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जम्मू कश्मीर और लद्दाख पर निबंध Essay on Jammu Kashmir and Ladakh In Hindi

जम्मू कश्मीर और लद्दाख पर निबंध Essay on Jammu Kashmir and Ladakh In Hindi
भारत का मुखौटा तथा पगड़ी का स्थान रखने वाले जम्मू कश्मीर को धरती का स्वर्ग हिंदू बौद्ध संस्कृति का प्राचीन संगम तथा प्राकृतिक सौंदर्य का पालना मनोहर अद्भुत आकर्षक बर्फ से ढके पहाड़ तथा उनमें लंबी-लंबी घाटियां देवदार तथा चीड़ के वृक्ष एक नई अद्भुत दुनिया का एहसास दिलाते हैं डल तथा मानसर जैसी अविस्मरणीय झीलें पहाड़ों पर चांदी सी चमकती बर्फ की परते वास्तव में स्वर्ग की कल्पना से बढ़कर है.

5 अगस्त 2019 से पहले जम्मू कश्मीर जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख तीन बड़े क्षेत्र सम्मिलित थे 35a तथा अनुच्छेद 370 को हटाने के साथ ही राज्य पुनर्गठन अधिनियम के द्वारा संसद में जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख दोनों को नए केंद्र शासित प्रदेश बना दिए हैं जिसमें जम्मू कश्मीर में विधानसभा होगी.

वर्तमान की परिस्थितियों को समझने के लिए जम्मू कश्मीर के इतिहास को समझने का प्रयास करते हैं जम्मू कश्मीर में सिंधु घाटी सभ्यता के स्थल खोजे गए हैं हमारी ज्ञात इतिहास में सर्वप्रथम यहां मौर्य और कुषाण शासकों के द्वारा शासन किए जाने के प्रमाण मिलते हैं. 

सम्राट अशोक का साम्राज्य कश्मीर तक विस्तृत था  महाभारत काल के  प्रसिद्ध गणपतयार  तथा खीर भवानी मंदिर स्थित है छठी शताब्दी में उज्जैन के प्रसिद्ध शासक विक्रमादित्य  का शासन  कश्मीर तक था उसके उपरांत आठवीं सदी में यहां हिंदू राज्य की स्थापना ललितादित्य मुक्तापीदा ने की कश्मीरी इतिहास की जानकारी के प्रमुख स्रोत कल्हण द्वारा रचित राजतरंगिणी से भी 12वीं शताब्दी तक यहां हिंदू राज्य के होने का पता चलता है
12वीं शताब्दी में मुस्लिम आक्रमणकारियों का आगमन शुरू हो गया था आक्रमणों के अगले क्रम में 1322 में जुल्कादूर खान ने पहली बार मुस्लिम सत्ता की स्थापना करने में सफलता प्राप्त की सऊदी शताब्दी तक आते आते हैं यहां मुस्लिम सत्ता की स्थापना हो गई थी. 

मुगल शासकों के अधीन यहां के शासकों ने शासन किया यहां के प्रमुख शासक जैनुलाब्दीन को कश्मीर का अकबर भी कहा जाता है इसके बाद यहां पंजाब के शासक रणजीत सिंह ने पठानों को हराकर सिख साम्राज्य की स्थापना की.

लाहौर की संधि के द्वारा गुलाब सिंह यहां के स्वतंत्र शासक बने गुलाब सिंह के पुत्र हरी सिंह जो कश्मीर के अंतिम शासक थे उनका शासनकाल 1925 से भारत की स्वतंत्रता तक रहा माउंटबेटन योजना के तहत भारत का विभाजन किया गया तथा भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत भारत का एकीकरण प्रारंभ होता है कश्मीर के शासक हरि सिंह ने तो पाकिस्तान में मिलना चाहते थे और ना ही भारत में वह एक अलग स्वतंत्र राज्य की स्थापना पर बल देते रहे परंतु 1947 -48 में पाकिस्तान के कबीलाई आक्रमण के कारण हरि सिंह ने भारत से सहायता मांगी तब भारतीय सेना ने कश्मीर पहुंचकर कबीलाईयों को खदेड़ा परंतु वर्तमान में पाक अधिकृत कश्मीर वाला क्षेत्र पाकिस्तानी कब्जे में आ चुका था. 

इस तरह जम्मू-कश्मीर प्रांत के तीन भाग हो गए ऊपरी भाग अक्साई चीन पर चीन ने कब्जा कर रखा था वही कश्मीर के उत्तर पश्चिमी भाग अर्थ अर्थ पीओके पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया भारत इन कब्जों को अवैध मानता है जनवरी 1948 में यह मामला शॉप राष्ट्र संघ में भी पहुंचा.

जम्मू कश्मीर के संविधान सभा का गठन व्यस्क मताधिकार के तहत सितंबर 1951 को किया गया इस संविधान सभा ने नवंबर 1956 तक संविधान को तैयार कर दिया तथा सभी जनवरी 1957 को संविधान लागू किया गया संविधान लागू होने के बाद राज्य में पहली बार मार्च 1957 में पहली सरकार शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में बनी
जम्मू कश्मीर की विधायिका को विशेष शक्ति देने वाले अनुच्छेद 35a को 1954 में  राष्ट्रपति आदेश के द्वारा लागू किया गया.

जम्मू कश्मीर की स्थिति सामरिक महत्व की होने के कारण इस पर गिद्ध दृष्टि निरंतर पड़ती रहती हैं इसी के चलते धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले प्रदेश में दिनोंदिन आतंकवादी घटनाएं यहां के जीवन ज्ञापन को प्रभावित करती है सांप्रदायिक कट्टरता और जिहाद के नाम पर यहां के दो बहुल संप्रदायों हिंदू तथा मुस्लिम में दंगे करवाने में असामाजिक तत्व कभी कभार सफल भी रहे हैं इसी का एक उदाहरण है 90 के दशक की समाप्ति तक आते-आते कश्मीरी पंडितों का कश्मीर से पलायन भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना रही जिसमें लगभग तीन लाख कश्मीरी पंडितों को अपने घर  को छोड़कर पलायन को मजबूर होना पड़ा.

विश्व के सबसे ऊंचे ग्लेशियर सियाचिन पर भारत ने 1984 में अधिकार कर लिया. कश्मीर का कुल क्षेत्रफल 2,22,236 वर्ग किलोमीटर है तथा पाक अधिकृत कश्मीर का क्षेत्रफल 1,38,124 वर्ग किलोमीटर है लद्दाख में स्थित अक्साई चीन जिस पर सिंह ने कब्जा कर रखा है उसका क्षेत्रफल लगभग 1200वर्ग मील है इस प्रकार जम्मू कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान अफगानिस्तान तथा चीन से लगती है जम्मू कश्मीर के 3 बड़े क्षेत्र हैं जम्मू ,कश्मीर तथा लद्दाख.

लद्दाख को छोटा तिब्बत तथा बौद्ध संस्कारों का अद्भुत स्थल भी कहते हैं लद्दाख मैं दो बड़े स्थान लेह तथा कारगिल है लद्दाख ग्रेट हिमालय तथा काराकोरम के बीच में स्थित पहाड़ी इलाका है पर्यटन की दृष्टि से यह भी महत्वपूर्ण स्थान है.

जम्मू की स्थापना 14 वीं शताब्दी में जंबूलोचन के द्वारा की गई जम्मू तवी नदी के किनारे पर स्थित है जम्मू 305 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जिसका क्षेत्रफल लगभग 22 वर्ग किलोमीटर है इसे कश्मीर का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है जम्मू व्यापार वाणिज्य का केंद्र रहने के कारण आर्थिक दृष्टि से संपन्न है जम्मू में 18 सदी में डोगरा शासकों ने शासन किया जिससे डोगरा संस्कृति का विकास हुआ. 

शीत ऋतु में या बर्फबारी होने के कारण पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण के केंद्र है मार्च से लेकर अक्टूबर तक का समय पर्यटकों के लिए सुखद रहता है अक्टूबर में सर्दी बढ़ने के साथ ही बर्फबारी तेज हो जाती रास्ते रुक जाते हैं जम्मू मैं अत्यधिक मंदिर होने के कारण इसे मंदिरों का शहर भी कहा जाता है भू भाग से 10 से 12 किलोमीटर ऊंचा गुफा मंदिर वैष्णो देवी का मंदिर यहां का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है जम्मू कश्मीर की प्रमुख नदियों में झेलम चिनाब तथा सिंधु शामिल है.

जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर सेलम नदी के किनारे स्थित है श्रीनगर से 11 किलोमीटर दूर निशात गार्डन पर्यटन को आकर्षित करता है. जम्मू कश्मीर में सर्वाधिक स्थलाकृति विविधता पाई जाती है जहां एक तरफ बड़े-बड़े पर्वत शिखर है तो घाटियों की गहराई भी कम नहीं है जम्मू कश्मीर पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है इसी कारण जम्मू-कश्मीर के आय के स्रोतों में पर्यटन का महत्वपूर्ण स्थान है जम्मू कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में डल झील जो सर्दियों में जम जाती है और डल झील के हाउसबोट जिसे स्थानीय भाषा में  शिकारा कहा जाता है का आनंद लेना पर्यटकों सबसे पसंदीदा कार्यक्रम होता है.

यहां स्थित शालीमार गार्डन जहांगीर के द्वारा निर्मित है इसमें गुलमर्ग स्थित है जो फूलों के बागो के लिए प्रसिद्ध है श्रीनगर के पास स्थित सोनमर्ग अपने विशिष्ट आकर्षण के लिए प्रसिद्ध है. लेह लद्दाख गर्मियों के मौसम में पर्यटन का प्रमुख केंद्र रहता है इसके अलावा वैष्णो देवी गुलमर्ग अमरनाथ पटनीटॉप पहलगाम सोनमर्ग लामागुरु नुब्रा वैली  हेमिस सनासर अनंतनाग प्रमुख पर्यटन स्थल है.

दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान किश्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान तथा चांगथाग वन्य जीव अभ्यारण्य को देखने के लिए हजारों की तादाद में पर्यटक आते हैं. खारदुंगला पास मैग्नेटिक हिल जाॅस्कर घाटी तथा धार्मिक स्थल कटरा का भ्रमण करने भी बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. कश्मीर की कश्मीरी शॉल विश्व प्रसिद्ध है जिसका निर्माण बाबर की काल से चला आ रहा है जम्मू कश्मीर की प्रमुख झीलों में में डल कुला तथा नगीन प्रमुख है.

कश्मीरी लोगों का प्रमुख खाद्यान्न चावल है इसके साथ ही गेहूं ज्वार तथा अन्य खाद्यान्नों का उपयोग भी किया जाता है यहां पर मुख्य रूप से सांप्रदायिक भोजन का प्रचलन है. अन्य फल तथा सब्जियों का उत्पादन भी भरपूर मात्रा में किया जाता है प्रमुख फलों में अखरोट बादाम नाशपाती सेव तथा केसर का उत्पादन बड़े स्तर पर किया जाता है.