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आजादी का महत्व पर निबंध | Essay On Importance of Freedom in Hindi

आजादी का महत्व पर निबंध | Essay On Importance of Freedom in Hindi- नमस्कार दोस्तों आप स्वागत है, आज के हमारे इस आर्टिकल में आज के आर्टिकल में हम हमारे जीवन में आजादी यानि स्वतंत्रता के महत्व को विस्तार से जानेंगे.

आजादी का महत्व पर निबंध | Essay On Importance of Freedom in Hindi

हर साल भारत और भारतीय लोग 15 अगस्त को आजादी दिवस मनाते हैं क्योंकि 15 अगस्त 1947 में ही हमारा भारत देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था और एक स्वतंत्र राष्ट्र बन कर दुनिया के नक्शे पर उभरा था। 


भारत को आजाद कराने में असंख्य क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया और असंख्य लोगों ने अपनी जवानी कुर्बान कर दी। इस प्रकार लंबे संघर्ष के बाद देश को आजादी हासिल हुई जिसका महत्व आज हर भारतवासी भली-भांति समझ रहा है।


हम आजादी का त्यौहार इसलिए मनाते हैं क्योंकि यह त्यौहार हमें इस बात की याद दिलाता है कि हम अब एक स्वतंत्र राष्ट्र बन चुके हैं। इसके अलावा आजादी दिवस मनाने का एक अन्य कारण यह भी है कि इस दिन हम उन सभी भारत माता के वीर सपूतों को श्रद्धा सुमन और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने देश को आजाद करवाने में तन मन धन से सहयोग दिया और अपने प्राणों को भी निछावर कर दिया।


भारत में रहने वाला हर नागरिक साथ ही भारत देश के साथ लगाव रखने वाला हर व्यक्ति बड़े ही उत्साह के साथ आजादी के महत्व को समझते हुए आजादी का त्यौहार मनाता है, क्योंकि 15 अगस्त का दिन हर भारतवासी के लिए अति महत्वपूर्ण दिन होता है। यह दिन हर हिंदुस्तानी के हृदय में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।


पहले हमारा भारत देश जब आजाद नहीं था तब हमें अंग्रेजी नियमों का पालन करना पड़ता था। हालांकि अंग्रेजों ने नियम और कानून तो बनाए हुए थे परंतु वह सभी नियम और कानून अंग्रेजो के हित के लिए ही थे और इसलिए अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए कानून को काला कानून कहा जाता था जो भारतीय लोगों के लिए अत्यंत ही दमनकारी थे। 


इसके अलावा गुलामी के दरमियान अंग्रेजी सेना के द्वारा और अंग्रेज अधिकारियों के द्वारा बड़े पैमाने पर भारतीय लोगों के साथ जुल्म किया जाता था, वह जब चाहे तब भारतीय लोगों की हत्या कर देते थे, उनकी महिलाओं की आबरू के साथ खिलवाड़ करते थे परंतु अब जब हमारा देश आजाद हो गया है तो हमें अंग्रेजी हुकूमत और अंग्रेजी नियमों से छुटकारा मिल गया है।


अब हमारे भारत देश में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के द्वारा बनाए गए संविधान का पालन होता है और संविधान के हिसाब से भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को मूलभूत अधिकार दिए गए हैं.


और किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है तो इसके लिए न्यायपालिका की व्यवस्था भी हमारे भारतीय देश में की गई है जो बिना किसी जाति मजहब पंथ संप्रदाय के भेदभाव के सभी लोगों को एक समान न्याय देने का काम करती है।


स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, यही वह नारा था जिसने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीय लोगों के मन में भीषण विद्रोह पैदा किया था और पूरे देश में भयंकर क्रांति भी पैदा कर दी थी। 


यह नारा महान क्रांतिकारी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी के द्वारा दिया गया था। देश की आजादी के लिए जितने भी बलिदानियो ने अपना बलिदान दिया है हर भारतवासी को उन बलिदानों के प्रति नतमस्तक होना चाहिए साथ ही उन बलिदानियो के द्वारा बहाए गए खून की कीमत को भी हमें समझना चाहिए।


हमारी भारत भूमि पर चंद्रशेखर, सुभाष चंद्र बोस, गांधी, नेहरू, भगत सिंह जैसे न जाने कितने महान क्रांतिकारी हुए, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत का डटकर सामना किया और अंग्रेजी अत्याचारों का पुरजोर विरोध किया। 


इनमें से कुछ क्रांतिकारियों ने तो अंग्रेजी हुकूमत का सामना करने के लिए शांति का मार्ग अपनाया वही कुछ गरम दल के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को जल्द से जल्द भारत से उखाड़ फेंकने के लिए हिंसा का मार्ग अपनाया। 


हालांकि सभी का एक ही लक्ष्य था कि भारत को आजाद करवाया जाए और जब भारत आजाद हो गया तो आज सभी लोग खुली हवा में सांस ले रहे हैं और सभी लोग अपनी अपनी रोजी रोटी कमा रहे हैं।


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