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आजादी का महत्व पर निबंध | Essay On Importance of Freedom in Hindi

आजादी का महत्व पर निबंध | Essay On Importance of Freedom in Hindi- नमस्कार दोस्तों आप स्वागत है, आज के हमारे इस आर्टिकल में आज के आर्टिकल में हम हमारे जीवन में आजादी यानि स्वतंत्रता के महत्व को विस्तार से जानेंगे.

आजादी का महत्व पर निबंध | Essay On Importance of Freedom in Hindi

आजादी शब्द जब भी हमारे जहन में आता है, तो हमारे देश की आजादी नजर आती है. इसी प्रकार हर व्यक्ति को अपने जीवन को जीने की आजादी होनी चाहिए. जो हमें अपना सविंधान प्रदान भी करता है.

एक स्वतन्त्र व्यक्ति जीवन में उन्नति की राह पर चलकर जीवन को सफल बना सकता है. हर निर्णय पर अपना खुद का एक मत होना चाहिए. ततः अ

हर साल भारत और भारतीय लोग 15 अगस्त को आजादी दिवस मनाते हैं क्योंकि 15 अगस्त 1947 में ही हमारा भारत देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था और एक स्वतंत्र राष्ट्र बन कर दुनिया के नक्शे पर उभरा था। 


भारत को आजाद कराने में असंख्य क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया और असंख्य लोगों ने अपनी जवानी कुर्बान कर दी। इस प्रकार लंबे संघर्ष के बाद देश को आजादी हासिल हुई जिसका महत्व आज हर भारतवासी भली-भांति समझ रहा है।


हम आजादी का त्यौहार इसलिए मनाते हैं क्योंकि यह त्यौहार हमें इस बात की याद दिलाता है कि हम अब एक स्वतंत्र राष्ट्र बन चुके हैं। इसके अलावा आजादी दिवस मनाने का एक अन्य कारण यह भी है कि इस दिन हम उन सभी भारत माता के वीर सपूतों को श्रद्धा सुमन और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने देश को आजाद करवाने में तन मन धन से सहयोग दिया और अपने प्राणों को भी निछावर कर दिया।


भारत में रहने वाला हर नागरिक साथ ही भारत देश के साथ लगाव रखने वाला हर व्यक्ति बड़े ही उत्साह के साथ आजादी के महत्व को समझते हुए आजादी का त्यौहार मनाता है, क्योंकि 15 अगस्त का दिन हर भारतवासी के लिए अति महत्वपूर्ण दिन होता है। यह दिन हर हिंदुस्तानी के हृदय में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।


पहले हमारा भारत देश जब आजाद नहीं था तब हमें अंग्रेजी नियमों का पालन करना पड़ता था। हालांकि अंग्रेजों ने नियम और कानून तो बनाए हुए थे परंतु वह सभी नियम और कानून अंग्रेजो के हित के लिए ही थे और इसलिए अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए कानून को काला कानून कहा जाता था जो भारतीय लोगों के लिए अत्यंत ही दमनकारी थे। 


इसके अलावा गुलामी के दरमियान अंग्रेजी सेना के द्वारा और अंग्रेज अधिकारियों के द्वारा बड़े पैमाने पर भारतीय लोगों के साथ जुल्म किया जाता था, वह जब चाहे तब भारतीय लोगों की हत्या कर देते थे, उनकी महिलाओं की आबरू के साथ खिलवाड़ करते थे परंतु अब जब हमारा देश आजाद हो गया है तो हमें अंग्रेजी हुकूमत और अंग्रेजी नियमों से छुटकारा मिल गया है।


अब हमारे भारत देश में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के द्वारा बनाए गए संविधान का पालन होता है और संविधान के हिसाब से भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को मूलभूत अधिकार दिए गए हैं.


और किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है तो इसके लिए न्यायपालिका की व्यवस्था भी हमारे भारतीय देश में की गई है जो बिना किसी जाति मजहब पंथ संप्रदाय के भेदभाव के सभी लोगों को एक समान न्याय देने का काम करती है।


स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, यही वह नारा था जिसने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीय लोगों के मन में भीषण विद्रोह पैदा किया था और पूरे देश में भयंकर क्रांति भी पैदा कर दी थी। 


यह नारा महान क्रांतिकारी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी के द्वारा दिया गया था। देश की आजादी के लिए जितने भी बलिदानियो ने अपना बलिदान दिया है हर भारतवासी को उन बलिदानों के प्रति नतमस्तक होना चाहिए साथ ही उन बलिदानियो के द्वारा बहाए गए खून की कीमत को भी हमें समझना चाहिए।


हमारी भारत भूमि पर चंद्रशेखर, सुभाष चंद्र बोस, गांधी, नेहरू, भगत सिंह जैसे न जाने कितने महान क्रांतिकारी हुए, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत का डटकर सामना किया और अंग्रेजी अत्याचारों का पुरजोर विरोध किया। 


इनमें से कुछ क्रांतिकारियों ने तो अंग्रेजी हुकूमत का सामना करने के लिए शांति का मार्ग अपनाया वही कुछ गरम दल के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को जल्द से जल्द भारत से उखाड़ फेंकने के लिए हिंसा का मार्ग अपनाया। 


हालांकि सभी का एक ही लक्ष्य था कि भारत को आजाद करवाया जाए और जब भारत आजाद हो गया तो आज सभी लोग खुली हवा में सांस ले रहे हैं और सभी लोग अपनी अपनी रोजी रोटी कमा रहे हैं।


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आजादी यानी स्वतंत्रता जो व्यक्ति को एक मूल्यवान और महत्वपूर्ण जीवन को अपने ढंग से शांतिपूर्ण तरीके द्वारा जीने का अवसर प्रदान करता है शांति हर व्यक्ति हर जीव के लिए महत्वपूर्ण होती है।

हर व्यक्ति को अपने जीवन जीने की आजादी चाहिए आजादी वह होती है जिसमें अपने विचारों को अपने ढंग से अपने तरीके द्वारा जीने और अपने जीवन का निर्धारण स्वयं द्वारा किया जाए उसे हम आजादी कहते हैं और आजादी का अधिकार हमें सविधान में भी दिया गया है और यह हमारे एक मौलिक अधिकार हैं इसलिए आजादी व्यक्ति की पहली प्राथमिकता है।

आजादी मानव मात्र के लिए ही नहीं बल्कि पशु पक्षियों के लिए भी इसका विशेष महत्व होता है.  पशु पक्षियों से अपने प्राकृतिक की बिछुड़ना उसको कितना सताता है? इस तथ्य का अनुभव आप अपनी गुलामी से जोडकर उनके दुःख दर्द को देख सकते है. 

एक व्यक्ति की आजादी ना केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही आजादी को हम स्वतंत्रता कह सकते हैं बल्कि राष्ट्रीय राजकीय और सामाजिक स्तर पर भी एक व्यक्ति का आजाद होना या किसी देश का आजाद होना आजादी कहलाता है।

यदि हम एक देश की आजादी के रूप में बात करें तो एक व्यक्ति अपने देश में अपनी न्याय समानता तथा अपने अधिकार कर्तव्य आदि के बारे में देखता है। 

एक देश की उन्नति से ही व्यक्ति की उन्नति विकास प्रगति आदि संभव है क्योंकि देश के बिना किसी भी व्यक्ति का कोई भी अस्तित्व संभव नहीं है।

एक आजाद व्यक्ति अपने जीवन में वह सब कार्य कर सकता है जो एक व्यक्ति में करने की क्षमता हो सकती है जैसे कई लोग मनोवैज्ञानिक वैज्ञानिक और आर्थिक रूप से अनेक प्रकार के कार्य करने में सक्षम होने वाले व्यक्ति हर कार्य करने में सफल हो सकते हैं यदि उन्हें स्वतंत्रता दी जाए। 

बात हमारे देश भारत की की जाए तो हमारा देश आजादी से पूर्व एक बिछड़ा हुआ देश था लेकिन आजादी के बाद जब हमारे देश के सभी नागरिकों को स्वतंत्रता के साथ कार्य करने और अपने कार्य को सही ढंग से पहचान कर जीवन में उन्नति करने का अवसर मिला तो हमारा देश आज उन्नति कर रहा है जिसका कारण आजादी ही है। इसलिए आजादी का हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण रोल होता है। 

व्यक्ति की आजादी यदि उसे मान मर्यादा में रहते हुए मिल जाए तो उस व्यक्ति के लिए जीवन स्वर्ग रूपी बन जाता है. वही यदि आजादी आने पर व्यक्ति मर्यादा का उल्लंघन करने लगे तो उसकी आजादी गुलामी से बत्तर होती है.


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