100- 200 Words Hindi Essays 2022, Notes, Articles, Debates, Paragraphs Speech Short Nibandh Wikipedia Pdf Download, 10 line

गणगौर पर निबंध Essay On Gangaur In Hindi Gangaur Festival

गणगौर पर निबंध- नमस्कार दोस्तों आप सभी को गणगौर त्यौहार की हार्दिक बधाईयाँ. आज के इस आर्टिकल में हम गणगौर त्यौहार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे.

गणगौर पर निबंध Essay On Gangaur In Hindi Gangaur Festival

हमारे राजस्थान को त्यौहारो का राज्य माना जाता है। यहा की संस्कृति और त्योहार हमारे इस राज्य को एक शानदार रूप दिलाती है। हमारे इस राज्य मे हर समय अलग-अलग त्योहार मनाये जाते है। हमारे राज्य की लोक संस्कृति ही हमारे राज्य को सदैव सबसे अग्रणी रखने मे सहायता करती है। हमारे राज्य के प्रमुख उत्सवो मे एक नाम गणगौर का भी आता है। ये राजस्थान का सबसे लोगप्रिय तथा लंबा चलने वाला त्योहार है। इसे राजस्थानी लोग बड़ी धूम-धाम के साथ मनाते है।


गणगौर उत्सव बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा है। ये उत्सव माता पार्वती ने शुरू किया था। ये त्योहार कुवांरी लड़कियो के लिए होता है। इस उत्सव माता पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने के लिए किया था। जिसके बाद आज इस त्योहार को हर कुंवारी लड़किया मनाती है।


इस त्योहार का इतिहास पार्वती से जुड़ा है। माता पार्वती जो कि अपने पिछले जन्म मे गंवरी के रूप मे भगवान शिव की पत्नी थी। गंवरी का अपने पिता के घर मे कोई स्थान न होने के कारण उन्हे सभा मे नहीं बुलाने के कारण गंवरी ने अपने पिता के घर मे जाकर आत्महत्या कर ली पर उसने मरने से पहले भगवान से वरदान मांगा था। कि वह अगले जन्म मे भी भगवान शिव की पत्नी बने। तथा उनकी सेवा करें। 


इसके बाद गंवरी ने माता पार्वती के रूप मे जन्म लिया था। इसलिए पार्वती को गौरी भी कहते है। पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने के लिए गणगौर नामक इस उत्सव की शुरुआत की थी। इस उत्सव मे गौरी की प्रतिमाए बनाकर सुरक्षित रखी जाती है। तथा गणगौर के मेले के अंतिम दिन इस प्रतिमा का परित्याग ही इस उत्सव का प्रमुख उद्देश्य होता है।


गौरी की प्रतिमा लकड़ी की बनाई जाती है। जिसे कपड़े पहनाये जाते है। तथा इसे आभूषणो से सजाया जाता है। गौरी का यात्रा सात दिन तक लगातार चलती है। इसमे सभी एलजी भाग लेते है। तथा एक दूसरे को रंग-लगाकर अपनी खुशी व्यक्त करते है। गणगौर का मेला सात दिन तक चलता है। इसमे सात दिन लोग अलग-अलग कपड़े पहनते है। जो इस मेले मे भाग लेते है। उनके लिए पौशाक मुक्त मे दी जाती है।


गणगौर उत्सव का प्रमुख मेला राजस्थान के जयपुर मे भरता है। ये मेला प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल तीज और चौथ को गणगौर बाजार मे भरा जाता है। ये अँग्रेजी महीनो मे मार्च-अप्रैल मे लगता है। ये उत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। जयपुर मे भरा जाने वाला मेला इतना आकर्षण होता है। कि इसे देखने लोग विदेशो से भी यहा आते है। 


इस मेले मे सभी लोग अपनी राजस्थानी पौशाक पहनकर हमारी संस्कृति का सम्मान करते है। तथा महिलाए राजस्थानी पौशाक के साथ राजस्थानी लोकगीत गाती है। शाम के समय को राजस्थान के राज्य पशु ऊंट तथा रथ पर संवार होकर लोग त्रिपोलिया दरवाजे की और नाचते-गाते और खाते-पीते जुलूस मनाते हुए पर चलते है। इसमे पुलिस तथा बैंडबाजे वाले भी प्रमुख रूप से शामिल होते है। तथा गणगौर पर्व को बड़ी धूम-धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाते है। 


ये मेला जयपुर के साथ-साथ अन्य जिलो मे भरा जाता है। इस मेले मे कुंवारी कन्याएँ सिर पर कलस रखकर राजस्थानी नृत्य करती है। इस मेले मे लोगो की संख्या इतनी हो जाती है। कि पूरे बाजार मे जाम लग जाता है। तथा पूरा शहर गूंज उठता है। महिलाए अपने घर मे बैठकर गवर कि पुजा करती है। तथा गवर का चित्र बनाया जाता है। या गंवर के स्थान पर उनकी कोई प्रतिमा लगाई जाती है। 


और महिलाए उनकी पुजा करती है। तथा अपनी इच्छाओ की पूर्ति की प्रार्थना करती है। तथा जो सबसे बुजुर्ग महिला होती है। वह पाँच गंवरी की कहानिया सुनती है। तथा अन्य महिलाए उनकी बाटो को ध्यान पूर्वक सुनती है। तथा हरे राम,हरे राम उच्चारण करती हुई,बाजरे के दानो को गंवरी के आगे चढ़ाती है। तथा भगवान शिव-पार्वती की प्रेम कहानिया सुनती है।


हमारे राजस्थान मे होने वाले मेले,उत्सव तथा परम्पराओ को जीवित रखने के लिए तथा हमे लोकपरम्पराओ की जानकारिया देने के लिए अनेक त्योहार उत्सव तथा मेले भरे जाते है। हमारी परंपरा तथा संस्कृति को जीवित रखने के उद्देश्य से अनेक उत्सवो का आयोजन होता है। प्रत्येक उत्सव मे अनेक बुराइया होती हमे उन बुराइयों को कम करने का यथासंभव प्रयास करना चाहिए। तथा अपनी संस्कृति को बचाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।


आशा करता हूँ, दोस्तो आज का हमारा लेख निबंध अनुच्छेद पैराग्राफ गणगौर पर निबंध Essay On Gangaur In Hindi Gangaur Festival आपको पसंद आया होगा। यदि हमारा ये लेख आपको पसंद आया तो इसे अपने तमाम दोस्तो के साथ शेयर करें। तथा हमारी संस्कृति तथा लोकपरम्पराओ क बारे मे अध्ययन कराये।