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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध Essay on Beti Bachao Beti Padhao in Hindi

नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख के माध्यम से हम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध Essay on Beti Bachao Beti Padhao in Hindi के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध Essay on Beti Bachao Beti Padhao in Hindi
भारतीय विरासत में महिलाओ को दैवीय रूप का दर्जा प्राप्त है. देवियों की पूजा के अवसर पर महिलाओ की पूजा विशेष रूप से देखने को मिलती है. आज हम सभी भारतीय कन्या पूजन के लिए अनेक त्यौहार मनाते है.

हमारे प्राचीन धर्मग्रंथो तथा काव्यो में महिलाओ की महिमा को दर्शाया गया है. यानि महिलाओ को प्राचीन समय से महत्व दिया जा रहा है. लेकिन आज का पुरुषप्रधान समाज बालिकाओ और महिलाओ को स्वीकार ही नहीं करता है.

जो हमारे लिए चिंता का विषय है. लोग नवीनतम तकनीको के माध्यम से बालिकाओ को समाप्त करने में लगे हुए है. हर व्यक्ति बेटे को चाहता है. लेकिन बेटियों को कोई नहीं चाह रहा है.

बेटे के जन्म पर खुशियां बांटी जाती है. तथा पार्टिया मनाई जाती है. और बेटे को हीरा मान कर उसका स्वागत किया जाता है. लेकिन बात बालिकाओ पर आती है,

तो वही लोग इसे पाप कर्मो का फल समझते है. आखिर बेटे और बेटी में इतना भेदभाव क्यों. क्यों आज के लिए कन्याओ की हत्या कर रहे है. क्यों लोग बालिकाओ यानी देवीय शक्ति को समाज में नहीं चाहते है.

इन सभी के पीछे का मुख्य कारण दहेज़ प्रथा जैसी कुप्रथाए है. जो बालिकाओ के जीवन में बधाए बन रही है. आज के लोग तकनीक का प्रयोग कर कन्या भ्रूण हत्या से बालिकाओ को गर्भ में ही मौत के घात उतार देते है.

इसके कारण प्राचीन प्रथाए है, जो बेटियों के जीवन के लिए आज भी संकट बनकर सामने आ रही है. बेटी को बड़ा करना उसका विवाह करना तथा दहेज़ देनाइन कार्यो को करने की बजाय लोग बालिकाओ को समाप्त करना ही उचित समझते है.

यदि कन्याओ के विरुद्ध इसी प्रकार अपराध बढ़ते गए. तो बालिकाओ की कमी हो जाएगी. और समाज में बालिकाओ के बिना वंश भी खत्म हो जाएँगे.

बिना कन्या पुत्र विवाह किससे करेंगे. बिना विवाह वंश का विकास कैसे होगा? आज की कन्या कल की महिला होगी, इसलिए समाज में बालिकाओ का विशेष महत्व है.

बालिकाओ का लिंगानुपात समाज के लिए चिंता का विषय है. इसलिए हमें बालिकाओ का सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी. तथा उनके खिलाफ हो रहे अपराधो पर रोक लगानी होगी.

हालाँकि सरकार पिछले कई सालो से प्रयासरत है. जिसके परिणामस्वरूप बालिकाओ को संरक्षण मिल रहा है. तथा बालिकाओ के लिंगानुपात में भी वृदि देखि जा रही है. जो हमारे लिए अच्छा संकेत है.

कन्याओ की हत्या मानवता का प्रतीक नहीं है. हमें मानवता का सन्देश देकर बालिकाओ की सुरक्षा करनी होगी. तथा बालिकाओ के खिलाफ अपराध करने वालो को दण्डित करना होगा.

बालिकाए हमारे लिए बोझ नहीं सम्पति है. भारतीय सरकार द्वारा बेटियों के संरक्षण और शिक्षा के लिए बेटी बचाओ बेटी पढाओ जैसे अनेक मुहीम चलाई जा रही है. हमें इन अभियानों का सहयोग कर सभी को बालिकाओ के महत्व के प्रति जागरूक करना होगा.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध Essay on Beti Bachao Beti Padhao in Hindi

बेटियां परिवार के कुल को बढ़ाती है,
ना जाने क्यू पैरों तले कुचल दी जाती है''

हमारे देश में प्राचीन समय से महिलाओ को पुरुषो की तुलना में बहुत कम अधिकार प्राप्त है. उनके लिए शिक्षा की व्यवस्था भी नहीं होती थी.

महिलाए सिर्फ घर का ही काम करती है.पर आज के समय में सरकार महिला शिक्षा पर काफी ध्यान केन्द्रित कर रही है.और महिलाओ को अधिकार दिलवाने के लिए अनेक नए-नए अभियान चलाकर महिलाओ को शिक्षा प्राप्त कराने का सरकार प्रयास कर रही है.

बेटी है परिवार का आधार
जीवन जीने का है उसको अधिकार,
शिक्षा को वह बनाकर हथियार
करेगी आने वाली पीढ़ी का उद्धार,
पढाओ बेटी, दो स्वतंत्रता का अधिकार,
मत मानो बेटी को भार,
बढ़ाओ कदम, करो ये सब स्वीकार

कई लोग ऐसे भी है. जो  बेटियों और महिला समाज से ही जलते है. महिलाओ को परिवार में चाहते ही नही है. जन्म लेने से पूर्व ही कन्या भूर्ण हत्या कर दी जाती है. पर ऐसा करने वाले इन्सान खुद को क्या समझते है.

इनसे बड़ा कोई पागल इस संसार में होता ही नहीं है.किसी महिला ने ही तो इन्हें ही जन्म दिया होगा. यदि महिलाए नहीं होता तो मानव का होना असंभव था. पर लोग महिलाओ को घर में जन्म देना ही नहीं चाहते है.

‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान’ क्या है।

हमारे देश में लगातार बालिकाओ का स्तर कम होता जा रहा है. बालिकाओ की शिक्षा तथा संख्या बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान शुरू किया.

हमारे देश के विकास के लिए महिला-पुरुष दोनों को सामान अवसर मिलना जरुरी है.  हमारे देश में अर्थव्यवस्था को देखते हुए. इस अभियान को चलाना पड़ा. बेटियों को कोई अधिकार प्राप्त नहीं है.

शिक्षा करने का अधिकार मात्र पुरुषो को है. इस प्रकार की सामजिक प्रथाए के चलते बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान चलाया गया. इस भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है.

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का उद्देश्य
हमारे देश का सबसे महत्वपूर्ण अभियान बेटी बचाओ बेटी पढाओ है. इस अभियान की शुरुआत वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 22 जनवरी 2015  को हरियाणा के पानीपत नामक स्थान पर की.
इस अभियान को हरियाणा में शुरू करने का मुख्य कारण यही है. कि सबसे कम महिलाओ की संख्या हरियाणा में ही है. इसलिए वहा के लोगो को बेटियों के अधिकार की जानकारी देने के लिए इसे हरियाणा में शुरू किया गया. जिसका असर हरियाणा पर भी पड़ा. 
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बेटियों को शिक्षा प्रदान कराना तथा बेटियों का महत्व के बारे में समझाना है.इस योजना से महिलाओ की संख्या में काफी वृदि भी हुई है. इस अभियान को पूरा करने के लिए सभी को संगठित होकर महिलाओ के महत्व के बारे में समझना होगा. 
इस योजना का जिम्मा तीन प्रमुख मंत्रालयों को दिया गया. जिसमे - महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन मंत्रालय आदि प्रमुख है.
इस अभियान के बाद अनेक सामाजिक प्रथाओ को समाप्त कर दिया गया है. जिसमे सामाजिक भेदभाव तथा कन्या भूर्ण हत्या प्रमुख है. 
इन प्रथाओ को चलने वाले पर इस योजना के तहत अनेक कठोर नियम बनाये गए है. जो भी इन नियमो का उलंघन करेगा. उसे कठोर से कठोर सजा दी जाएगी. यहाँ तक कि कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामलों में कोई डॉक्टर पकड़ा गया तो उसे अपनी नौकरी को खोना पड़ सकता है.
आज हर जगह बेटी बचाओ बेटी पढाओ जैसे नारे लगाए गए है. जिससे लोग देखकर काफी प्रेरित हो रहे है. हमारे देश के इस अभियान से लोगो पर काफी प्रभाव देखने को मिला है.

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की आवश्यकता

हमारे देश की वर्तमान साक्षरता तथा लिंगानुपात के चलते बेटी बचाओ बेटी पढाओ  की आवश्यता पड़ी.  इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ये है. कि बेटियों को अपने अधिकार प्राप्त हो तथा बेटियों के साथ हो रहे अपराधो पर रोक लगाई जाए.
हमारे देश में आज भी महिलाओ के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे है.  हमारी बहन बेटियों की इज्जत बचाने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान को बढ़ावा देना चाहिए. यदि हम अपने देश को विकसित देखना चाहते है. तो हमें महिला शिक्षा पर ध्यान देना होगा. 
बेटियों के साथ सबसे बड़ा अपराध कन्या भ्रूण हत्या का हो रहा है. जो कि विज्ञानं की नई तकनीको के चलते हो रहा है. यदि ये तकनीक आज उपलब्ध नहीं होती तो हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या का अपराध तो नहीं हो पाता पर इसमे दोष लोगो का है.
इस तकनीक क प्रयोग लोग ही कर रहे है. खुद तकनीक इसका प्रयोग नहीं कर रही है.
पिछले कुछ दशको से सरकार के प्रयासों के चलते बेटियों की शिक्षा तथा लिंगानुपात में काफी वृदि हुई है. जो कि 
हमारे लिए शुभ सन्देश है. हम उम्मीद करते है. कि इसी प्रकार महिला शिक्षा में वृदि होती रहे. ताकि जल्द ही हमारा देश विकसित हो सकें.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध  Essay on Beti Bachao Beti Padhao in Hindi

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध  Essay on Beti Bachao Beti Padhao in Hindi

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भारत सरकार द्वारा चलाई गई एक महत्वाकांक्षी योजना है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य बहन बेटियों की घटती संख्या को रोकना है.

इस योजना की शुरुआत वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को की थी.इस योजना से बेटियों को काफी फयदा हुआ है.

Beti Bachao Beti Padhao Essay In Hindi

हमारे देश की संस्कृति में महिलाओ को देवी का दर्जा दिया जाता है. लेकिन वर्तमान में चल रही सामाजिक प्रथाए तथा भेदभाव महिलाओ के लिए संकट बन चूका है.

दहेज़ प्रथा  जैसी समस्या के चलते लोग नई तकनीको के का प्रयोग बेटियों को कन्या भ्रूण हत्या कर देते है.इसी कारण महिलाओ की संख्या में निरंतर कमी हो रही है.

बेटियों की पिछले कुछ दशको से संख्या में काफी कमी आई है. सन 2001 की जनगणना में लिंगानुपात देखे तो 1000 लडको पर  927 लडकियाँ थी. पर ये 10 साल बाद हुई.जनगणना में ये संख्या घटकर 1000 लडको पर 919 लडकिय हो गई. 

इस प्रकार पिछले कुछ दशको से बेटियों की संख्या में कमी आ रही है. और इसी प्रकार के हालात रहे.तो आने वाले कुछ सालो में बेटियों को इतिहास में ही देखा जायेगा.

बेटी अगर नहीं पढ़ी तो

उनकी आवाज उठाएगा कौन?

और मातृशक्ति नहीं बची तो

इतना दर्द सहेगा कौन? (प्रसव वेदना, लालन-पालन)

बेटियों की घटती संख्या को ध्यान में रखते हुए. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की शुरुआत की. तथा बेटियों के प्रति हो रहे अपराधो को रोकने के लिए इस अभियान को चलाया गया है. 

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को नियंत्रण में बनाये रखने के लिए महिला और पुरुष दोनों का सामान भागीदारी होना जरुरी है. महिलाओ के बिना मानव जीवन असंभव होता है.

महिलाओ की घटती संख्या हमारे भविष्य के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. हमारी माँ,बहन तथा पत्नी आखिर एक महिला ही होती है. इस पर हमें अम्ल करना चाहिए. कि हमें जन्म देने वाली भी तो एक महिला ही थी. यदि वह नहीं होती तो आज हमारा होना असंभव था. 

''बेटी नहीं बचाओगे तो बहु कहा से लाओगे''

इस पंक्ति का तात्पर्य यह है. कि यदि हम बेटी नहीं बचाएँगे तो बहु कहा से लायेंगे.यानि हमारी जो पत्नी होती है. वह किसी की तो बेटी है.और हमारी जो बेटी है.

वह किसी को तो पत्नी बनेगी. इसलिए बेटियों को बचाओ और उन्हें ज्ञान प्राप्त करवाओ जिससे वह आत्मनिर्भर बन सकें.

बेटियों की कम जनसंख्या के मुख्य कारण

बेटियों की जनसँख्या में लगातार कमी के कई कारण है. पर जिसमे कन्या भ्रूण हत्या तथा दहेज़ प्रथा को प्रमुख माना जाता है. 

कन्या भ्रूण हत्या -इस अपराध के चलते ही लोग महिला के गर्भ में ही विज्ञानं की नई तकनीक के कारण बेटा है. या बेटी इसका पता लगा देते है. और यदि बेटी होती है. तो उसे पेट में ही मार दिया जाता है.

पर वर्तमान में इस अपराध पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई. जो भी इस अपराध में पकड़ा गया. उसे कानूनन सजा दी जायेगा. 

दहेज प्रथा – ये एक सामाजिक प्रथा है. इस प्रथा के अनुसार लडके वाले जो भी मांगेगे वह लड़की वालो को देना होगा.इस प्रथा से डरते हुए गरीब लोग इस दहेज़ नहीं दे पाते है.

इसलिए वे अपने घर में बेटी को जन्म नहीं देना चाहते है. वे खुद का परिवार भी मुश्किल से चलाते है. उनके पास दहेज़ देने के लिए पैसे कहा से आयेंगे.

दहेज़ प्रथा के इस बोझ के कारण ही गरीब लोग कन्या भ्रूण हत्या जैसे बड़ा अपराध का शिकार होते है. वे इसके लिए मजबूर होते है. पर ये अपराध है.

इसलिए सरकार ने इस अपराध के कारण बन रहे दहेज़ प्रथा पर रोक लगा दी. और दहेज़ देने वाला और दहेज़ लेने वाला दोनों अपराधी घोषित होंगे.

इस प्रकार सरकार इन अपराधो को कम करने ला प्रयास कर रही है. जिससे काफी फायदा भी हुआ है. साथ ही बेटियों को पढ़ाने के लिए विशेष अवसर भी प्राप्त करवाए जा रहे है.

कई जगहों पर बालिका विद्यालयों का निर्माण किया गया है. जहाँ बालिकाओ को शिक्षा दी जाती है. बालिकाओ को सरकार आर्थिक सहायता भी कर रही है.

जिसमे कई योजनाओ की शुरुआत की गई है. जिसमे-सुकन्या समृद्धि योजना, लाडली योजना,गार्गी पुरस्कार योजना आदि अनेक योजनाओ को चलाकर सरकार बेटियों के महत्व को बढ़ावा दे रही है.

''बेटे भाग्य से प्राप्त होते है,
और बेटियों सोभाग्य से'' 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध Essay on Beti Bachao Beti Padhao in Hindi

हमारी सभ्यता और संस्कृति में नारियो के सम्मान का विशेष महत्व है.आज के लोगो में मानसिक विकास की गति धीमी होने कारण लोग नारियो के महत्व और उनके साथ व्यवहार को समझ नहीं पा रहे है.

लोगो को नारियो के सम्मान के लिए सरकार अनेक योजनाए चला रही है.लोग महिलाओ की आदर और सम्मान को छोड़कर उनके साथ अपराध कर रहे है. इसी समस्याओ को दूर करने के महिलाओ का शिक्षित होना.तथा मानसिक बुद्धि का विकास होना आवश्यक है.

महिलाओ की शिक्षा में विकास के लिए भारत सरकार ने बेटियों की शिक्षा पर जोर दिया है.इसलिए नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में साल 2015 में बेटी बचाओ बेटी पढाओ जैसी महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की इस योजना से बहन बेटियों की शिक्षा के स्तर में काफी सुधार आया है.

बेटी बचाओ बेटी पढाओ एक सरकारी योजना है.ये योजना बेटियों की शिक्षा और उनके जीवन में विकास के लिए चलाई गई है.

इस योजना का मुख्य उद्देश्य सभी बालिकाओ को साक्षर बनाना है.इस योजना में बेटियों के लिए शिक्षा की उच्च व्यवस्था की गई है.इस योजना का प्रसार-प्रचार किया जा रहा है.तथा बालिकाओ को इस योजना से लाभान्वित किया जा रहा है.

आज महिला साक्षरता दर पुरुष की साक्षर दर की तुलना में बहुत कम है.इसी कारण बालिका शिक्षा को महत्व दिया जा रहा है.हमारे देश में हरियाणा में सबसे ज्यादा अनपढ़ महिलाए है.

इसलिए हरियाणा सरकार ने लोगो की जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर ''बेटी की लोहड़ी'' नामक मिशन की शुरुआत की ये मिशन हर साल 14जनवरी को मनाया जाता है.

पिछले कुछ दशको से सामाजिक कुप्रथाओ के कारण बेटियों की संख्या में कमी आई है.विज्ञान की नई तकनीको की जगह से कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराध बढ़ रहे है.

इस अपराध का सहारा लेकर लोग बेटियों को जन्म से पूर्व मारकर इस अपराध को बढ़ावा देते है.ओ कि हमारे लिए चिंता का विषय है.

कुछ अपराधों और लोगो में जागरूकता के आभाव के कारण बेटियों का लिंगानुपात बहुत तेजी से घट रहा है.कई प्रथाए है.जो बालिकाओ के विकास में बाधा बन रही है.

बालिकाओ को अपने सम्पूर्ण जीवन में भेदभाव से जीना पड़ता है.जिससे उनका विकास संभव नहीं हो पाता है.
भारत सरकार अपनी योजनाओ से बेटियों की शिक्षा व्यवस्था खान-पान तथा उनके अधिकारों की रक्षा की व्यवस्था कर रही है.

जो कि बालिकाओ का एकमात्र सहारा है.सरकार बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना से सभी लोगो को बेटियों की शिक्षा के लिए जागरूक बना रहे है.जो कि एक अहम कदम है.

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना के लाभ

  1. इस योजना में लाभान्वित होने के लिए 10 वर्ष तक की अपनी बेटी का बैक खाता खुलवा सकते है.
  2. इस योजना का उदेश्य बालिकाओ के स्तर को ऊपर उठाना है.
  3. इस योजना से कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराध पर रोक लगाई जा सकती है.
  4. लोगो की जागरूकता बढाने के लिए
  5. बैंक खाते में बेटियों को आर्थिक सहायता मिलेगी.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की पात्रता/दस्तावेज

  1. अपनी बेटी की अधिकतम आयु 10 वर्ष तक होनी चाहिए.
  2. भारत की नागरिकता
  3. सुकन्या समृद्दी योजना में आवेदन किया होना चाहिए.
  4. मूल निवास पत्र 
  5. आधार कार्ड, राशन कार्ड,माता-पिता का पहचान पत्र
  6. बैक खाता,मोबाइल नंबर,फोटो आदि.
बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना पर आवेदन कर इसका लाभ ले सकते है.इसका आवेदन ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों तरीके से किया जा सकता है.इस योजना से सभी को लाभान्वित करें.तथा बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना में सरकार का सहयोग करें.

हमें नारियो के महत्व और शिक्षा के स्तर में विकास की जरुरत है.इसलिए सभी को जागरूक करें.और बेटियों को निःशुल्क शिक्षा दिलाकर उनके आत्मनिर्भर भविष्य की नीव डाले.

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