न हुई.

कुरीतियों और रूढ़ियों का अंत- इन सुधार आंदोलनों के फलस्वरूप हमारे देश व् समाज में व्याप्त भयानक प्रथाओं व रूढ़ियों का अंत हुआ. विधवा विवाह निषेध, सती प्रथा, बाल विवाह जैसी कुरीतियों की धीरे धीरे समाप्ति हुई, लोगों में नवीन चेतना उत्पन्न हुई और रुढ़िवादी विचार धीरे धीरे समाप्त होने लगे.

धार्मिक क्षेत्र में प्रभाव- सामाजिक एवं धार्मिक आंदोलनों के फलस्वरूप हिन्दुओं का अपने धर्म तथा संस्कृति में विश्वास फिर से जागृत हुआ. इन आंदोलनों के द्वारा हिन्दू धर्म के गौरव को पुनः स्थापित किया गया और हिन्दू धर्म में व्याप्त बुराइयों को दूर करने का प्रयास किया गया. स्वामी विवेकानंद ने हिन्दू धर्म के संदेश को अमेरिका तथा यूरोप तक पहुंचा दिया. 

स्वामी दयानन्द ने हिन्दू धर्म के गौरव पर प्रकाश डाला और शुद्धि आंदोलन आरंभ किया. जिसके द्वारा उन लोगों को हिन्दू धर्म में वापिस लिया गया जो प्रलोभन या दवाब द्वारा अपना धर्म छोड़ चुके थे.

शिक्षा के क्षेत्र में प्रभाव- इन आंदोलनों के फलस्वरूप शिक्षा के क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति हुई. धर्म सुधारकों के प्रयास से डी ए वी कॉलेज मुस्लिम कॉलेज, हिन्दू कॉलेज तथा सनातन धर्म कॉलेज आदि शिक्षण संस्थाएं स्थापित हुई. राजा राममोहन राय ने अंग्रेजी शिक्षा पर बल दिया. स्त्री शिक्षा के लिए भी अनेक कॉलेजों एवं स्कूलों की स्थापना की गयी.

साहित्य के क्षेत्र में प्रभाव- सामाजिक एवं धार्मिक आंदोलनों के प्रभाव से संस्कृत के कई ग्रंथों का अनुवाद अंग्रेजी भाषा में हुआ जिससे विदेशियों को हमारे प्राचीन ग्रंथ पढने का अवसर मिला. इन आंदोलनों के फलस्वरूप बंगाली भाषा का अत्यधिक विकास हुआ. इसी प्रकार अन्य प्रांतीय भाषाओं जैसे मराठी, कन्नड़, तेलगु, तमिल आदि का विकास हुआ. इस काल के साहित्य ने जनता में राष्ट्रीय भावनाओं को जागृत करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया.

राष्ट्रीयता की भावना का विकास- धार्मिक और सामाजिक सुधारों के फलस्वरूप राष्ट्रीय एकता की भावना का देशवासियों में विकास हुआ, भारतीय जनता ने संकीर्णता की सीमाओं से निकलकर देश के विषय में विचार करना प्रारम्भ किया. समाज में समानता और स्वतंत्रता का वातावरण उत्पन्न हुआ.

उदार विचारों का उदय- इन सुधारों के परिणामस्वरूप जन जीवन में अंधविश्वास और श्रद्धा का स्थान बुद्धि और तर्क ने लिया. मनुष्य किसी भी बात व सिद्धांत का अंधानुकरण न कर तर्क सहित सोच विचार कर कार्य करने लगे. संकुचित मनोवृति का स्थान उदारता ने ले लिया और स्वतंत्र विचारों ने कट्टरता और शास्त्रों की मान्यता पर विजय प्राप्त की.

निष्कर्ष- इस प्रकार हम देखते हैं कि 19 वीं शताब्दी के विभिन्न धार्मिक सामाजिक आंदोलनों ने भारतीयों की धार्मिक और सामाजिक दशा सुधारने के महान प्रयास किये. इन आंदोलनों से नैतिकता और धर्म के नवीन विचार जागृत हुए, जिससे भावी उन्नति का मार्ग प्रशस्त हुआ. समाज और धर्म दोनों में सुधार होने से नवीन भारत का प्रादुर्भाव हुआ.

भारतीयों ने पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति के अच्छे अंगों को अपनाते हुए अपनी प्राचीन परम्पराओं को परिष्कृत किया. यह वास्तव में नवजागरण का काल था, जिससे लोक धर्म, देश और जाति को नवीन रूप दे रहे थे. भारत में राजनीतिक जागृति और राष्ट्रीय भावना विकसित करने का श्रेय इन्ही आंदोलनों को दिया जाता हैं.
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